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डिलीवरी के लिए 1000 रु. मांगे, 700 मिले तब कराया प्रसव, नवजात की मौत पर 600 लौटाए

2 वर्ष पहले
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  • झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल में दो नर्सों की करतूत, मामला खुला तो सस्पेंड
  • परिजनों का कहना है कि नवजात की परेशानी नर्सों को बताई, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया

झुंझुनूं. जिला अस्पताल में शर्मनाक मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा से तड़प रही प्रसूता को संभालने की बजाय पैसे मांगे गए और इसके बाद प्रसव करवाया गया। प्रसूता ने बेटे को जन्म दिया, लेकिन इसके बाद जब नवजात को सांस लेने में दिक्कत हुई तो किसी ने संभाला तक नहीं और उसकी जान चली गई।

 

नर्सों ने ध्यान नहीं दिया

प्रसव पीड़ा से तड़प रही हमीरी कलां निवासी संजय नायक की पत्नी रोशनी को प्रसव के दौरान संभालने की बजाय यहां पहले पैसे मांगे गए और इसके बाद प्रसव करवाया। प्रसूता ने एक बेटे को जन्म दिया, लेकिन जब नवजात को सांस लेने में दिक्कत हुई तो किसी ने संभाला तक नहीं और उसकी जान चली गई। इससे पहले परिजनों ने नवजात की इस तकलीफ को लेकर ड्यूटी पर मौजूद नर्सों को बताया। परिजनों का आरोप है कि इन नर्सों ने कोई ध्यान नहीं दिया तो वे बच्चे को लेकर यहां वहां घूमते रहे। सवेरे अस्पताल में परिजनों ने शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. वीडी बाजिया को दिखाया तो उन्होंने बताया कि काफी देर पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके बाद परिजनों ने प्रदर्शन किया। कलेक्टर ने एसडीएम को अस्पताल भेजा। दो नर्सों को सस्पेंड किया गया है।


करीब नौ दस दिन पहले ही कलेक्टर रवि जैन ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने पीएमओ से इस तरह की शिकायतों को लेकर बातचीत की थी। कलेक्टर ने उन्हें चेताया था कि उनके पास यहां प्रसव के नाम पर पैसे लेने की शिकायतें आ रही हैं। यदि ऐसा वाकई में है तो इसे रोका जाना चाहिए। तब पीएमओ ने इस तरह की किसी भी शिकायत से इंकार किया था। अब दस दिन में ही कलेक्टर की यह बात सच भी साबित हो गई। 

 

लापरवाही 
परिजनों ने आरोप लगाया कि नर्सों ने प्रसव के बाद नवजात को बैड पर लाकर सुला दिया और दूध पिलाने को कहा। इसके बाद नवजात को सांस लेने में तकलीफ हुई। परिजनों का कहना था कि इसके बारे में हमने नर्सों को बताया, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। सुबह करीब सात शिशु रोग चिकित्सक डॉ. वीडी बाजिया से जांच कराई तो उन्होंने नवजात को मृत बताया। 

 

प्रदर्शन 
रोशन का विवाह एक साल पहले हुआ था। सवेरे जब परिजनों को नवजात की मौत का पता चला तो उन्होंने हंगामा शुरु कर दिया। परिजनों का कहना था कि हमारा बच्चा तो चला गया, लेकिन अस्पताल मेें इस तरह रुपए मांगने वालों के खिलाफ एक्शन होना चाहिए। अन्यथा वे बच्चे का शव नहीं उठाएंगे। सूचना कलेक्टर तक पहुंची। उन्होंने एसडीएम अलका विश्नोई को अस्पताल भेजा। उन्होंने पूरी रिपोर्ट बना कर कलेक्टर को सौंपी। 

 

आरोप
रोशनी को प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार को बीडीके अस्पताल लाए। रविवार रात प्रसव पीड़ा होने लगी तो नर्स चंद्रकला और सुलोचना को बताया, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। प्रसूता के मामा प्रदीप ने बताया कि हमें टाला जा रहा था। हमने बातचीत की तो एक हजार रुपए मांगे गए। मैने सात सौ रुपए दिए। इसके बाद रात 11.50 बजे प्रसव करवाया गया। 

 

एक्शन 
रोशनी के परिजन तथा अन्य लोग अटल सेवा केंद्र में कलेक्टर रवि जैन से मिले। एसडीएम विश्नोई ने उन्हें मामले की रिपोर्ट दी। कलेक्टर ने पीएमओ डॉ. शीशराम गोठवाल को तलब किया। डॉ. गोठवाल वहां पहुंचे। कलावती ने उन्हें बताया कि नर्सों को सात सौ रुपए दिए तब डिलीवरी करवाई। बाद में बच्चे की मौत हो गई तो नर्स सुबह 600 रुपए वापस बैड पर छोड़ गई। इस पर कलेक्टर ने दोनों नर्सों जीएनएम चंद्रकला और सुलोचना को सस्पेंड कर दिया। 


 

जांच कराएंगे

मुझे पूरे घटनाक्रम के बारे में सवेरे ही बताया गया। कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर जीएनएम चंद्रकला व सुलोचना को सस्पेंड किया गया है। मामले की जांच कराएंगे। 
- डॉ. शीशराम गोठवाल, पीएमओ


सामान्य प्रसव था

सामान्य प्रसव था, इसलिए हमने ऑन ड्यूटी डॉक्टर को सूचना नहीं दी। हमने पूरी तरह से सुरक्षित प्रसव करवाया और स्वस्थ बच्चा परिजनों को दिया था। रुपये मांगने के आरोप लगाए गए हैं वो गलत हैं। - चंद्रकला, जीएनएम

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