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कोरोना के लक्षणों में बदलाव:अमेरिका के शीर्ष स्वास्थ्य संस्थान ने वायरस के नए लक्षण बताए, संक्रमितों को अब मांसपेशियों में दर्द और कंपकंपी भी हो रही

दिल्लीएक वर्ष पहले
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तस्वीर मैसाच्युसेट्स की है। यहां एक मेडिकल सेंटर में हेल्थकेयर्स वर्कर्स के लिए खाना बांटा जा रहा है। इस समय कोरोना से अमेरिका की हालत ज्यादा खराब है। यहां 50 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। - Dainik Bhaskar
तस्वीर मैसाच्युसेट्स की है। यहां एक मेडिकल सेंटर में हेल्थकेयर्स वर्कर्स के लिए खाना बांटा जा रहा है। इस समय कोरोना से अमेरिका की हालत ज्यादा खराब है। यहां 50 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।
  • सीडीसी ने अपनी वेबसाइट में कोरोना के जो लक्षण बताए हैं, उसमें गले में सूजन, मांसपेशियों में दर्द और स्वाद और गंध महसूस न होना शामिल
  • सीडीसी का कहना है- नए लक्षणों को समझने के लिए ज्यादा जांच करने की जरूरत, इससे वायरस की प्रकृति समझने में मदद मिलेगी

कोरोनावायरस से 2 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अब वायरस के लक्षणों में भी लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अमेरिका के शीर्ष स्वास्थ्य संस्थान सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी सीडीसी को कोरोना के नए लक्षणों के बारे में पता चला है। सीडीसी ने अपनी वेबसाइट पर इसकी जानकारी दी है। सीडीसी के मुताबिक, कोरोना संक्रमितों में जो नए लक्षण नजर आ रहे हैं। इसमें कंपकंपी, ठिठुरन के साथ बार-बार झटके लगना, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, स्वाद और सूंघने की क्षमता में कमी शामिल हैं।

ये लक्षण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वेबसाइट पर दिए गए लक्षणों से अलग है। डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर कोविड-19 के जो लक्षण बताए गए हैं, उनमें बुखार, सूखी खांसी, शरीर में दर्द, नाक बंद होना, गले में दर्द और डायरिया शामिल हैं। हालांकि, सीडीसी का यह भी कहना है कि हमने कोरोना के जो लक्षण बताए हैं, वे अंतिम नहीं है। किसी भी मरीज को गंभीर लक्षण नजर आने की सूरत में डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए। 

लक्षणों को समझने के लिए ज्यादा जांच की जरूरत
एक रिसर्च के मुताबिक, कोरोना के मरीजों में इसके हल्के और गंभीर दोनों तरह के लक्षण देखे जा रहे हैं। कई बार 2 से 14 दिन बाद लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मरीजों में ऐसा भी देखा गया है कि लक्षण दिखने से पहले ही संक्रमण बुरी तरह से फैल चुका होता है। सीडीसी का कहना है कि लक्षणों को समझने के लिए ज्यादा से ज्यादा जांच करने की जरूरत है।
होंठ का रंग बदले तो डॉक्टरी सलाह लें
सीडीसी की सलाह है कि सांस लेने में तकलीफ होने, होठ का रंग नीला पड़ने पर भी डॉक्टरी सलाह लें। डब्ल्यूएचओ और सीडीसी ने लोगों से अनुरोध किया है बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में तकलीफ को नजरअंदाज न करें।

80% लोग तो बिना अस्पताल गए ठीक हुए : डब्ल्यूएचओ
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, इस वायरस से संक्रमित 80% लोग तो बिना अस्पताल गए ही ठीक हो गए हैं। हालांकि, इससे संक्रमित हर पांच में से एक व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो रहा है। खासतौर पर उसे सांस लेने में तकलीफ होती है। डब्लूएचओ का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर, हृदय और फेफड़ों की बीमारियों, डायबिटीज या कैंसर से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए ज्यादा घातक है।

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