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अरुणाचल प्रदेश:लॉकडाउन में बीआरओ ने 27 दिन में नदी पर ब्रिज बनाया, सेना के 40 टन वजनी वाहन चीन की सीमा तक पहुंच सकेंगे

ईटानगरएक वर्ष पहले
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डेपोरिजो पुल का सैन्य महत्व तो है ही, साथ ही इससे अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जरूरी सामान, राशन और दवाइयां भी भेजी जा सकेंगी। - Dainik Bhaskar
डेपोरिजो पुल का सैन्य महत्व तो है ही, साथ ही इससे अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जरूरी सामान, राशन और दवाइयां भी भेजी जा सकेंगी।
  • बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने 17 मार्च से 14 अप्रैल तक लगातार काम कर सुबनसिरी नदी पर पुल तैयार किया
  • सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पुल का उद्घाटन किया

बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने अरुणाचल प्रदेश की सुबनसिरी नदी पर महज 27 दिन में डेपोरिजो पुल बनाकर तैयार किया है। यह पुल भारत-चीन सीमा पर लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) तक 40 टन वजनी वाहनों को पहुंचाने में खासा मददगार होगा। सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस पुल का उद्घाटन किया।

सुबनसिरी नदी पर बने डेपोरिजो पुल का उद्घाटन सोमवार को हुआ। इसके साथ ही इसे जनता के लिए खोल दिया गया।
सुबनसिरी नदी पर बने डेपोरिजो पुल का उद्घाटन सोमवार को हुआ। इसके साथ ही इसे जनता के लिए खोल दिया गया।

इस पुल की लंबाई 430 फीट है और इसकी क्षमता को देखते हुए सैन्य सामग्री तो एलएसी पर भेजी जा सकती है। साथ ही, नदी के दूसरी ओर राशन, निर्माण सामग्री और दवाइयां आसानी से पहुंच सकेंगी।

पुल पूरी तरह बनकर 14 अप्रैल को तैयार हो गया था। इसके बाद से लगातार पुल का परीक्षण किया जा रहा था।
पुल पूरी तरह बनकर 14 अप्रैल को तैयार हो गया था। इसके बाद से लगातार पुल का परीक्षण किया जा रहा था।

ज्यादातर काम लॉकडाउन के दौरान हुआ

इस पुल का अधिकतर निर्माण देश में कोरोनावायरस के चलते लगाए गए लॉकडाउन के समय में हुआ। जब पूरा देश बंद था, तब बीआरओ के जवान दिन-रात अपने काम में जुटे रहे। इस दौरान संक्रमण से बचने के लिए बीआरओ के जवानों ने जरूरी नियमों का भी पालन किया। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को पुल के जनता के लिए खोले जाने की जानकारी दी।

पुराने पुल में दरारें आने के बाद नया पुल बना
पुराने पुल में दरारें आने के बाद, बीआरओ ने राज्य सरकार के साथ मिलकर नए पुल को तैयार किया। बीआरओ के जवानों से 17 मार्च से पुल बनाने का काम शुरू किया था और 14 अप्रैल को काम पूरा कर लिया था। हालांकि कोरोना के कारण इसके समय रहते पूरा होने में संदेह था, लेकिन जवानों की मेहनत ने हर चुनौती को पार किया। 

पुराने पुल से बस गिरी थी, कोई नहीं बचा था

नया पुल बनने के बाद लगातार इसका परीक्षण किया जा रहा था। पुराने पुल पर कई साल पहले एक दुर्घटना भी हो चुकी है। 26 जुलाई 1992 को इससे एक बस नदी में गिर गई थी। उस दुर्घटना में कोई यात्री जीवित नहीं बचा था।

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