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चारधाम यात्रा में 6 दिन में 20 श्रद्धालुओं की मौत:ज्यादातर को आया हार्ट अटैक, इनमें कई बीमार और बुजुर्ग श्रद्धालु शामिल

देहरादून3 महीने पहले

उत्तराखंड में 3 मई से शुरू हुई चारधाम यात्रा में अब तक 20 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक की वजह से हुई हैं। इनमें एक नेपाली मजदूर भी है। सोमवार को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में 14 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। इनके अलावा केदारनाथ में पांच और बद्रीनाथ में एक श्रद्धालु की मौत हुई है। इस तरह छह दिन में 20 तीर्थयात्रियों की मौत ने यात्रा के आयोजकों और प्रशासन को चिंता में डाल दिया है।

चारधाम मैदानी क्षेत्र से करीब 10 हजार से 12 हजार फीट के बीच की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी ऊंचाई पर चढ़ने वाले श्रद्धालुओं में ज्यादातर वो लोग शामिल हैं जो या तो बुजुर्ग हैं या किसी दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं। पूरा मामला जानने से पहले पोल में भाग लेकर अपनी राय जरूर दीजिए...

सबसे ज्यादा केदारनाथ के लिए रजिस्ट्रेशन
घटना को लेकर सीएम धामी मंगलवार को देहरादून में बैठक बुलाई। उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, अब तक 9.5 लाख से अधिक यात्री पंजीकरण कर चुके हैं। सबसे ज्यादा 3.35 लाख केदारनाथ के लिए रजिस्ट्रेशन हुए हैं। सभी चार धामों में निर्धारित क्षमता से तीन गुना अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि तीर्थयात्रियों की मौतें कई कारणों से हो रही हैं।

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श्रद्धालुओं के लिए कोविड सर्टिफिकेट जरूरी नहीं
सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं के पुख्ता इंतजाम होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कठिन पैदल मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ठहरने के पर्याप्त इंतजाम तक नहीं है।

चारधाम यात्रा के दौरान राज्य सरकार ने ऐसे तीर्थयात्रियों के लिए न तो हेल्थ फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी किया था और न ही तीर्थयात्रियों की संख्या पर कोई सीमा तय की थी। इसके अलावा कोविड निगेटिव रिपोर्ट और वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भी अनिवार्य नहीं किया गया था।

जोशीमठ से बद्रीनाथ धाम तक देवताओं की डोलियां निकाली गई।
जोशीमठ से बद्रीनाथ धाम तक देवताओं की डोलियां निकाली गई।

दो साल बाद शुरू हुई चारधाम यात्रा
चारधाम यात्रा दो साल बाद 3 मई से शुरू हुई है। आखिरी बार 2019 में श्रद्धालुओं ने चारधाम की यात्रा की थी, लेकिन 2020 और 2021 में देश में बढ़ते कोरोना के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया, जिसके चलते सभी धार्मिक स्थलों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया था।

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