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कैग की रिपोर्ट / रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास 95% रियल एस्टेट कंपनियों के पैन की जानकारी नहीं

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 10:37 AM IST


प्रतीकात्मक तस्वीर। प्रतीकात्मक तस्वीर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।प्रतीकात्मक तस्वीर।
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  • 54578 रियल एस्टेट कंपनियों में से 51670 का पैन उपलब्ध नहीं
  • 840 कंपनियों में से 159 आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं
  • 2013-14 से 2016-17 तक के असेसमेंट का ऑडिट किया गया
     

नई दिल्ली. रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के पास 95% रियल एस्टेट कंपनियों के पैन की जानकारी नहीं है। कॉम्प्ट्रॉलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। मंगलवार को संसद में कैग रिपोर्ट पेश की गई।

19% कंपनियों ने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया

  1. कैग का कहना है कि सिर्फ 12 राज्यों की रियल एस्टेट कंपनियों के बारे में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से जानकारी मिल पाई। ऑडिट के लिए उपलब्ध कुल 54,578 कंपनियों में से 51,670 (95%) के पैन की जानकारी आरओसी से नहीं मिल सकी।

  2. ऑडिटर के मुताबिक आरओसी से मिली जानकारी के आधार पर यह ऑडिट करना मुश्किल था कि रिएल एस्टेट कंपनियां रिटर्न दाखिल कर रही हैं या नहीं। 840 कंपनियों में से 159 (19%) ऐसी पाई गईं जो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं।

  3. कैग का कहना है कि आयकर विभाग के पास ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी रजिस्टर्ड कंपनियों के पैन की जानकारी उपलब्ध हो और वो नियमित रिटर्न फाइल करें।

  4. आरओसी, आयकर विभाग में को-ऑर्डिनेशन जरूरी: कैग

    कैग ने अनुशंसा की है कि आरओसी के पास जब किसी कंपनी का रजिस्ट्रेशन हो तभी उसके पैन की अर्जी आयकर विभाग के पास स्वत: दाखिल हो जानी चाहिए। इसी तरह जब नई कंपनी का पैन जारी हो जाए तो वह स्वत: ही आरओसी के पास अपडेशन के लिए पहुंच जाए। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) और कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं।

  5. कैग ने यह अनुशंसा भी की है कि एनुअल रिपोर्ट दाखिल करते वक्त कंपनियों के लिए आईटीआर की कॉपी जमा करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे सुनिश्चित होगा कि कंपनियां समय पर रिटर्न फाइल करें।

  6. कैग की रिपोर्ट के मुताबिक आयकर विभाग ने 2013-14 से 2016-17 तक रियल एस्टेट सेक्टर की 78,647 कंपनियों का असेसमेंट किया। इनमें से 17,155 का असेसमेंट रिकॉर्ड कैग ने जांचा। उसने 1,183 मामलों में गलतियां पाईं।

  7. आयकर विभाग की गलतियों से 6094 करोड़ का नुकसान

    आयकर विभाग की गलतियों की वजह से सरकार को 6,093.71 करोड़ रुपए के टैक्स का नुकसान हुआ। कैग का कहना है कि आयकर विभाग को ऐसी गलतियां पता लगाकर उन्हें सुधारने की जरूरत है।

  8. कैग के मुताबिक आयकर विभाग के पास यह सुनिश्चित करने का पुख्ता सिस्टम भी नहीं है कि हाई वैल्यू वाली प्रॉपर्टी के विक्रेता रिटर्न में जानकारी दें। विभाग टैक्स वसूली का दायरा बढ़ाने के लिए थर्ड पार्टी डेटा का भी सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर रहा था।

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