बच्चे भी शिक्षक / सुगत मित्रा ने तीन प्रयोगों से साबित किया कि बच्चों को ग्रुप में अकेला छाेड़ो तो वे एक-दूसरे के गुरु बन जाते हैं



सुगत राय 20 साल से बच्चों को सिखाने के लिए नए नए तरीके इजाद कर रहे हैं। नीति आयोग से लेकर दुनियाभर ने इनके प्रयोगों को अपनाया और सम्मानित किया है। सुगत राय 20 साल से बच्चों को सिखाने के लिए नए नए तरीके इजाद कर रहे हैं। नीति आयोग से लेकर दुनियाभर ने इनके प्रयोगों को अपनाया और सम्मानित किया है।
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सुगत राय 20 साल से बच्चों को सिखाने के लिए नए नए तरीके इजाद कर रहे हैं। नीति आयोग से लेकर दुनियाभर ने इनके प्रयोगों को अपनाया और सम्मानित किया है।सुगत राय 20 साल से बच्चों को सिखाने के लिए नए नए तरीके इजाद कर रहे हैं। नीति आयोग से लेकर दुनियाभर ने इनके प्रयोगों को अपनाया और सम्मानित किया है।

Dainik Bhaskar

Sep 05, 2019, 12:19 PM IST

बात 1999 की है, तब कंप्यूटर सभी के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं था, इसलिए डाॅ. सुगत मित्रा ने गरीब बच्चों के लिए ‘होल इन द वॉल’ प्रयोग किया। 


दिल्ली की एक बस्ती की दीवार के होल में कंप्यूटर फिट कर दिया। कुछ देर बाद 8 साल के एक लड़के ने इसे चलाकर देखा और फिर उसके साथ आई छह साल की लड़की को माउस पकड़ना और स्क्राॅल करना सिखाया। बाद में यह प्रयोग देशभर में किया और पाया कि छोटे-छोटे बच्चे जब समूह में होते हैं और अगर उन्हें इंटरनेट युक्त कम्प्यूटर मिल जाए तो वे जहां कहीं भी हों, एक दूसरे के साथ मिलकर खुद-ब-खुद कम्प्यूटर चलाना सीख जाते हैं।

 

इस प्रयोग का नतीजा यह हुआ कि वर्ल्ड बैंक ने देशभर में 17 साइट्स पर होल-इन-द-वॉल स्थापित करने का अनुदान दे दिया। प्रयोग सफल रहा। प्रमाणित हो गया कि बच्चे जहां कहीं भी हों, वो कम्प्यूटर सीख सकते हैं, बशर्ते वो समूह में हों और वहां कोई टीचर न हो। इसके बाद एनआईआईटी फाउंडेशन ने देशभर में सैकड़ों होल-इन-द-वॉल कम्प्यूटर लगाए। इस प्रयोग पर सुगत ने  एक पेपर लिखा, जिसे कम्प्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया और अमेरिकन एजुकेशनल रिसर्च एसोसिएशन ने सर्वोत्तम ‘ओपन एक्सेस पेपर’ घोषित किया।

 

मित्रा बताते हैं कि इसी प्रयोग के आधार पर मैंने 2006 में इंग्लैंड में सेल्फ ऑर्गेनाइज्ड लर्निंग एन्वायरमेंट की खोज की, जो आज दुनियाभर में प्रचलित है। इसके तहत समूह में बच्चे अपने प्रश्नों का उत्तर इंटरनेट पर ढूंढ़ते हैं, बिल्कुल वैसे ही, जैसा कि होल-इन-द-वॉल प्रोजेक्ट में किया जाता था। इसके दुनिया में 18 हजारसेशन हो चुके हैं। 2009 में ग्रैनी क्लाउड की नींव रखी, जिसमें शिक्षक बच्चों से ऑनलाइन बात कर सकते थे। 

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