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कैंसर मरीजों के लिए गुल्लक कैंपेन:चैरिटी से 26 मरीजों की आर्थिक मदद, ओडिशा में जगह-जगह गुल्लक रखकर मदद जुटाने की मुहिम

ओडिशा10 महीने पहलेलेखक: संदीप राजवाड़े
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40 वर्षीय नारायण ओझा (बाएं) पिछले पांच साल से इसी तरह मदद का बीड़ा उठाए हैं। उनकी इस पहल को लोगों का समर्थन मिल रहा है। - Dainik Bhaskar
40 वर्षीय नारायण ओझा (बाएं) पिछले पांच साल से इसी तरह मदद का बीड़ा उठाए हैं। उनकी इस पहल को लोगों का समर्थन मिल रहा है।

मदद सिर्फ धन से नहीं होती, इच्छाशक्ति से भी होती है। पांच साल पहले ओडिशा में पेंटिंग का काम करने वाले नारायण चंद्र ओझा के मन में कैंसर मरीजों की सहायता करने का ख्याल आया। खुद ओझा की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन इच्छाशक्ति प्रबल थी। ओझा ने अपनी जमापूंजी तो दान कर दी, लेकिन आगे और मदद करने के लिए चैरिटी का सहारा लिया। उन्होंने प्रायोगिक तौर पर सार्वजनिक स्थान पर एक गुल्लक (मिट्टी की हुंडी) रख दी। तीन महीने में उसमें महज 5700 रुपए ही जमा हुए, लेकिन ये नेक काम की शुरुआत भर थी।

अब ओझा के इस काम की पूरे प्रदेश में तारीफ हो रही है, लोग उन्हें ‘बापू ओझा’ के नाम से पुकारने लगे हैं। ओझा पिछले पांच साल से प्रदेश में गुल्लक के जरिए ही चैरिटी के मिशन पर हैं। आज उनकी गुल्लक में पचास हजार रुपए तक इकट्‌ठे हो जाते हैं। इसे अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के सामने फोड़ा जाता है और फिर इस राशि को वह जरूरतमंद कैंसर मरीज़ों और उनके परिजनों को सौंप देते हैं।

'पीड़ित महिला को बच्चे के साथ बिलखते हुए देखा'
ओझा बताते हैं कि 2017 में उन्होंने कटक के एक कैंसर अस्पताल के बाहर एक पीड़ित महिला को बच्चे के साथ बिलखते हुए देखा था। महिला बीमारी से और उसके 6-8 साल के दो बच्चे भूख से बिलख रहे थे। ओझा ने उनसे तकलीफ और परिवार की माली हालत जानी। उन्हें लगा कि ऐसे कई जरूरतमंद कैंसर मरीज होंगे जिनके पास इलाज, दवा और खाने तक के लिए पैसे नहीं होते हैं। फिर उन्होंने ऐसे लोगों की मदद करने की पहल शुरू की।

कैंसर मरीजों के इलाज के लिए दान की अपील
भुवनेश्वर में भीड़भाड़ वाले इलाके खोजे, जहां ज्यादा से ज्यादा लोग मदद कर सकें। और फिर गुल्लक रखना शुरू की। इसमें लोगों से कैंसर मरीजों के इलाज के लिए दान की अपील की गई। ओझा कहते हैं कि नेक काम के लिए लोगों से मदद मांगने में उन्हें किसी तरह की शर्म या लिहाज महसूस नहीं होता। अब तो वे सार्वजनिक कार्यक्रमों के अलावा निजी कार्यक्रम जैसे विवाह, जन्मदिन में भी मदद मांगने के लिए जाने लगे हैं। कुछ लोग तो खुद उन्हें कार्यक्रमों में चैरिटी के लिए आमंत्रित करने लगे हैं।

8 जिलों में शुरू की पहल, एक गुल्लक में 50 हजार रु.तक
नारायण ओझा बताते हैं कि भुवनेश्वर में ही सिर्फ अब 17 गुल्लक लोगों की मदद से भर चुकी हैं। इस पहल को ‘राज्य समाज मंगल हुंडी परिवार’ नाम दिया गया है। अब ये मुहिम प्रदेशव्यापी रूप ले चुकी है। कटक में पांच, अंगुल जिले में एक, जाजपुर, खोरदा और नयागढ़ जिले में भी एक-एक गुल्लक से इसकी शुरुआत की है। ओझा ने बताया कि वह मदद करने से पहले संबंधित व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का भी पता लगाते हैं। इसके बाद ही इलाज के लिए उन्हें राशि देते हैं। इसके अलावा दानराशि के मामले में पूरी पारदर्शिता भी बरती जाती है।

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