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चंद्रयान-2 / पहली बार कोई यान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा, भारत की कामयाबी से वहां बेस कैम्प बनाने की संभावनाएं बढ़ेंगी



Chandrayaan 2 Moon Mission: ISRO Chandrayaan 2 Launch Latest News, First time a spacecraft will land on lunar South Pole
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Chandrayaan 2 Moon Mission: ISRO Chandrayaan 2 Launch Latest News, First time a spacecraft will land on lunar South Pole

  • श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 15 जुलाई को तड़के 2:51 बजे चंद्रयान-2 उड़ान भरेगा
  • यह 53 से 54 दिन के सफर के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा और 14 दिन तक डेटा जुटाएगा
  • चंद्रयान-2 की सफल लैंडिंग के साथ ही भारत चांद की सतह पर पहुंचने वाला दुनिया का चौथा देश बनेगा
  • एक्सपर्ट तरुण शर्मा के मुताबिक दक्षिणी ध्रुव पर पानी मिलने की संभावना सबसे ज्यादा

Dainik Bhaskar

Jul 18, 2019, 04:59 PM IST

नई दिल्ली. चंद्रयान-2 दुनिया का पहला ऐसा यान होगा, जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। इससे पहले चीन के चांग'ई-4 यान ने दक्षिणी ध्रुव से कुछ दूरी पर लैंडिंग की थी। अब तक यह क्षेत्र वैज्ञानिकों के लिए अनजान बना हुआ है। चांद के बाकी हिस्से की तुलना में ज्यादा छाया होने की वजह से इस क्षेत्र में बर्फ के रूप में पानी होने की संभावना ज्यादा है। अगर चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की खोज कर पाता है, तो यहां इंसानों के रुकने लायक व्यवस्था करने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। यहां बेस कैम्प बनाए जा सकेंगे। साथ ही अंतरिक्ष में नई खोज का रास्ता खुलेगा।

 

चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव : ऐसी जगह जहां बड़े क्रेटर्स हैं और सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पातीं

 

  • चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अगर कोई अंतरिक्ष यात्री खड़ा होगा तो उसे सूर्य क्षितिज रेखा पर दिखाई देगा। वह चांद की सतह से लगता हुआ और चमकता नजर आएगा। सूर्य की किरणें दक्षिणी ध्रुव पर तिरछी पड़ती हैं। इस कारण यहां तापमान कम होता है।
  • स्पेस इंडिया के ट्रेनिंग इंचार्ज तरुण शर्मा बताते हैं कि चांद का जो हिस्सा सूरज के सामने आता है, वहां का तापमान 130 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है। इसी तरह चांद के जिस हिस्से पर सूरज की रोशनी नहीं आती, वहां तापमान 130 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। लिहाजा, चांद पर हर दिन (पृथ्वी के 14 दिन) तापमान बढ़ता-चढ़ता रहता है, लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होता। यही कारण है कि वहां पानी मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है।

 
चंद्रयान-2 की कामयाबी से अंतरिक्ष विज्ञान के लिए नए रास्ते खुलेंगे 


1) पानी और खनिजों की खोज 
चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मैग्नीशियम, कैल्शियम और लोहे जैसे खनिजों को खोजने का प्रयास करेगा। वह चांद के वातावरण और इसके इतिहास पर भी डेटा जुटाएगा। लेकिन इसका सबसे खास मिशन वहां पानी या उसके संकेतों की खोज होगी। अगर चंद्रयान-2 यहां पानी के सबूत खोज पाता है तो यह अंतरिक्ष विज्ञान के लिए एक बड़ा कदम होगा। दक्षिणी ध्रुव के क्रेटर्स में सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पातीं। इसके कारण इनमें जमा पानी अरबों सालों से एक जैसा हो सकता है। इसका अध्ययन कर शुरुआती सोलर सिस्टम के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। 

 

2) बेस कैम्प बनाने की संभावनाएं मजबूत होंगी 
एस्ट्रोनॉमी एक्सपर्ट तरुण शर्मा बताते हैं कि चांद पर पानी न होने के चलते वहां अभी अंतरिक्ष यात्री ज्यादा दिन नहीं रह सकते। चंद्रयान-2 अगर यहां बर्फ खोज पाता है, तो यह समस्या खत्म हो जाएगी। बर्फ से पीने के पानी और ऑक्सीजन की व्यवस्था हो सकेगी। तरुण कहते हैं कि पानी और ऑक्सीजन की व्यवस्था होगी तो चांद पर बेस कैम्प बनाए जा सकेंगे, जहां चांद से जुड़े शोधकार्य के साथ-साथ अंतरिक्ष से जुड़े अन्य मिशन की तैयारियां भी की जा सकेंगी। 

 

3) चंद्रमा अंतरिक्ष में नया लॉन्च पैड बन सकेगा
तरुण का कहना है कि अंतरिक्ष एजेंसियां मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए चांद को लॉन्च पैड की तरह इस्तेमाल कर पाएंगी। इसके अलावा यहां पर जो भी मिनरल्स होंगे, उनका भविष्य के मिशन में इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे अंतरिक्ष मिशन का खर्च कम होगा। चांद से मंगल ग्रह पर पहुंचने में समय भी कम लगेगा। इसी तरह बाकी ग्रहों के लिए भी मिशन लॉन्च करने में आसानी होगी।

 

4) चांद पर ऊर्जा पैदा की जा सकेगी
दक्षिणी ध्रुव में एक हिस्सा ऐसा भी है, जो न तो ज्यादा ठंडा है और न ही अंधेरे में रहता है। यहां के शेकलटन क्रेटर्स के पास वाले हिस्सों में सूर्य लगातार 200 दिनों तक चमकता है। यहां पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को शोधकार्य में बड़ी मदद मिल सकती है। यहां वैज्ञानिक सूर्य की किरणों का उपयोग कर ऊर्जा की आपूर्ति कर सकते हैं, जो मशीनों और अन्य शोधकार्य के लिए जरूरी होगी।

 

अमेरिका 2024 में दक्षिणी ध्रुव पर भेजेगा मानव मिशन
अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी दक्षिणी ध्रुव पर जाने की तैयारी कर रही है। 2024 में नासा चांद के इस हिस्से पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारेगा। अप्रैल 2019 में आई नासा की एक रिपोर्ट के अनुसार, चांद के इस अनदेखे हिस्से पर पानी होने की संभावनाओं के कारण ही नासा यहां अंतरिक्ष यात्री भेजेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, चांद पर लंबे समय तक शोधकार्य करने के लिए पानी बहुत जरूरी संसाधन है। नासा के मुताबिक, ऑर्बिटरों से परीक्षणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ है और यहां अन्य कई प्राकृतिक संसाधन भी हो सकते हैं। फिर भी इस हिस्से के बारे में अभी बहुत सी जानकारियां जुटाना है।

 

चंद्रयान-2

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