सियासत / उत्तरप्रदेश में बार-बार परचम फहराया, लेकिन राजस्थान में नहीं चली मायावती की ‘माया’



BSP supremo Mayawati's politics did not work in Rajasthan
X
BSP supremo Mayawati's politics did not work in Rajasthan

  • राजस्थान ही नहीं उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्याें में भी बसपा पर टिकट बेचने के आरोप खुलकर लगे
  • प्रदेश में बसपा से गैर दलित ही विधानसभा पहुंचे, इनका पार्टी के परंपरागत वोटबैंक से सीधा जुड़ाव भी नहीं रहा
  • इसलिए जब भी बसपा विधायकाें काे सत्ता पक्ष के साथ जाने का माैका मिला, इन्हाेंने पार्टी छोड़ दी

Dainik Bhaskar

Sep 18, 2019, 12:36 AM IST

जयपुर (सौरभ भट्‌ट). देश की सियासत के केंद्र उत्तर प्रदेश में अपनी ताकत का परचम बार-बार फहराने वाली बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती की राजस्थान में सियासी उड़ान एक बार फिर धराशायी हो गई।

 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर बसपा के सभी 6 विधायकों का पार्टी में विलय करवा लिया जैसा उन्होंने अपनी पिछली सरकार में 2009 में किया था। तब भी प्रदेश में गहलोत की सरकार अल्पमत में थी और सियासी रूप से खुद को मजबूत करने के लिए गहलोत ने अपनी पार्टी का बाहर से समर्थन दे रही बसपा के विधायक तोड़ कर कांग्रेस में मिला लिए थे। अब राजस्थान की विधानसभा में मायावती का कोई नाम लेना वाला नहीं बचा।

 

वोट पक्का, विधायक नहीं
इस विलय से यह साफ हो गया है कि राजस्थान में बसपा सुप्रीमो मायावती का वोट बैंक भले ही पक्का है लेकिन यह कमिटमेंट वह अपने विधायकों में नहीं ला पाईं। इसके पीछे दो बड़ी वजह है। पहली बड़ी कमिटमेंट और भरोसे की कमी और दूसरा बसपा के टिकट पर बार-बार गैर दलितों का ही चुना जाना।

 

हर बार टिकट बेचने के आरोप
राजस्थान ही नहीं उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्याें में भी बसपा पर टिकट बेचने के आरोप खुलकर लगे। विधानसभा सत्र में विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने बसपा पर पैसे लेकर टिकट बेचने का आरोप लगाया। उन्होंने पार्टी प्रभारी धर्मवीर अशोक के लिए कहा कि जो उन्हें ज्यादा पैसे देता है वे उसे ही टिकट बेच देते हैं। 2009 में भी धर्मवीर अशोक राजस्थान बसपा के प्रभारी थे और तब भी उन पर टिकट बेचने के आरोप लगे थे। तब धर्मवीर अशोक को पद से हटा दिया था। लेकिन 2016 में फिर से प्रभारी बना दिया गया। प्रदेश में बसपा ने जितनी बार भी विधानसभा चुनाव लड़ा हर बार उसके टिकट पर गैर दलित ही जीत कर विधानसभा पहुंचे। इसलिए परंपरागत रूप से इनका बसपा वाेट बैंक से सीधा जुड़ाव कभी नहीं रहा। इसलिए जब भी बसपा विधायकाें काे सत्ता पक्ष के साथ जाने का माैका मिला इन्हाेंने हाथ से नहीं जाने दिया।

 

2008 में 18,32,195 वाेट और 6 सीटें जीतीं 
2008 में बसपा को प्रदेश में कुल 18,32,195 लाख वोट मिले। बसपा ने 6 सीटें निकालीं और 8 फीसदी वोट हासिल करते हुए 18 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। जो छह विधायक जीत कर विधानसभा पहुंचे उनमें रामकेश मीणा (गंगापुर), मुरारी लाल मीणा (दौसा), रमेश मीणा (सरोपटरा), गिर्राज सिंह (बाड़ी) राजकुमार शर्मा (नवलगढ़) और राजेंद्र गुढ़ा (उदयपुरवाटी) से जीते। कांग्रेस में शामिल होने के बाद सभी को मंत्री पद मिला।

 

2019 में 14,35,858 वोट और 6 सीटें 
2019 में बसपा को 1435858 वोट मिले और बसपा ने 6 सीटें जीतीं। राजेन्द्र गुढा (विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली (विधायक, नगर), लाखन सिंह मीणा (विधायक, करोली), संदीप यादव (विधायक, तिजारा) और बसपा विधायक दीपचंद खेरिया (विधायक, किशनगढ़बास) से जीते।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना