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पश्चिम बंगाल में धर्म परिवर्तन का मामला:हाईकोर्ट ने 56 दिनों में 7 केस CBI को सौंपे, इनमे गैंगरेप से लेकर धर्मांतरण के मामले शामिल

एक महीने पहले
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने 56 दिन के भीतर 7 केस CBI और NIA को सौंप दिए हैं। पश्चिम बंगाल के मालदा की 2 महिलाओं ने हाईकोर्ट में धर्म परिवर्तन के मामले में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कुछ लोगों पर पतियों को अपहरण कर जबरन इस्लाम धर्म कबूल करवाने का आरोप लगाया था। इस मामले की सुनवाई में आज हाई कोर्ट ने सीबीआई और एनआईए को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?
कलकत्ता हाईकोर्ट में दो महिलाओं की तरफ से दायर याचिका के मुताबिक, पिछले 24 नवंबर से उनके पति लापता थे। जब महिलाएं थाने में शिकायत दर्ज कराने गईं, तो उनके शिकायत पत्र को फाड़ दिया गया। एक व्यक्ति ने शिकायत पत्र फाड़ते हुए बोला कि उनके पतियों ने इस्लाम धर्म अपना लिया है।

पीड़िताओं का आरोप है कि जब उन्होंने जिले के एसपी ऑफिस में शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एक पार्टी के लिए काम करते थे दोनों भाई
याचिका दायर करने वाली महिलाओं ने कहा कि उनके पतियों ने विधानसभा चुनाव में एक राजनैतिक पार्टी के लिए काम किया था, जो चुनाव हार गई थी। जबी उनके पति लापता हुए तो 24 नवंबर 2021 को उन्होंने कालियाचक और मोथाबारी पुलिस थानों में भी शिकायत दर्ज कराई थी।

मालदा के कालियाचक में हुए धर्म परिवर्तन के विरोध में महिलाएं और बच्चों ने विरोध प्रदर्शन किया है।
मालदा के कालियाचक में हुए धर्म परिवर्तन के विरोध में महिलाएं और बच्चों ने विरोध प्रदर्शन किया है।

सरकारी वकील ने कहा- दोनों ने अपनी इच्छा से अपनाया इस्लाम
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य की तरफ से केस लड़ रहे वकील मोहम्मद गालिब ने कहा कि पारिवारिक विवादों के कारण दोनों महिलाओं के पति उन्हें छोड़कर चले गए थे। मालदा से जाकर प्रतापपुर में रहने लगे हैं। दोनों ने अपने घर वापस आने से मना कर दिया है। उन्होंने धारा 164 के तहत गवाही देकर अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपना लिया है।

सीबीआई और एनआईए को जांच सौंपी गई
इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा ने मामले की जांच सीबीआई और एनआईए को सौंप दी है। हाई कोर्ट ने सीबीआई और एनआईए को जबरन धर्म परिवर्तन के साथ-साथ हथियार जमा करने, सीमा पार से घुसपैठ करने और जाली नोट के आरोपों की जांच करने का भी आदेश दिया है।
इसके साथ ही कोर्ट ने जिले के एसपी को मामले में सीबीआई और एनआईए को सहयोग देने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने 56 दिनों में 7 मामलों की जांच सीबीआई के हवाले की

1. धर्म परिवर्तन का मामला
मालदा जिले की दो हिंदू महिलाओं की ओर से दायर याचिका की जांच हाईकोर्ट ने सीबीआई के हवाले कर दी है। महिलाओं ने आरोप लगाया था कि उनके पतियों को अपहरण कर जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवा दिया गया है। उन्होंने बताया कि उनके पतियों को डराकर इस्लाम धर्म में परिवर्तित कर दिया गया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई और एनआईए को मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं।

2. शिक्षक भर्ती का मामला
राज्य में शिक्षक भर्ती मामले में शिक्षा राज्य मंत्री परेश चंद्र अधिकारी की बेटी अंकिता अधिकारी की नियुक्ति मामले को भी हाईकोर्ट ने सीबीआई और एनआईए को जांच के आदेश दिए थे। आरोप था कि भर्ती परीक्षा में मंत्री की बेटी की तुलना में अधिक नंबर पाने वाले को नौकरी नहीं दी गई। इस मामले में अब कलकत्ता हाईकोर्ट ने शिक्षा मंत्री की बेटी अंकिता अधिकारी की बहाली रद्द कर दी है और वेतन लौटने के लिए भी कहा है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शिक्षा मंत्री की बेटी अंकिता अधिकारी की बहाली रद्द कर दी है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शिक्षा मंत्री की बेटी अंकिता अधिकारी की बहाली रद्द कर दी है।

3. बीरभूम हिंसा
बीरभूम के बागटुई गांव में 23 मार्च की दरम्यानी रात हिंसा में 8 लोगों की मौत हो गई थी। इस हिंसा में TMC के ब्लॉक प्रमुख का नाम आया। 4 अप्रैल को हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई के बाद CBI को जांच का जिम्मा दे दिया। हाईकोर्ट के फैसले का ममता बनर्जी ने दबी जुबान से स्वागत किया, लेकिन अगले ही दिन आरोप लगाया कि CBI के जरिए भाजपा हमारे जिलाध्यक्ष अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार कराना चाहती है।

4. भादू शेख हत्याकांड
बीरभूम के बागटुई में TMC नेता भादू शेख की हत्या के बाद हिंसा भड़की थी। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच का जिम्मा भी CBI को दे दिया। बीरभूम और भादू शेख हत्याकांड मामले में CBI ने अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

शेख की मौत का बदला लेने के लिए ही बीरभूम के बोगुटुई में 9 लोगों को जिंदा जला दिया गया था।
शेख की मौत का बदला लेने के लिए ही बीरभूम के बोगुटुई में 9 लोगों को जिंदा जला दिया गया था।

5. कांग्रेस पार्षद की हत्या
हाईकोर्ट ने पुरुलिया के झालदा में कांग्रेस पार्षद तपन कांदू हत्या मामले में भी बंगाल पुलिस से जांच छीनकर CBI को सौंप दिया। कांदू की पत्नी ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि इस मामले में TMC नेताओं का हाथ है। ऐसे में जांच पुलिस से ले ली जाए।

तपन कांदू की पत्नी ने आरोप लगाया कि कांदू की हत्या TMC के नेताओं ने की और पुलिस उसे जांच में बचा रही है।
तपन कांदू की पत्नी ने आरोप लगाया कि कांदू की हत्या TMC के नेताओं ने की और पुलिस उसे जांच में बचा रही है।

6. झालदा केस में गवाह की हत्या
कलकत्ता हाईकोर्ट ने झालदा में कांग्रेस पार्षद हत्या के गवाह निरंजन वैष्णव मर्डर केस की जांच भी CBI को दे दी। दरअसल, कांदू हत्याकांड के चश्मदीद निरंजन का लटका हुआ शव मिला था। पुलिस ने इसे सुसाइड माना था।
7. नदिया गैंगरेप केस
एक मामला नदिया जिले के हांसखली का था। यहां TMC नेताओं पर आरोप है कि एक नाबालिग के साथ तीन दिन तक गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच CBI को सौंपी थी। ममता बनर्जी भी इस घटना पर सवाल उठा चुकी हैं।