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एनालिसिस / करगिल के वक्त सेनाओं में तालमेल की कमी थी, जंग के हालात में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी



थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह
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थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंहथल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह

  • एक्सपर्ट पी. स्टोबडन के मुताबिक जल, थल और वायुसेना में सामंजस्य के लिए सीडीएस जरूरी
  • कर्नल (रिटायर्ड) यूएस राठौर के मुताबिक, 5 स्टार रैंक का अफसर तीनों सेनाओं का प्रमुख होना चाहिए

Dainik Bhaskar

Aug 16, 2019, 01:02 PM IST

नई दिल्ली (उदित बर्सले). प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की। इससे तीनों सेनाएं युद्ध के समय बेहतर तालमेल के साथ काम कर सकेंगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सीडीएस की कमी करगिल की जंग में महसूस हुई थी। तब थलसेना और वायुसेना के बीच कम्युनिकेशन गैप साफ नजर आया था। भास्कर ऐप ने इस बारे में कर्नल (रिटायर्ड) यूएस राठौर और इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालसिस में सीनियर फैलो और सेवानिवृत कूटनीतिज्ञ पी. स्टोबडन से बातचीत की।

एक ही युद्ध में थलसेना और वायुसेना का ‘मिशन’ अलग था
कर्नल (रिटायर्ड) यूएस राठौर के मुताबिक थलसेना, वायुसेना और नौसेना, तीनों के बीच सामंजस्य की कमी के पहले भी उदाहरण रहे हैं। 60 के दशक में हुए दो युद्ध में तो देखा ही गया था, लेकिन करगिल युद्ध में यह हकीकत सबके सामने आई। युद्ध शुरू होने के करीब 10 दिन बाद वायुसेना ने दुश्मन को जवाब देना शुरू किया। आर्मी 'ऑपरेशन विजय' के नाम से जंग लड़ रही थी। वहीं, वायुसेना 'ऑपरेशन सफेद सागर' नाम से मोर्चे पर थी। एक ही देश की सेना की दो विंग, एक ही युद्ध में अलग मिशन के साथ थी।

इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालसिस में सीनियर फैलो पी. स्टोबडन बताते हैं कि सामारिक दृष्टि से परिस्थितियां बदल रही हैं। दुश्मन लगातार घुसपैठ और सीजफायर वॉयलेशन कर रहा है। सेना के तीनों अंगों को एक साथ काम करने की जरूरत है। देश को एक जंग जीतने के लिए तीनों सेनाओं के लिए अलग-अलग स्ट्रैटजी बनाने की बजाय सही स्ट्रैटजी में तीनों सेनाओं का कैसे उपयोग किया जाए, इस पर फोकस करने जरूरत है। इस लिहाज से चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ बेहद जरूरी है। 

क्या है चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का मतलब है, सरकार के लिए देश की सुरक्षा से जुड़ा सिंगल प्वाइंट ऑफ पर्सन जो थलसेना, वायुसेना और नौसेना का प्रतिनिधित्व करे। सीडीएस 5 स्टार रैंक का अफसर होगा। 1999 में हुए करगिल युद्ध के बाद तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GOM) ने चीफ ऑफ डिफेंस बनाने की सिफारिश की थी। हालांकि, तब वाजपेयी सरकार में मंत्रियों के समूह की सिफारिश पर सेना के तीनों अंगों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। बाद में तीनों सेनाओं के बीच उचित समन्वय के लिए चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (CoSC) का पद निकाला गया। फिलहाल एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयमैन हैं। कर्नल यूएस राठौर के अनुसार, दुनिया के ज्यादातर देशों के पास सीडीएस जैसी व्यवस्था है। अमेरिका, चीन, यूनाइटेड किंगडम, जापान सहित दुनिया के कई देशों के पास चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ है। 

एक बार एयरफोर्स ने सीडीएस का विरोध किया था
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आडवाणी की अध्यक्षता वाले जीओएम की सिफारिशों को तत्कालीन कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) ने स्वीकार कर लिया था, लेकिन इसे अमल में नहीं लाया जा सका। दरअसल आर्मी और नेवी के अफसरों ने इस पद का तब सपोर्ट किया था, मगर एयरफोर्स ने विरोध किया था। तब एडमिरल अरुण प्रकाश और आर्मी चीफ जनरल बिक्रम सिंह ने सेना के तीनों अंगों में सुधार और इंटीग्रेशन के लिए इस पद की जरूरत बताई थी, लेकिन एयर चीफ मार्शल एस कृष्णास्वामी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की व्यवस्था का विरोध किया था।

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