भास्कर इंटरव्यू / नुसरत जहां ने कहा- मेरे सिंदूर लगाने और वंदे मातरम् बोलने से सिर्फ 10% लोग परेशान



Bhaskar interview with Trinamool MP Nusrat Jahan
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Bhaskar interview with Trinamool MP Nusrat Jahan

  • सांसद नुसरत रथ यात्रा में जाने और जैन से शादी करने के कारण चर्चा में हैं
  • उन्होंने मॉब लिंचिग और पश्चिम बंगाल के माहौल पर भी खुलकर अपनी बात रखी

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 05:33 AM IST

तृणमूल सांसद और बांग्ला अभिनेत्री नुसरत जहां जैन कहती हैं कि मैं निगेटिव नहीं हूं। ससुराल, मायके, राजनीति और अभिनय की दुनिया में संतुलन बना रहीं नुसरत से भास्कर के शरद पाण्डेय और पवन कुमार ने बातचीत की-

 

सवाल: आप सिंदूर लगाती हैं, वंदे मातरम् बोलती हैं। समावेशी भारत की बात करती हैं। पर समाज का एक तबका इस सब का विरोध भी करता है?
नुसरत: मैं ये सब नहीं सोचती हूं। निगेटिव तो बिल्कुल नहीं सोचती। इस तरह की निगेटिव सोच वाले 10% लोग ही होंगे। 90% अवाम मेरे समर्थन में खड़ी है, अच्छी बातें कर रही है।


सवाल: भारत में धर्म को लेकर लगातार विवाद होता रहता है। आप धर्म को किस तरह देखती हैं?
नुसरत: लोग धर्म मानते हैं, अंदर से मजबूती पाने के लिए। इसीलिए धर्म पर पूरा भराेसा किया जाता है। धर्म और राजनीति दोनों अलग-अलग हैं। इनको एक साथ नहीं रखना चाहिए।

 

सवाल: आपके हिसाब से धर्म की क्या परिभाषा है?
नुसरत: धर्म विश्वास है। जो दिल से आता है, वो धर्म है। और जो दिमाग से आता है, वो धर्म नहीं है।


सवाल: जायरा वसीम के फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने के फैसले को आप कैसे देखती हैं?
नुसरत: इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन मैं राजनीति में दूर होने के लिए नहीं आई हूं। मैं शूटिंग, घर परिवार, सब छोड़कर आई हूं, अपने लोगाें के लिए। ताकि समाज की भलाई के लिए कुछ करूं। मेरे तो वापस लौटने का सवाल ही नहीं उठता है।

 

सवाल: आप फिल्म से राजनीति में आई हैं, क्या इसलिए आपके नजरिए में इस तरह का बदलाव है। एक आम भारतीय आपसे क्या सीख ले सकता है?
नुसरत: मैं यहां सिखाने नहीं खुद सीखने आई हूं। मैं तो  यहां पर अभी नई हूं।

 

सवाल: पिछले दिनों आप इस्कान सोसाइटी के कार्यक्रम में चीफ गेस्ट थीं, यह पहली बार था?
नुसरत: नहीं, मैं हर साल रथ खींचती थी। तब खबर बनती थी कि मैंने धर्म परिवर्तन कर लिया। अब पति के साथ मंगल आरती करती हूं तो कहते हैं कि हिन्दू से शादी की है। मैं इस ओर ध्यान नहीं देती हूं।
अल्पसंख्यकों के साथ हो रही मॉब लिंचिंग से भरोसा डगमगाता है।

 

सवाल: यह कैसे संभव होगा कि अभिनय भी करना, राजनीति भी। नया घर भी बसाया है। 
नुसरत:
कुछ भी असंभव नहीं है। राजनीति मेरी जिम्मेदारी है। इसे हर हाल में पूरा करना होगा, फिल्में मेरा जुनून हैं। वो अपने लिए करती हूं। अपना घर हर इंसान को संभालना पड़ता है, यह दायित्व होता है।जिस चीज की ज्यादा जरूरत होगी, उसे अधिक समय दिया जाएगा। मैं शादी के लिए इस्तांबुल गई थी। मुझे पश्चिम बंगाल में मेरे संसदीय क्षेत्र बसीरहाट की हिंसा की जानकारी मिली तो मैंने विधायकों से फोन पर बात की।


सवाल: जाति, धर्म और भाषा को लेकर बंगाल में जो विवाद चल रहा है। इसका हल आप किस रूप में देखती हैं। 
नुसरत:
बंगाल में लोग जाति-धर्म से ऊपर की सोच रखते हैं। दुर्गा पूजा और ईद साथ मनाते हैं। जिस दिन रामनवमी यात्रा निकलती है, उसी दिन मोहर्रम की ताजिया निकलती हैं। 

 

सवाल: चुनाव के समय दीदी ने नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को गुंडा तक कहा? क्या यह ठीक था या राजनीति में चलता है? 
नुसरत:
बड़े लोग एक दूसरे को कोसते हैं, इस पर मैं ध्यान नहीं देती हूं। मैंने अभी तक इस तरह के आरोप प्रत्यारोप नहीं लगाए हैं। ऐसा आगे भी नहीं करूंगी।


सवाल: आपके हिसाब से मुस्लिम समाज को आख़िर मोदी और भाजपा से क्यों एतराज़ है? 
नुसरत:
 मैंने कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। वे लोकतांत्रिक देश के मुखिया हैं। इसलिए सभी धर्म को बराबर अहमियत देना चाहिए। उन्होंने कहा भी है कि सभी को साथ लेकर चलेंगे। हां, मौजूदा समय में अल्पसंख्यकों पर मॉब लिंचिंग हो रही है, उससे भरोसा डगमगाता है।


सवाल: आपके ख़िलाफ़ फ़तवा जारी हुआ, लेकिन आपने उसका पुरज़ोर मुक़ाबला किया, ऐसे करने की ताक़त कहां से लाती हैं? 
नुसरत: मेरे खिलााफ कोई फतवा जारी नहीं हुआ। वे सोच रहे थे कि जारी करेंगे लेकिन शायद उनकी सोच बदल गई। रही बात ताकत की तो खुद की लड़ाई खुद ही लड़नी पड़ती है। मेरे नाम का मतलब है फतह, और फतह करने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है। मेरा धर्म कोई मुझसे छीन नहीं सकता है। मैं मुस्लिम हूं और अंत तक मुस्लिम ही रहूंगी। अगर मैंने हिन्दू से शादी की है तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। मैं हिन्दू समेत सभी धर्मों का सम्मान करती हूं।

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