चेन्नई / पेड़ों पर कीलें, विज्ञापन, बैनर और लाइट लगाने पर 3 साल की जेल; 25 हजार रु. जुर्माना



Chennai: Three years jail for damaging trees
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Chennai: Three years jail for damaging trees
Chennai: Three years jail for damaging trees

  • पेड़ों की सेहत अच्छी रखने और उनकी सुरक्षा के लिए ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने दिखाई सख्ती
  • मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने कॉरपोरेशन से हलफनामा देने के लिए कहा था

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 08:27 AM IST

चेन्नई. ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने सड़क किनारे लगे पेड़ों पर विज्ञापन, तार या लाइट्स लगाकर उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले लोगों और निजी संस्थाओं पर 25,000 रुपए जुर्माना सहित 3 साल जेल की सजा का प्रावधान किया है। पेड़ों से 10 दिन में विज्ञापनों को हटाने का निर्देश देते हुए चेन्नई कॉर्पोरेशन ने कहा कि पेड़ों पर कील ठोकना प्रकृति के खिलाफ है। इससे पेड़ों की उम्र कम होती है।


कॉर्पोरेशन के आयुक्त जी प्रकाश ने बयान में कहा, ‘‘स्थानीय नागरिक पेड़ों पर विज्ञापन, होर्डिंग लगाने की शिकायत नम्मा चेन्नई एप और हेल्पलाइन (1913) पर भी कर सकते हैं। इस एप की शुरुआत नागरिक सुविधाओं में किसी भी तरह की अनियमितता की शिकायत करने के लिए की गई थी।’’

 

पेड़ों को क्या-क्या नुकसान

इस मामले में वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ों पर कीलें ठोकने और उन पर लाइट वगैरह लगाने से उन्हें कई तरह के रोग हो सकते हैं। उनके बढ़ने पर भी असर पड़ता है। इससे भले ही पेड़ बाहर से सेहतमंद दिखें, पर अंदर से खोखले होते जाते हैं। पेड़ों पर लाइट लगाने से उनकी फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया रात को होने लग जाती है। उनकी प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा इन लाइट और होर्डिंग से वाहन चालकों को परेशानी होती है।

 

'फ्री द ट्री' अभियान भी चलाया

शहर की संस्था निझल ने 'फ्री द ट्री' अभियान भी चला रखा है। इसमें पेड़ों को मुक्त करने, नए पौधे लगाना, उनकी देखभाल करना जैसे काम करवाए जाते हैं। संस्था लोगों को जागरूक भी करती है। संस्था के कार्यकर्ता शहरभर में पेड़ों से बैनर, पोस्टर, कीलें और लाइटें हटाते हैं। संस्था की प्रमुख शोभा मेनन ने बताया कि इस फैसले से पेड़ों की सेहत सुधारने में बड़ी मदद मिलेगी।


कोर्ट ने कॉरपोरेशन से हलफनामा देने को कहा था
अगस्त में मद्रास हाईकोर्ट ने कॉरपोरेशन को पेड़ों की कील, विज्ञापन लगाने वालों और इन पर से केबल-तार ले जाने वालों पर कार्रवाई के मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा था। यह आदेश एक जनहित याचिका पर दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि पेड़ों की हालत खराब करने वालों पर कार्रवाई करने में कॉरपोरेशन और पुलिस विफल रही है।

 

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