• Hindi News
  • National
  • Chandrayaan 2 Launch rehearsal completed announces ISRO, mission to be launched tomorrow

कामयाबी / इसरो ने चंद्रयान-2 की रिहर्सल पूरी की, कल होगी लॉन्चिंग



Chandrayaan-2 Launch rehearsal completed announces ISRO, mission to be launched tomorrow
X
Chandrayaan-2 Launch rehearsal completed announces ISRO, mission to be launched tomorrow

  • इसरो के पूर्व प्रमुख किरण कुमार ने कहा- लॉन्चिंग की तैयारियां पूरी
  • 15 जुलाई को लॉन्चिंग से 56 मिनट पहले स्पेसक्राफ्ट में कुछ तकनीकी खराबी पाई गई थी
  • इसके बाद लॉन्चिंग की तारीख को एक हफ्ते आगे बढ़ा दिया गया

Dainik Bhaskar

Jul 21, 2019, 08:33 AM IST

नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने चंद्रयान-2 की लॉन्च रिहर्सल पूरी कर ली है। भारत का दूसरा मून मिशन 22 जुलाई को दोपहर 2:43 पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा। इस बीच इसरो के पूर्व प्रमुख एएस किरण कुमार ने कहा है कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। हम सोमवार के इवेंट के लिए तैयार हैं। 

 

इसरो ने यह जानकारी ट्विटर पर भी साझा की। इसमें कहा गया कि जीएसएलवी एमके3-एम1/चंद्रयान-2 की लॉन्च रिहर्सल पूरी हो चुकी है। इसका प्रदर्शन सामान्य है। 
 
रॉकेट में गैस लीकेज था, जो अब ठीक है 
इससे पहले 15 जुलाई की रात मिशन की शुरुआत से करीब 56 मिनट पहले इसरो ने ट्वीट कर लॉन्चिंग आगे बढ़ाने का ऐलान कर दिया गया था। इसरो के एसोसिएट डायरेक्टर (पब्लिक रिलेशन) बीआर गुरुप्रसाद ने बताया था कि लॉन्चिंग से ठीक पहले लॉन्चिंग व्हीकल सिस्टम में खराबी आ गई थी। इस कारण चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग टाल दी गई।

 

खास बात यह है कि लॉन्चिंग की तारीख आगे बढ़ाने के बावजूद चंद्रयान-2 चांद पर तय तारीख 7 सितंबर को ही पहुंचेगा। इसे समय पर पहुंचाने का मकसद यही है कि लैंडर और रोवर तय शेड्यूल के हिसाब से काम कर सकें। समय बचाने के लिए चंद्रयान पृथ्वी का एक चक्कर कम लगाएगा। पहले 5 चक्कर लगाने थे, पर अब 4 चक्कर लगाएगा। इसकी लैंडिंग ऐसी जगह तय है, जहां सूरज की रोशनी ज्यादा है। रोशनी 21 सितंबर के बाद कम होनी शुरू होगी। लैंडर-रोवर को 15 दिन काम करना है, इसलिए समय पर पहुंचना जरूरी है। 

 

चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलो
चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस रॉकेट में तीन मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) होंगे। इस मिशन के तहत इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर को उतारेगा। इस बार चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलो होगा। यह चंद्रयान-1 मिशन (1380 किलो) से करीब तीन गुना ज्यादा है। लैंडर के अंदर मौजूद रोवर की रफ्तार 1 सेमी प्रति सेकंड रहेगी।

 

चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग पहली बार अक्टूबर 2018 में टली
इसरो चंद्रयान-2 को पहले अक्टूबर 2018 में लॉन्च करने वाला था। बाद में इसकी तारीख बढ़ाकर 3 जनवरी और फिर 31 जनवरी कर दी गई। बाद में अन्य कारणों से इसे 15 जुलाई तक टाल दिया गया। इस दौरान बदलावों की वजह से चंद्रयान-2 का भार भी पहले से बढ़ गया। ऐसे में जीएसएलवी मार्क-3 में भी कुछ बदलाव किए गए थे।

 

ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर क्या काम करेंगे?
चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन करना है। ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा, ताकि चांद के अस्तित्व और विकास का पता लगाया जा सके। वहीं, लैंडर और रोवर चांद पर एक दिन (पृथ्वी के 14 दिन के बराबर) काम करेंगे। लैंडर यह जांचेगा कि चांद पर भूकंप आते हैं या नहीं। जबकि, रोवर चांद की सतह पर खनिज तत्वों की मौजूदगी का पता लगाएगा।
 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना