निधन : गंगा के लिए अनशन करने वाले जीडी अग्रवाल के अंतिम संस्कार को लेकर खींचतान शुरू, ये है वजह / निधन : गंगा के लिए अनशन करने वाले जीडी अग्रवाल के अंतिम संस्कार को लेकर खींचतान शुरू, ये है वजह

DainikBhaskar.com

Oct 12, 2018, 12:00 PM IST

जीडी अग्रवाल के अंतिम संस्कार को लेकर ऋषिकेश के एम्स और मातृसदन के बीच खींचतान शुरू हो गई है।

Body Of Ganga Activist GD Agarwal, Who Died After 111-Day Fast

नेशनल डेस्क, नई दिल्ली. पिछले 112 दिनों से गंगा सफाई की मांग लेकर आमरण अनशन पर बैठे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल का गुरुवार को निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने पर सरकार ने ही उन्हें ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया था। वे 86 साल के थे। निधन के बाद जीडी अग्रवाल के अंतिम संस्कार को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।
- जीडी अग्रवाल के अंतिम संस्कार को लेकर ऋषिकेश के एम्स और मातृसदन के बीच खींचतान शुरू हो गई है। एम्स का कहना है कि प्रो जीडी अग्रवाल अपना शरीर एम्स को दान कर चुके थे, इसलिए उनका शरीर एम्स में ही रहेगा। वहीं मातृसदन उनके शव को आश्रम में रखने की मांग कर रहा है। मातृसदन की मांग है कि तीन दिन के लिए जीडी अग्रवाल के पार्थिव शरीर को आश्रम में रखा जाए, ताकि लोग उनका अंतिम दर्शन कर सकें।

साइंटिस्ट से संन्यासी का सफर : जीडी अग्रवाल आईआईटी कानपुर में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख थे। उन्होंने राष्ट्रीय गंगा बेसिन प्राधिकरण का काम किया। इसके अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले सचिव भी रहे।
- जीडी अग्रवाल ने आईआईटी रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग की। इसके बाद रुड़की यूनिवर्सिटी में ही पर्यावरण इंजीनियरिंग के विजिटिंग प्रोफेसर भी थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत उत्तरप्रदेश के सिंचाई विभाग में डिजाइन इंजीनियर के तौर पर की। बनारस में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के सान्निध्य में संन्यास दीक्षा ग्रहण की। इसके बाद जीडी अग्रवाल से स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद बन गए।

कब की थी पहली बार हड़ताल : गंगा समेत अन्य नदियों की सफाई को लेकर जीडी अग्रवाल ने पहली बार 2008 में हड़ताल की थी। मांगें पूरी कराने के लिए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को अपना जीवन समाप्त करने की धमकी भी दी। वे तब तक डटे रहे, जब तक सरकार नदी के प्रवाह पर जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण को रद्द करने पर सहमत न हुई।
- जुलाई 2010 में तत्कालीन पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री जयराम रमेश ने व्यक्तिगत रूप से उनके साथ बातचीत में सरकार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। साथ ही, गंगा की महत्वपूर्ण सहायक नदी भागीरथी में बांध नहीं बनाने पर सहमति भी जताई।

2014 में मोदी के आने पर अनशन रोका : 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्धता दिखाई थी। इसके बाद जीडी अग्रवाल ने आमरण अनशन खत्म कर दिया था। हालांकि, सरकार बनने के बाद से अब तक ‘नमामि गंगे’ परियोजना का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। ऐसे में अग्रवाल ने 22 जून, 2018 को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृसदन आश्रम में दोबारा अनशन शुरू कर दिया।

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