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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद केंद्र का एक्शन:IT एक्ट की धारा 66A में दर्ज केस वापस होंगे; 7 साल पहले कानून खत्म, फिर भी केस दर्ज हुए तो SC बोला- गजब है

नई दिल्ली16 दिन पहले
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केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि IT एक्ट की धारा 66A के तहत दर्ज सभी केस तुरंत वापस लिए जाएंगे। केंद्र ने सभी राज्य सरकारों और पुलिस चीफ से कहा है कि इस धारा के तहत दर्ज केस तो वापस लिए ही जाएं, साथ ही आगे भी इसके तहत FIR न की जाए।

केंद्र ने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतराज का जिक्र किया
केंद्र ने अपने राज्यों के मुख्य सचिवों और DGP को भेजे नोटिस में कहा है कि अभी भी कुछ पुलिस अधिकारी इस धारा के तहत केस दर्ज कर रहे हैं, जबकि IT कानून की इस धारा को सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही खत्म कर दिया है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा ऐतराज जाहिर किया है। आप लोग सभी पुलिस स्टेशनों को ये निर्देश भेजें कि इस धारा के तहत कोई केस दर्ज न किया जाए। अगर ऐसा कोई केस दर्ज किया गया हो तो उसे वापस लिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- जो भी चल रहा है, भयानक है
NGO पीपुल यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि आपने 2015 में IT एक्ट की जिस धारा 66A को खत्म कर दिया था, उसके तहत 7 साल में 1 हजार से ज्यादा केस दर्ज किए गए हैं।

PUCL से मिली जानकारी के बाद जस्टिस आर नरीमन, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने कहा था कि ये हैरानी वाली बात है। हम नोटिस जारी करेंगे। ये गजब है। जो भी चल रहा है, वो भयानक है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में दिया था ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2015 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए IT एक्ट की धारा 66A को खत्म कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि ये कानून धुंधला, असंवैधानिक और बोलने की आजादी के अधिकार का उल्लंघन है। इस धारा के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आक्रामक या अपमानजनक कंटेंट पोस्ट करने पर पुलिस को यूजर को गिरफ्तार करने का अधिकार था।

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