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सरकार मनाती रही, किसान रूठे रहे:किसानों ने पोस्टर दिखाकर मौन साधा, सरकार से कहा- हम सालभर भी आंदोलन चला लेंगे

नई दिल्ली4 महीने पहले
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सरकार और किसानों के बीच पांचवें दौर की बैठक भी बेनतीजा रही। दिल्ली में शनिवार को हुई बैठक में किसानों ने 5 तरह से तल्खी दिखाई। कभी वे मुंह पर उंगली रखकर मौन साधकर बैठ गए तो कभी कड़े शब्दों में सरकार को अल्टीमेटम दिया। पढ़ें, विज्ञान भवन में हुई इस बैठक में किसानों की तल्खी का तरीका क्या रहा...

1. मौन व्रत
सरकार और किसानों के बीच बैठक को चार घंटे गुजर चुके थे। कोई हल निकलता नहीं दिख रहा था। इसके बाद किसानों ने मौन व्रत अपना लिया। सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और सोमप्रकाश अपनी बात रखते रहे, लेकिन किसान मुंह पर उंगली रखकर बैठ गए। वे सरकार से अपनी मांगों पर हां या ना में यह जवाब चाहते थे कि सरकार कृषि कानूनों को खत्म करेगी या नहीं? कुछ किसानों ने मुंह पर उंगली रखकर हां या ना लिखा पोस्टर भी आगे कर दिया।

2. फिर अपना खाना साथ लाए
मीटिंग के दौरान दोपहर करीब 4 बजे लंच ब्रेक हुआ। गुरुवार को हुई पिछली बैठक की तरह इस बैठक में भी किसानों ने सरकारी खाना नहीं खाया। किसान नेताओं के लिए कार सेवा के जरिए खाना लाया गया, जिसे उन्होंने जमीन पर बैठकर खाया। वे पानी और चाय तक अपने साथ लाए थे।

3. वॉकआउट का अल्टीमेटम
बैठक के दौरान एक बार स्थिति इतनी तल्ख हो गई कि किसानों ने सरकार से यह तक कह दिया कि या तो आप हमारी मांगों पर फैसला करें, नहीं तो हम मीटिंग छोड़कर जा रहे हैं।

4. हमारे पास सालभर आंदोलन के इंतजाम
बैठक के दौरान किसानों ने सरकार से यह भी कहा कि हम पिछले कई दिनों से सड़कों पर हैं। हमारे पास एक साल की व्यवस्था है। अगर सरकार यही चाहती है तो हमें कोई दिक्कत नहीं। हम हिंसा का रास्ता भी नहीं अपनाएंगे। इंटेलीजेंस ब्यूरो आपको बता देगी कि हम धरनास्थल पर क्या कर रहे हैं।

लंच ब्रेक के दौरान किसानों ने प्रदर्शन स्थल से अपना खाना मंगवाया।
लंच ब्रेक के दौरान किसानों ने प्रदर्शन स्थल से अपना खाना मंगवाया।

5. हमें कॉर्पोरेट फार्मिंग नहीं चाहिए, कानून रद्द करें
किसानों ने सरकार से कहा कि हम कॉरपोरेट फार्मिंग नहीं चाहते। इस कानून से सरकार को फायदा होगा, किसानों को नहीं। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि कानून मंडी व्यवस्था और मिनिमम सपोर्ट प्राइस को खत्म करने के लिए है। इससे कॉर्पोरेट्स को फायदा होगा। कानून रद्द करने से कम हमें कुछ भी मंजूर नहीं है।

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