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बच्चों को मिलेगी कुपोषण से मुक्ति:केंद्र ने कर्नाटक सरकार को मिड-डे-मील में अंडा रखने की दी मंजूरी, साधू संतों ने किया था विरोध

एक महीने पहले
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कर्नाटक के सात जिलों में अगले शैक्षणिक साल में मिड-डे-मील मेनू में अंडे रखने के फैसले पर केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। बच्चों को कुपोषण मुक्त करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसको किया है। इसका लाभ रायचूर, यादगीर, बीदर, कलबुर्गी, कोप्पल, बेल्लारी, विजयपुरा के बच्चों को मिलेगा। राज्य के कई साधु संतों ने दोपहर के खाने में अंडे देने का विरोध किया था। मिड-डे-मील योजना के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में निर्णय लिया गया। इस योजना का 16.06 लाख बच्चों को लाभ मिलेगा जिस पर 44.94 करोड़ खर्च आएगा। बता दें 2021 में मिड-डे-मील का नाम बदलकर पीएम पोषण योजना कर दिया गया था।

46 दिनों के लिए योजना को मिली मंजूरी
पीएबी-पीएम पोषण की लंबी चर्चा के बाद 7 जिलों में 46 दिनों के लिए 16.06 लाख बच्चों को दोपहर के खाने में एक अंडा देने की मंजूरी दी गई। इसके लिए 7 जिलों में अनुमानित खर्च 44.94 करोड़ है, जिसमें केंद्रीय हिस्से के रूप में 26.96 करोड़ रुपये और राज्य के हिस्से के रूप में 17.98 करोड़ रुपये शामिल हैं।

कर्नाटक में मिड डे मील में 16 लाख बच्चों पर आएगा 44 करोड़ का खर्च।
कर्नाटक में मिड डे मील में 16 लाख बच्चों पर आएगा 44 करोड़ का खर्च।

संतों ने विरोध में दायर की थी याचिका
इस योजना का पालन करना पिछले साल की तरह महत्वपूर्ण होगा। इसके पहले राज्य ने इन जिलों के बच्चों को जब दोपहर के खाने में अंडा देने की योजना शुरू की थी तो लिंगायत धर्म महासभा, राष्ट्रीय बसवा दल और जैन मठ जैसे प्रभावशाली धार्मिक संगठनों ने योजना बंद करने के लिए याचिका दायर की थी।

इन क्षेत्रों में कई वर्गों में पिछड़े लोग रहते हैं
राज्य सरकार ने केंद्र को बताया कि उसके उत्तर-पूर्वी हिस्से में "सबसे ज्यादा सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए लोग रहते हैं"। बताया कि ज्यादातर परिवार के सदस्य अनपढ़, अस्वस्थ, बेरोजगार और सामाजिक मिथकों और गलत धारणाओं से पीड़ित हैं। वे अपने बच्चों को रोजाना जरूरत के अनुसार खाना नहीं दे पा रहे हैं। उनकी गंभीर गरीबी और अपर्याप्त भोजन के कारण उनके बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं। ये बच्चे एनीमिक और पाचन की कमी से पीड़ित हैं और कई तरह की बीमारी से ग्रसित हैं।

60-40 का खर्च उठाएगी केंद्र और राज्य
राज्य सरकार को केंद्र द्वारा सलाह दी गई है कि वह 2022-23 की तीसरी तिमाही तक कोरोना महामारी से पैदा हुई पोषण संबंधी समस्या को कम करने के लिए खाने में अंडे उपलब्ध कराए। इस पर आने वाला खर्च केंद्र 60% और राज्य 40% उठाएगी। जबकि कर्नाटक सरकार "क्षीर भाग्य योजना" के तहत क्लास 1 से 10 तक के बच्चों को दूध उपलब्ध कराने का पूरा खर्च उठाएगी।

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