जल संरक्षण / सीबीएसई ने लागू की जल प्रबंधन नीति, स्कूलों को पानी बचाने के लिए लगाने हाेंगे सेंसर वाले नल

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  • इसे तीन साल में अमल में लाना होगा, पानी को लेकर स्कूलों का नियमित ऑडिट भी होगा
  • इसके तहत संबद्ध स्कूलों को अपने यहां पानी बचाने वाले मॉडल और नए उपकरण लगाने होंगे

दैनिक भास्कर

Oct 17, 2019, 11:03 AM IST

नई दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पानी बचाने, उपलब्धता तय करने के लिए अपने स्कूलों में जल प्रबंधन नीति लागू कर दी है। इसे तीन साल में अमल में लाना होगा। पानी को लेकर स्कूलों का नियमित ऑडिट भी होगा। जल नीति के तहत सीबीएसई ने गाइडलाइन बनाई है।

 

इसके तहत संबद्ध स्कूलों को अपने यहां पानी बचाने वाले मॉडल और नए उपकरण लगाने होंगे, सेंसर वाले स्वचालित नल, पानी के रिसाव रोकने के लिए पाइप लाइनों और नलों की नियमित जांच करनी होगी। सीबीएसई ने यह कदम नीति आयोग की एक रिपोर्ट के बाद उठाया है। उस रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली, बेंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद समेत 21 शहरों में 2020 तक भू-जल खत्म हो जाएगा, जिसका 10 करोड़ लोगों पर सीधा असर पड़ेगा।

 

जल प्रबंधन समिति भी बनानी होगी

एक अधिकारी ने बताया कि सीबीएसई अपने स्कूलों से कहेगा कि वह जल प्रबंधन समिति गठित करे। इसमें प्रशासक, शिक्षकों, छात्रों, गैर शिक्षण कर्मचारियों, अभिभावकों और अलग-अलग समुदायों के सदस्यों को शामिल करें। यह समिति जल संरक्षण के मानकों पर निश्चित अवधि में पानी की उपयोगिता की निगरानी कर समीक्षा करेगी। स्कूलों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाना, पौधरोपण और कम पानी वाले पौधों को बढ़ावा दिया जाए। बच्चों को पानी के सही उपयोग की अलख जगाने के लिए स्कूलों में शिक्षा दी जाए।

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