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भारत रत्न / भूपेन हजारिका के बेटे ने कहा- अभी न्योता ही नहीं मिला तो सम्मान लौटाने का सवाल ही नहीं



2011 में भूपेन हजारिका का निधन हो गया था। (फाइल) 2011 में भूपेन हजारिका का निधन हो गया था। (फाइल)
केंद्र ने जनवरी में भूपेन हजारिका, प्रणब मुखर्जी और नानाजी देशमुख को भारत रत्न देने का ऐलान किया था। केंद्र ने जनवरी में भूपेन हजारिका, प्रणब मुखर्जी और नानाजी देशमुख को भारत रत्न देने का ऐलान किया था।
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2011 में भूपेन हजारिका का निधन हो गया था। (फाइल)2011 में भूपेन हजारिका का निधन हो गया था। (फाइल)
केंद्र ने जनवरी में भूपेन हजारिका, प्रणब मुखर्जी और नानाजी देशमुख को भारत रत्न देने का ऐलान किया था।केंद्र ने जनवरी में भूपेन हजारिका, प्रणब मुखर्जी और नानाजी देशमुख को भारत रत्न देने का ऐलान किया था।

  • तेज हजारिका ने कहा- जिस तरह से सरकार ने सम्मान देने का फैसला किया, उसे सस्ती लोकप्रियता हासिल का प्रयास ही कहना चाहिए
  • 'मेरे पिता के नाम पर कार्यक्रम किए जा रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कराने की योजना बना रही'

Feb 12, 2019, 10:29 AM IST

गुवाहाटी. असमिया गायक-संगीतकार भूपेन हजारिका के बेटे तेज ने कहा कि अभी तक सरकार की तरफ से न्योता नहीं मिला है तो भारत रत्न लौटाने का सवाल ही उठता। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अमेरिका में रह रहे तेज हजारिका ने असम के एक न्यूज चैनल पर कहा कि राज्य के हालात के मद्देनजर वह पिता को मरणोपरांत दिया जा रहा भारत रत्न नहीं लेंगे।

'नागरिकता संशोधन विधेयक भूपेन की सोच के उलट'

  1. सोमवार को तेज हजारिका ने कहा कि उनके पिता के नाम और शब्दों पर सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर के लोगों की इच्छा के खिलाफ नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित करने की योजना भी बनाई जा रही है। नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जो कुछ हो रहा है, वह भूपेन की सोच के उलट है। जनवरी में केंद्र सरकार ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न (मरणोपरांत) देने की घोषणा की थी। हजारिका का 2011 में निधन हुआ था। 

  2. फेसबुक पोस्ट पर तेज ने लिखा- "कई पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि पिता को दिया जाने वाला भारत रत्न सम्मान स्वीकार करूंगा या नहीं। इस पर मैं दो बातें कहना चाहता हूं। एक- जब मुझे निमंत्रण ही नहीं मिला तो उसे अस्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं है। दूसरा- सरकार ने जिस तरह सम्मान देने का फैसला किया और देशभर में इसे अहमियत मिली। इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया कहा जा सकता है।"

  3. तेज के मुताबिक- "उनके प्रशंसकों में पूर्वोत्तर के लोगों का एक बड़ा हिस्सा है। उन्होंने (भूपेन हजारिका) भारत की महान विविधता को विखंडित करने का प्रयास नहीं किया। सरकार ने जो विधेयक पेश किया है वह भूपेन की इच्छा के खिलाफ है। यह एक तरह से असंवैधानिक और गैर-भारतीय लगता है।" 

  4. भूपेन के बेटे ने कहा कि बिल किसी भी रूप में इस वक्त या भविष्य में दुखद होगा। इससे न केवल लोगों का जीवन, उनकी भाषा, पहचान और क्षेत्र में सत्ता का संतुलन प्रभावित होगा बल्कि इससे मेरे पिता की स्थिति भी कमतर होगी। एक लोकतांत्रिक गणराज्य में सांप्रदायिक सद्भाव और अखंडता को झटका लगेगा।

  5. क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक?

    इस विधेयक के जरिए 1955 के कानून को संशोधित किया जाएगा। इससे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों (हिंदु, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी व इसाई) को भारत की नागरिकता देने में आसानी होगी। मौजूदा कानून के अनुसार इन लोगों को 12 साल बाद भारत की नागरिकता मिल सकती है, लेकिन बिल पास हो जाने के बाद यह समयावधि 6 साल हो जाएगी।

  6. वैध दस्तावेज न होने पर भी 3 देशों के गैर मुस्लिमों को इसका लाभ मिलेगा। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा था कि यह विधेयक केवल असम तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे देश में प्रभावी रहेगा। पश्चिमी सीमा से गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में आने वाले पीड़ित प्रवासियों को इससे राहत मिलेगी।

  7. भाजपा के सहयोगी कर रहे विरोध

    भाजपा की असम में सहयोगी गठबंधन पार्टी असम गण परिषद बिल को स्वदेशी समुदाय के लोगों के सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के खिलाफ बता रही है। असम गण परिषद के अलावा कृषक मुक्ति संग्राम समिति और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) भी इसके विरोध में हैं। इसके अलावा कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने भी इसका विरोध किया है।

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