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भास्कर एक्सक्लूसिव:चारधाम रूट के निर्माण में गलतियां सामने आई, चट्टानों के बीच जम गया पानी; रोज आ रहे छोटे भूकंप

देहरादून9 दिन पहलेलेखक: मनमीत
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उत्तराखंड के चारधाम रूट पर ऑल वेदर रोड यात्रा निर्माण में बड़ी गलतियां सामने आई है। ऋषिकेश-बद्रीनाथ रोड के चौड़ीकरण के दौरान कई जगह पानी के प्राकृतिक स्रोत मलबे में दब गए, जिससे चट्टानों के बीच पानी जम गया है।

अब वह पानी चट्‌टानों के बीच जमा हो रहा है। इससे चट्‌टानें गीली होकर ढहनी शुरू हो सकती हैं। यही नहीं, कई जगहों पर ओवर हैंगिंग (तीव्र ढलान) वाली चट्‌टानों पर दरारें आ गई हैं।

वैज्ञानिक चिंतित, सरकार को दिए 3 सुझाव
चारधाम रूट के निर्माण के बाद उत्तराखंड के वरिष्ठ सरकारी वैज्ञानिक इसे लेकर चिंतित हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो इन्हें समय रहते नहीं सुधारा गया तो हमेशा बड़े हादसों की आशंका बनी रहेगी। वैज्ञानिकों ने सरकार को 3 सुझाव दिए हैं।

  • ऐसे सभी इलाकों को तुरंत चिह्नित किया जाए, वहां चेतावनी बोर्ड लगाएं।
  • ढालों से निकलने वाली जल धाराओं को रास्ता दें, ताकि खतरा टले।
  • जिन चट्‌टानों पर दरारें नजर आ रही हैं, उन्हें समय रहते गिरा दिया जाए।

रोज आ रहे छोटे भूकंप
हिमालयी रेंज में रोज 10-20 छोटे भूकंप आते हैं। ये रिक्टर स्केल पर 3 से कम होते हैं, इसलिए महसूस नहीं होते। जबकि, इनसे जमीन में कंपन होता है। ऐसे में चट्‌टानें ढहती रहती हैं। उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के डायरेक्टर वरिष्ठ भूगर्भीय वैज्ञानिक प्रो. एमपीएस बिष्ट ने बताया- ‘हमारे शोध में सामने आया कि इन इलाकों में ऑल वेदर रोड का जो काम हुआ है, उसमें कुछ गलतियां हो गई हैं। चट्‌टानों में पड़ी दरारें साफ संकेत दे रही हैं कि वे कभी भी नीचे गिर सकती हैं।

सालभर गिरता है पानी, ढाबा बना काल
प्रो. बिष्ट ने बताया कि इस रूट पर कई जगह ऐसी हैं, जहां ऊपरी ढाल पर पानी के छोटे-छोटे कई स्रोत हैं। सड़क बनाते समय ये स्रोत मलबे में दब गए। इनसे सालभर पानी निकलता है। कुछ जगह ढालों के नीचे सड़क पर ढाबे आदि खोल दिए हैं। दरअसल, पानी के स्रोत का रास्ता दब चुका है। अब ये पानी चट्‌टानों के बीच जमा हो रहा है। ऐसे में चट्‌टानें गीली होकर कमजोर हो जाती हैं। ये बड़ा खतरा बन जाती हैं।