चेन्नई / 20 साल बाद अमेरिका से मिला अगवा हुआ बेटा, माता-पिता ने कहा-बेटा वहीं रहो, खुश रहोगे



पिता नागेश्वर राव और मां शिवगामी के बीच अनिवाश। पिता नागेश्वर राव और मां शिवगामी के बीच अनिवाश।
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पिता नागेश्वर राव और मां शिवगामी के बीच अनिवाश।पिता नागेश्वर राव और मां शिवगामी के बीच अनिवाश।

  • चेन्नई के नागेश्वर राव के बेटे का 1999 में ऑटो रिक्शा वाले ने अपहरण कर एक संस्था को बेचा था
  • संस्था ने 1999 में चेन्नई के 300 से अधिक बेसहारा बच्चों को अवैध रूप से बाहर देशों में भेज दिया था
  • सीबीआई ने पता लगाया कि बच्चे को अमेरिकी दंपती ने गोद ले लिया है, डीएनए टेस्ट से इसकी पहचान भी हुई

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 08:10 AM IST

चेन्नई. 20 साल पहले अगवा हुआ बेटा मिल गया था। माता-पिता वापस लाना चाहते थे। फिर मना कर दिया, क्योंकि अभी वह जहां है, वहां ज्यादा खुश है। यह मामला चेन्नई का है, जबकि अगवा किया गया बच्चा अमेरिका में रहता है। 1999 में चेन्नई के नागेश्वर राव और शिवगामी के दो साल के बेटे अविनाश का एक ऑटो रिक्शा वाले ने अपहरण कर उसे मलेशियन सोशल सर्विस नामक संस्था को बेच दिया। इस संस्था ने उसी साल शहर के 300 से अधिक बेसहारा बच्चों को अवैध रूप से दूसरे देशों के नागरिकों को गोद दिया था। इनमें से ज्यादातर बच्चों को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड भेजा गया। इनमें से अमेरिका के एक दंपती ने अविनाश को गोद ले लिया था। मामले की जांच सीबीआई ने की।

 

खोजबीन के बाद सीबीआई ने 2009 में अविनाश का डीएनए टेस्ट कराया गया। इसमें यह साबित हो गया कि अविनाश पेंटर नागेश्वर राव का ही बेटा है, लेकिन यहां एक और अड़चन आ गई। अमेरिकी कानून के मुताबिक गोद लेने के बाद बच्चे को उसके दावेदार से तब तक नहीं मिलने दिया जाता, जब तक कि बच्चा बालिग न हो जाए। अब राव दंपती के पास इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा, लेकिन इस महीने अविनाश 22 साल का हुआ, वह मां से मिलने आ गया। 5 सितंबर को अविनाश जब मां शिवगामी और पिता नागेश्वर राव से मिला तो भावुक हो गया।

 

बेटा तमिल न समझता, मां अंग्रेजी, फिर भी दोनों खुश

अविनाश को मां की तमिल भाषा समझ नहीं आ रही थी और मां को अविनाश की अंग्रेजी। फिर भी दोनों खुश थे। मोहनवदीवेलन नामक शख्स ने मां-बेटे के बीच दुभाषिए के रूप में सहयोग किया। शिवगामी और नागेश्वर राव का कहना था कि ‘खुशी बांटने से बढ़ती है और हम चाहते हैं कि हमारा बेटा हमेशा खुश रहे। फिर चाहे वह अमेरिका में रहे या भारत में।’ उधर, अविनाश ने कहा- ‘मैं बहुत कुछ कहना चाहता हूं, लेकिन फिलहाल मैं वापस जा रहा हूं। लौटकर फिर जरूर आऊंगा।’ 

 

तमिल सीखूंगा, फिर मां को दिल की बात बताऊंगा

अविनाश का कहना है कि मैं जब लौटकर आऊंगा तो थोड़ी बहुत तमिल सीख लूंगा। मैं मां से बहुत सारी बात करना चाहता हूं। मैं उन्हें यह बताना चाहता हूं कि मैं उनसे मिलकर कैसा महसूस कर रहा हूं। बगैर किसी अनुवादक के मैं उन्हें अपने दिल की गहराइयों से महसूस की गई अपनी बातें जरूर बताऊंगा।

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