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उपलब्धि / चंद्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा, 7 सितंबर को सतह पर लैंडिंग; इसरो प्रमुख बोले- सबसे जटिल दौर पूरा



Chandrayaan 2, ISRO Mission Moon Orbit News Updates: Chandrayaan 2 Lunar Orbit Insertion
Chandrayaan 2, ISRO Mission Moon Orbit News Updates: Chandrayaan 2 Lunar Orbit Insertion
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Chandrayaan 2, ISRO Mission Moon Orbit News Updates: Chandrayaan 2 Lunar Orbit Insertion
Chandrayaan 2, ISRO Mission Moon Orbit News Updates: Chandrayaan 2 Lunar Orbit Insertion
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  • चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में मंगलवार सुबह 9.02 बजे पहुंचा, पूरी प्रक्रिया में आधे घंटे का वक्त लगा
  • इसरो प्रमुख बोले- 2 सितंबर को लैंडर ऑर्बिटर से अलग होगा, 7 सितंबर को रात 1.55 पर लैंडिंग
  • 22 जुलाई को लॉन्च किया गया था मिशन, यान 13 दिन तक चंद्रमा का चक्कर लगाएगा

Dainik Bhaskar

Aug 20, 2019, 01:46 PM IST

नई दिल्ली. चंद्रयान-2 मंगलवार सुबह 9.02 बजे चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया। कक्षा में पूरी तरह स्थापित होने में इसे करीब आधे घंटे लगे। इसरो ने यह जानकारी दी। 23 दिन पृथ्वी के चक्कर लगाने के बाद चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने में इसे 6 दिन लगे। अब यान 13 दिन तक चंद्रमा का चक्कर लगाएगा। 7 सितंबर को चांद की सतह पर पहले से निर्धारित जगह (दक्षिणी ध्रुव) पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। इसरो प्रमुख के सिवन ने कहा कि मिशन का सबसे जटिल दौर पूरा हुआ। चंद्रयान-2 ने तय कक्षा में प्रवेश किया। 

 

सिवन के मुताबिक, ‘‘ हम यान के इंजन को और चार बार चालू करेंगे। पहली बार कल (21 अगस्त) चालू किया जाएगा। इसके बाद 28 अगस्त, 30 अगस्त और 1 सितंबर को ऐसा किया जाएगा। 2 सितंबर को लैंडर ऑर्बिटर से अलग होगा। 3 सितंबर को चंद्रयान 3 सेकंड के लिए स्थान बदला जाएगा। इससे तय हो जाएगा कि लैंडर का सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है। 7 सितंबर को रात 1.55 बजे चंद्रयान-2 चांद की सतह पर लैंड करेगा।’’

 

सिवन ने कहा कि यान की गति सामान्य थी। इसमें थोड़ी सी भी गलती होती तो पूरा मिशन फेल हो जाता।

 

 

लैंडिंग ऐसी जगह, जहां रोशनी ज्यादा

चंद्रयान-2 मिशन की लॉन्चिंग की तारीख पहले 15 जुलाई थी। बाद में इसे 22 जुलाई को लॉन्च किया गया था। मिशन की लॉन्चिंग की तारीख पहले आगे बढ़ाने के बावजूद चंद्रयान-2 चांद पर तय तारीख (7 सितंबर) को ही पहुंचेगा। इसे समय पर पहुंचाने का मकसद यही है कि लैंडर और रोवर तय शेड्यूल के हिसाब से काम कर सकें। समय बचाने के लिए चंद्रयान ने पृथ्वी का एक चक्कर कम लगाया। पहले 5 चक्कर लगाने थे, पर बाद में इसे चार किया गया। लैंडिंग ऐसी जगह तय है, जहां सूरज की रोशनी ज्यादा है। रोशनी 21 सितंबर के बाद कम होनी शुरू होगी। लैंडर-रोवर को 15 दिन काम करना है, इसलिए समय पर पहुंचना जरूरी है।

 

Chandra

 

चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलो
चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट से लॉन्च किया गया। इस रॉकेट में तीन मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं। इस मिशन के तहत इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर को उतारने की योजना है। इस बार चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलो है। यह चंद्रयान-1 मिशन (1380 किलो) से करीब तीन गुना ज्यादा है। लैंडर के अंदर मौजूद रोवर की रफ्तार 1 सेमी प्रति सेकंड है।


चंद्रयान-2 मिशन क्या है?
चंद्रयान-2 वास्तव में चंद्रयान-1 मिशन का ही नया संस्करण है। इसमें ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं। चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था। चंद्रयान-2 के जरिए भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर उतारेगा। यह लैंडिंग चांद के दक्षिणी ध्रुव पर होगी। इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर यान उतारने वाला पहला देश बन जाएगा।


ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर क्या काम करेंगे?
चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन करना है। ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा, ताकि चांद के अस्तित्व और विकास का पता लगाया जा सके। वहीं, लैंडर और रोवर चांद पर एक दिन (पृथ्वी के 14 दिन के बराबर) काम करेंगे। लैंडर यह जांचेगा कि चांद पर भूकंप आते हैं या नहीं। जबकि, रोवर चांद की सतह पर खनिज तत्वों की मौजूदगी का पता लगाएगा।

 

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