भास्कर ओपिनियनगर्ल्स हॉस्टल:चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की शर्मनाक घटना और उस पर पुलिस की लीपापोती

12 दिन पहले
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कभी-कभी कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें देख-सुनकर मन उदास हो जाता है। चाँद सूरज की सुंदरता, सवेरे की पहली किरणों का संगीत, गहरी रातों की खामोशी, पत्तों में से छनती हुई मेंह की बूँदें और घास पर फिसलती हुई ओस, यह सब कुछ हमारे लिए कड़वा हो जाता है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में हुई घटना कुछ ऐसी ही है।

एक लड़की ही लड़कियों का वीडियो बनाकर किसी युवक को भेज देती है। सवाल इतना सा भी नहीं है कि वीडियो बनाया क्यों गया और किसी को भेजा क्यों गया। बड़ा सवाल यह है कि चंडीगढ़ पुलिस इसे इस तरह दबा रही है जैसे किसी ने उसका वीडियो उतार लिया हो!

हालाँकि यूनिवर्सिटी ने भी कम चालें नहीं चलीं। पहले मीडिया को भगाया। कहा कि यहाँ कुछ नहीं हुआ। दबाव बढ़ा तब बयान लिए। पूछताछ की और जिस पर आरोप लगे थे, उसने हॉस्टल वार्डन के सामने बात क़बूल भी कर ली। यह सब रिपोर्ट पुलिस को दी गई। पुलिस फिर भी कहती रही कि कुछ नहीं हुआ। एक ही वीडियो था। वो भी भेजने वाली खुद का ही।

लेकिन बात बढ़ गई। रात को हॉस्टल में एंबुलेंस क्यों आई? ऐसा क्या हुआ कि बच्चियाँ बेहोश हो गईं? पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था। अब भी नहीं है। सुना था पंजाब में बच्चियाँ दोस्ती में चुनरियाँ बदल लेती थीं। यह उनकी दोस्ती थी, लेकिन बात दूसरों को वीडियो भेजने तक पहुँच जाएगी, यह किसी ने नहीं सोचा था।

इस तरह की घटना पर पुलिस और प्रशासन की लीपापोती अजीब भी है और बेहद डरावनी भी। हो सकता है पुलिस यूनिवर्सिटी प्रशासन को बचा रही हो या अपने आप की लापरवाही पर पर्दा डाल रही हो, लेकिन पर्दा तो उठ चुका है। न चंडीगढ पुलिस की शान रही, न महँगी, निजी, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की इज़्ज़त।

अब भला किसको बचाया जा रहा है? कौन है जो उस बच्ची पर इस तरह का वीडियो बनाने के लिए दबाव बना रहा था? कौन है जो यूनिवर्सिटी के हॉस्टल कैम्पस में ऐसा जानबूझ कर होने दे रहा था? … और कौन है जो ऐसे नाज़ुक मौक़ों पर मोबाइल के इस तरह के इस्तेमाल की इजाज़त दे रहा था? जाँच इस बात की होनी चाहिए।

पल-पल में निष्पक्षता और ईमानदारी की क़समें खाने वाली पंजाब सरकार क्या कर रही है? उसके कवि ह्रदय मुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं? जिन घटनाओं से लोगों का कलेजा काँप जाता है, उन पर घड़ियाली आंसू बहाने वाली सरकारें आख़िर क्या जताना चाहती हैं? अपने अनुभव से इनकारी होना ऐसा है, जैसे अपनी ज़िन्दगी के होंठों पर कोई हमेशा के लिए झूठ भर ले।

पंजाब सरकार से ज़्यादा इसे कौन जानता- समझता है? फिर भी उनकी पुलिस, ऐसा क्यों कर रही है, कोई नहीं जानता। कम से कम वे भगवंत मान तो नहीं ही जानते होंगे जिन्हें हाल ही एक इंटरनेशनल फ़्लाइट से उतार दिया गया था और दूसरी फ़्लाइट से देश आना पड़ा!

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