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जंगलों में आग पर रिसर्च:हिमालय में ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़ी, इससे फिर आपदा का संकट; स्नो लाइन घट रही, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों पर पड़ेगा सीधा असर

देहरादून10 दिन पहलेलेखक: मनमीत
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ऋषि गंगा के दक्षिणी ग्लेशियर में बदलाव - Dainik Bhaskar
ऋषि गंगा के दक्षिणी ग्लेशियर में बदलाव
  • उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग पर वाडिया भू-विज्ञान संस्थान का शोध

उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग उत्तरकाशी, सतपुली, श्रीनगर, मसूरी और नैनीताल के करीब पहुंच गई है। इससे शहरों में अफरातफरी का माहौल है। पौड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के दोनों तरफ आग के विकराल होने से आवाजाही बंद कर दी गई है। इधर, वैज्ञानिकों को डर है कि इस आग से हिमालय की पहले से नासाज सेहत और बिगड़ सकती है। उनके मुताबिक, बीती सर्दियों में औसत से कम हिमपात और अब आग के कारण हो रहे वायु प्रदूषण से ग्लेशियर ब्लैक कार्बन के चपेट में आ रहे हैं। उनके पिघलने की रफ्तार पहले से तेज हो गई है। इससे फिर आपदा आ सकती है।

वाडिया भू-विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, ‘हिमालय के ग्लेशियरों में ब्लैक कार्बन है। इसकी मात्रा सामान्य से ढाई गुना बढ़कर 1899 नैनोग्राम जा पहुंची है।’ दरअसल, ब्लैक कार्बन से तापमान में वृद्धि होती है। यह प्रकाश को अवशोषित करने में अत्यधिक प्रभावी है। इससे आर्कटिक और हिमालय जैसे ग्लेशियर क्षेत्रों में बर्फ पिघलने लगती है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसेक) ने निष्कर्ष निकाला है कि 37 सालों में हिमाच्छादित क्षेत्रफल में 26 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है। इस क्षेत्र में पहले स्थाई स्नो लाइन 5,200 मीटर थी। यह अब 5,700 मीटर तक घट-बढ़ रही है। यही वजह है कि नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के ऋषिगंगा कैचमेंट का कुल 243 वर्ग किमी क्षेत्र बर्फ से ढका था, लेकिन 2020 में यह 217 वर्ग किमी ही रह गया।

ऋषि गंगा के दक्षिणी ग्लेशियर में बदलाव
यूसेक के निदेशक और वरिष्ठ भू-गर्भीय वैज्ञानिक प्रो. डॉ एमपीएस बिष्ट ने बताया कि ऋषि गंगा कैचमेंट एरिया के दक्षिणी ढलान के ग्लेशियर में बदलाव देखा गया है। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के ग्लेशियर यदि इसी तरह से पिघलते रहे तो आने वाले समय में इस क्षेत्र के जीव जंतुओं और वनस्पतियों पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा।

रिहायशी इलाकों में पहुंचने लगी आग

जंगलों में लगी आग अब रिहायशी इलाकों में पहुंचने लगी है। पौडी जिले के धुमाकोट में प्राथमिक विद्यालय का पुराना भवन, फर्नीचर, रिकॉर्ड आग से खाक हो गया। टिहरी जिले में भी आग ने बडा नुकसान हुआ है। इससे 128 हेक्टेयर वन भूमि खाक हो गई है। आग पर काबू पाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और वायुसेना के दो हेलिकॉप्टर सोमवार को पहुंचे। ये टिहरी झील से पानी लेकर आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदेश में कुल 1,300 हेक्टेयर वन भूमि आग की चपेट में है।

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