कैट का अनुमान / दीपोत्सव पर 37 टन सोने के सिक्के और जेवर खरीदेंगे हम, 5-6 लाख करोड़ का कारोबार होगा



Business will increase on Diwali
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Business will increase on Diwali

  • त्योहारी सीजन में इसी सप्ताह पुष्य नक्षत्र व धनतेरस होने के कारण कारोबार बढ़ेगा
  • इस बार दिवाली पर कहां और कितना पैसा खर्च कर रहे हैं हम, पढ़िए भास्कर की रिपोर्ट

Dainik Bhaskar

Oct 20, 2019, 08:36 AM IST

नई दिल्ली (धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया). इस सप्ताह 21-22 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र और दीपावली शुरू होने के कारण खरीददारी अपने चरम पर होगी। दीपावली के पर्व पर ज्वैलरी, कपड़े, लाइटिंग, मिठाई, पटाखा, रियल एस्टेट, गिफ्ट, बर्तन, ऑटो आदि सभी सेक्टर्स में डिमांड बढ़ने की शुरूआत हो चुकी है।

 

कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं कि देश में हर वर्ष करीब 45 लाख करोड़ रुपए का कारोबार होता है। दशहरे से दीपावली तक (दिवाली सीजन) के 20 दिन में पांच से छह लाख करोड़ रुपए का कारोबार हो जाने का अनुमान है। वे कहते हैं कि अभी तक पिछले वर्ष की तुलना में कारोबार कम हुआ है, लेकिन आज से दीपावली की खरीदारी तेजी से बढ़ेगी। हम बेहतर कारोबार के लिए आशान्वित हैं।


वहींं देश के सबसे बड़े गोल्ड एक्सपोर्टर राजेश मेहता के अनुसार दीपावली के दौरान कम से कम 37 टन सोने के सिक्के और जेवर बिकने का अनुमान है। क्रेडाई के नेशनल चेयरमैन जक्षय शाह ने बताया कि अक्षय तृतीया और दीपावली एक साथ होने से मकानों की इंक्वायरी बीते वर्ष की तुलना में दोगुनी हो गई है। बीते वर्ष से 25-30 फीसदी अधिक सौदे होने की उम्मीद है। बड़े शहरों में एक से 1.5 करोड़ रुपए तक के फ्लैट-मकान जबकि छोटे शहरों में 30 से 60 लाख रुपए के फ्लैट-मकान की डिमांड सर्वाधिक है। वहीं ट्विटर इंडिया ने भास्कर को बताया कि पिछले वर्ष से ही सबसे अधिक खरीददारी फैशन और गैजेट कैटेगरी में हो रही है। हर चार में से एक ग्राहक बड़ी खरीदारी कर रहा है। वर्तमान में शॉपिंग करने वालों में सर्वाधिक 52 फीसदी लोग कपड़े, बैग और जूते खरीद रहे हैं।

 

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सोना: 14 हजार करोड़ रु. के गहने-सिक्के बिक सकते हैं
दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड ज्वैलर्स राजेश एक्सपोर्ट्स के एमडी राजेश मेहता बताते हैं कि सोने के रेट बढ़ने के बावजूद देश में दीपावली के दौरान करीब सात से नौ टन सोने के सिक्के और 30 टन ज्वैलरी बिकने का अनुमान है। यानी करीब 14 से 15 हजार करोड़ का बिजनेस होगा। वहीं वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एमडी सोमसुंदरम पीआर ने कहा कि ज्वैलरी के मुकाबले वर्तमान में लोग सोने के सिक्के खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि कन्वर्जन चार्ज कम है। साेमसुंदरम के अनुसार सोने के सिक्कों की सर्वाधिक बिक्री पुष्य नक्षत्र और धनतेरस पर होती है। कम वजन वाली ज्वैलरी जैसे अंगूठी, कान के गहने, मंगलसूत्र आदि की मांग सबसे ज्यादा है।

 

कपड़ा: 30 से 40 फीसदी ब्रांडेड कपड़ों की बिक्री
क्लॉथिंग मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राहुल मेहता ने बताया कि दीपावली का बोनस मिलने और त्योहार करीब आने से अब खरीदारी तेज हो जाएगी। मेहता कहते हैं कि कुल कपड़ों की बिक्री में 90 फीसदी हिस्सेदारी रेडीमेड की होती है। जिनमें 30-40 फीसदी बिक्री ब्रांडेड की जबकि बाकी लेबल्ड कपड़ों की रहती है। मेहता के मुताबिक देश में करीब 6 से 6.5 लाख करोड़ रुपए का कपड़े का मार्केट है। ऑनलाइन में भारी डिस्काउंट के बावजूद दीपावली के माैके पर 12 से 14 फीसदी बिक्री हो सकती है। यानी करीब 70 हजार करोड़ रुपए से अधिक की बिक्री होगी। दीपावली पर पारंपरिक परिधानों की डिमांड बढ़ जाती है।

 

रोशनी: 10-15% बढ़ी भारतीय लाइटिंग की हिस्सेदारी
देश के सबसे बड़े रोशनी के मार्केट भागीरथ पैलेस बाजार में देशभर से लाइटिंग के ऑर्डर भेजे जा रहे हैं। दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत अहूजा ने बताया कि दीपावली पर लाइटिंग सामान जैसे लड़ी-झालर, दीये, बल्ब, एलईडी और भगवान की रोशनी वाली मूर्तियों की मांग है। इस बार पूरी तरह से चीन के आयात पर टिके इस बाजार में भारतीय लाइटिंग की हिस्सेदारी 10 से 15 फीसदी बढ़ी है। कारोबारी प्रवीण कुमार राणा कहते हैं कि 35 मीटर की एक झालर की कीमत 200 से 220 रु., 25 मीटर वाली एलईडी झालर की कीमत 600 से 900 रुपए है। लाइटिंग वाली मूर्तियां 300 रुपए से लेकर 600 रुपए तक बिक रही हैं। देश में रोशनी का बाजार करीब चार से पांच हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

 

मिठाई: 20 से 30 फीसदी की बिक्री त्यौहारी मौके पर
बीकानो ब्रांड की कंपनी बीकानेरवाला फूड्स के एमडी श्याम सुंदर अग्रवाल के मुताबिक काजू बर्फी, बेसन बर्फी, गुलाब जामुन, रसगुल्ला, लड्‌डू आदि की डिमांड ज्यादा है। इंडस्ट्री चैंबर एसोचैम के मुताबिक वर्ष 2017 तक देश में मिठाई का बाजार 65 हजार करोड़ रुपए से अधिक का था। यह 10 से 12 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। अग्रवाल कहते हैं कि मिठाई कारोबार में 75 से 80% से अधिक हिस्सेदारी असंगठित क्षेत्र की है। 20 से 30% बिक्री दीपावली पर होती है। वहीं एक अनुमान के मुताबिक देश में 13 हजार करोड़ रुपए का चॉकलेट का कारोबार है।

 

पटाखे: कम आवाज वाले व ग्रीन पटाखों की मांग बढ़ी
ऑल इंडिया फायरवर्क्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और देश के पटाखा केंद्र शिवाकाशी के कारोबारी तमिल सेलवन कहते हैं सरकार और कोर्ट की सख्ती के कारण कम आवाज वाले और ग्रीन पटाखों की मांग बढ़ गई है। लेकिन मांग की तुलना में यह कम बनाए जा रहे हैं। दीपावली के लिए यहां पटाखे जनवरी से ही बनना शुरू हो जाते हैं। सेलवन कहते हैं कि हमारी 70% बिक्री दशहरा-दीपवाली पर हो जाती है। अकेले शिवाकाशी में ही करीब 1070 रजिस्टर्ड कंपनियां हैं। शिवाकाशी से ही करीब छह हजार करोड़ रुपए का कारोबार इस बार होने की उम्मीद है।

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