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चंद्रयान-2 / नीदरलैंड के एस्ट्रोनॉमर का दावा- चंद्रमा की सतह पर टकराने के बाद टूटा था लैंडर विक्रम का संपर्क



Chandrayaan-2: Netherlands Astronomer claims - Lander Vikram's contact was broken after hitting the lunar surface
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Chandrayaan-2: Netherlands Astronomer claims - Lander Vikram's contact was broken after hitting the lunar surface

  • इसरो ने बताया था कि लैंडर विक्रम की लोकेशन मिली, वह टेढ़ा पड़ा है और संपर्क की कोशिशें जारी
  • वैज्ञानिकाें का दावा- संपर्क टूटते ही क्रैश लैंडिंग का पता चल गया था

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 07:29 AM IST

नई दिल्ली (अनिरुद्ध शर्मा). चंद्रमा की सतह पर पड़े चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की स्थिति पर मंगलवार काे चौथे दिन भी सस्पेंस बना रहा। इसरो ने मंगलवार को पहली बार आधिकारिक तौर पर विक्रम के मिलने की जानकारी ट्‌वीट करके दी। हालांकि, इसकी कोई तस्वीर जारी नहीं की। इसी बीच, नीदरलैंड के एस्ट्रोनॉमर सीस बासा ने नासा की जेट प्रॉपल्शन लैब के डेटा और इसरो के सार्वजनिक ताैर पर उपलब्ध डेटा की तुलना के आधार पर दावा किया कि लैंडर का संपर्क चंद्रमा की सतह से टकराने के बाद टूटा था, न कि सतह से 2.1 किमी ऊपर। इसराे ने 2.1 किमी ऊपर ही संपर्क टूटने का दावा किया था।


सीस बासा नीदरलैंड की एस्ट्रॉन (नीदरलैंड इस्टीट्यूट ऑफ रेडियो एस्ट्रोनॉमी) संस्था के लिए दुनियाभर के स्पेसक्राफ्ट की ट्रैकिंग करते हैं। 7 सितंबर को भी वह ड्विंगलू टेलीस्कॉप ऑब्जर्वेटरी से चंद्रयान-2 की लैंडिंग पर नजर रखे हुए थे।

 

चंद्रमा की सतह से टकराकर क्षतिग्रस्त हो चुका है

सीस बासा ने मंगलवार को चार रंगों की रेखाओं का एक ग्राफ ट्वीट कर उन्होंने बताया कि उसकी बैंगनी रेखा रेडियोटेलीस्कॉप डॉप्लर कर्व की है, जबकि नारंगी रेखा चंद्रयान-2 के लैंडर की नासा जेपीएल द्वारा जारी हॉरिजॉन ट्रैजेक्टरी की है। उन्होंने लिखा, ‘इसकी तुलना से स्पष्ट है कि लैंडर चंद्रमा की सतह से टकराकर क्षतिग्रस्त हो चुका है। उससे दोबारा संपर्क के प्रयास सफल होने की संभावना बेहद कम है।’ उन्हाेंने शनिवार को ही डॉप्लर कर्व की तस्वीरें जारी करते हुए अफसोस जताया था कि लैंडर की क्रैश लैंडिंग हुई है।

 

ऑर्बिटर में लगे तीन कैमरे से इसरो को मिली लैंडर की तस्वीरें

इसरो के एक पूर्व वैज्ञानिक ने कहा कि इसरो ने लैंडिंग के समय संपर्क टूटने के बाद लाइव प्रसारण के दौरान ही ऑर्बिटर से मिली जो तस्वीर जारी की थी, उसमें दिख रहा है कि लैंडर स्कैनिंग (हरी तरंगे) के जरिए उतरने की जगह चुनने की प्रक्रिया शुरू कर चुका था। यह सतह से 100 मीटर ऊपर शुरू होनी थी। संपर्क टूटने के समय हॉरिजोंटल गति 48.1 मीटर प्रति सेकंड (जो जीरो होनी चाहिए थी) और वर्टिकल गति 59 मीटर प्रति सेकंड थी। यानी ऑर्बिटर द्वारा ली गई इस तस्वीर के अगले एक से दो सेकंड के बीच लैंडर चंद्रमा की सतह से टकराया होगा। उन्होंने कहा कि इसरो को ऑर्बिटर से मिली लैंडर की तस्वीर जारी करके स्थिति स्पष्ट कर देनी चाहिए।ऑर्बिटर में लगे 8 उपकरणों में से तीन कैमरे हैं। इन्हीं की मदद से इसरो को लैंडर की तस्वीर मिली हैं। सूत्रों का कहना है कि बेंगलुरू के नजदीक ब्यालालू स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क के आलावा नासा के जेट प्रोपल्शन लैब की कैलिफोर्निया, मेड्रिड और कैनबरा स्थित रेडियो एंटीना का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इनसे चंद्रमा पर सर्च सिग्नल भेजे जा रहे हैं, लेकिन 8 लाख किलोमीटर (आना-जाना) का सफर तय करने बाद भी लैंडर के सक्रिय होने की अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है।

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