भास्कर इंपैक्ट / गिरवी कारोबार से जुड़े 2 लाख राजस्थानियों को राहत, ऋण कानून पर कर्नाटक हाईकोर्ट की रोक



Bhaskar Impact: loan law banned in Karnataka
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Bhaskar Impact: loan law banned in Karnataka

  • यह कानून पूर्ववर्ती कुमार स्वामी सरकार ने दो महीने पहले सरकार गिरने से दो दिन पहले लागू किया था
  • इस कानून की चपेट में सिर्फ राजस्थानी आ रहे थे, क्योंकि मारवाड़ी समाज भाजपा का वोट बैंक माना जाता है
  • कर्नाटक पहुंची भास्कर की टीम ने मामले में की छानबीन, हाईकोर्ट में ग्राउंड रिपोर्ट बनी बहस का मुद्दा

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 06:40 AM IST

बेंगलुरु (भंवर जांगिड़). कर्नाटक में गिरवी कारोबार से जुड़े 2 लाख राजस्थानियों को कर्नाटक हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए ऋण राहत अधिनियम 2018 पर रोक लगा दी है। यह कानून पूर्ववर्ती कुमार स्वामी सरकार ने दो महीने पहले सरकार गिरने से दो दिन पहले लागू किया था।

 

हाईकोर्ट में छाई रही भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट

कुमार स्वामी का यह राजनीतिक दांव था, जिसके बल पर उनकी पार्टी गरीबों के वोट हासिल करना चाहती थी। परंतु इस कानून की चपेट में सिर्फ राजस्थानी आ रहे थे, क्योंकि मारवाड़ी समाज भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। भास्कर ने इस मामले काे लेकर राजस्थान से एक टीम वहां भेजी और ग्राउंड रिपोर्ट कराई। यही ग्राउंड रिपोर्ट हाईकोर्ट में छाई रही। 

 

गरीब हित में बता लागू किया कानून, वे खुद खिलाफ थे
गिरवी कारोबारियों के वकीलों ने बताया कि यह कानून गरीब के हित में बता कर लागू किया है, जबकि यह गरीबों को ही परेशानी में डाल रहा है। वे खुद खिलाफत कर रहे हैं, क्योंकि आपात स्थिति में दो-पांच हजार रुपए का ऋण कोई बैंक और को-ऑपरेटिव सोसायटी नहीं देती, यह गिरवी कारोबारी ही हाथों-हाथ देता है। कर्नाटक की रूरल इकोनॉमी में राजस्थानी गिरवी कारोबारियों का सबसे बड़ा योगदान है। न्यायाधीश आलोक अराधे ने गुरुवार को दोनों पक्ष सुनने के बाद पहली ही सुनवाई में स्टे देकर इस कानून पर रोक लगा दी।

 

कर्नाटक में गिरवी के काराेबार में 90 प्रतिशत राजस्थानी

मामले में पैरवी करने के लिए पाली सांसद और पूर्व विधि राज्य मंत्री पीपी चाैधरी भी हाईकाेर्ट में पहुंचे और राजस्थानियाें के पक्ष में बहस की। कुमार स्वामी की ओर से लाए गए कर्नाटका ऋण राहत अधिनियम के तहत 1.20 लाख रुपए सालाना आय वाले या 2 एकड़ से कम जमीन वाले लाेगाें की ओर से लिया गया पूरा कर्ज माफ करना था या उनकी ओर से गिरवी रखा गया साेना भी लाैटाना था। ब्याज भी नहीं वसूलना था। इसका असर 14 हजार रजिस्टर्ड लाइसेंसी राजस्थानियाें पर पड़ा, क्याेंकि कर्नाटक में गिरवी के काराेबार में 90 प्रतिशत राजस्थानी ही हैं।

 

ऋण वसूली का एक भी केस नहीं
भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में ऐसे गरीबों की कहानियां थी, जिनमें किसी को बेटी की डिलिवरी कराने के लिए तत्काल कुछ रुपयों की जरूरत थी तो किसी को परिजनों का इलाज कराने के लिए। मगर इस कानून के भय से गिरवी कारोबारियों ने कर्ज देने से मना कर दिया। कर्नाटक में राजस्थानियों ने लाखों लोगों को 20 हजार करोड़ का ऋण महज 14 प्रतिशत के ब्याज पर दे रखा है। पीढ़ियों से यह धंधा करने वाले किसी कारोबारी के खिलाफ ऋण वसूली का एक भी केस नहीं है।

 

इस जीत में भास्कर का बड़ा सहयोग
कर्नाटक के सियासी दलों को वोट बैंक की चिंता थी। इसलिए वे हमारा साथ नहीं दे रहे थे। स्थानीय समाचार पत्र भी चुप थे। भास्कर ने राजस्थान से टीम भेज कर हमारी बात को जिस तरह से उठाया, वही आज कोर्ट में आधार बने। हमारी जीत में भास्कर का अहम योगदान है। -महेंद्र कुमार, अध्यक्ष पॉन ब्रोकर्स एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन, बेंगलुरु

 

राजस्थानियों पर टिकी है कर्नाटक की रूरल इकोनॉमी
केंद्र में विधि राज्य मंत्री रहने के दौरान कर्नाटक सरकार की यह फाइल देख रखी थी। हमने दो बार फाइल लौटा दी, मगर बाद में कुमार स्वामी ने इस कानून को पास करवा लिया था जो राजस्थानियों के हित में नहीं था। जब यह मामला उजागर हुआ और राजस्थानियों की पीड़ा सामने आई तो मैंने कर्नाटक हाईकोर्ट में उनकी ओर से पैरवी करना तय किया। गुरुवार को कोर्ट को बताया कि 20 हजार करोड़ का ऋण इन्हीं लोगों ने दिया है, यह डूब गया तो क्या होगा? कर्नाटक टॉप 5 इकोनॉमिक स्टेट में शामिल है, यह दर्जा इन्हीं राजस्थानियों के कारण है। यह उन्हीं गरीबों का नुकसान कर रहा है जिनको राहत देना बताया जा रहा है। यह सिर्फ चुनावी मकसद था। -पीपी चौधरी, पूर्व विधि राज्य मंत्री और पाली सांसद

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