• Hindi News
  • National
  • CID Is Investigating Social Media Accounts Of Jammu And Kashmir Employees, People Are Now Deleting Fast

जम्मू-कश्मीर के सरकारी कर्मचारियों में दहशत:मुलाजिमों के सोशल मीडिया अकाउंट जांच रही CID; लोग अब तेजी से सोशल मीडिया अकाउंट्स डिलीट कर रहे

श्रीनगर9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

इन दिनों जम्मू-कश्मीर में कई सरकारी कर्मचारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर रहे हैं। इसकी वजह प्रशासन द्वारा जारी एक सर्कुलर है। सभी प्रशासनिक सचिवों, आयुक्तों और विभाग प्रमुखों को भेजे गए सर्कुलर के मुताबिक, ‘कई ऐसे लोग हैं जिनके कारनामे, चरित्र और कार्यप्रणाली संदिग्ध है। ये लोग अनिवार्य सीआईडी सत्यापन से गुजरे बिना वेतन-भत्ते पा रहे हैं।’

सोशल मीडिया अकाउंट की डिटेल मांगी
सर्कुलर में कर्मचारियों के सोशल मीडिया अकाउंट की भी जांच करने को कहा गया है। इसके बाद विभागों के प्रमुखों ने कर्मचारियों से सोशल मीडिया अकाउंट (टि्वटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि) की डिटेल मांगी है। नई नौकरी ज्वाइन करने से पहले क्लीयरेंस लेना तो अनिवार्य था ही, राज्य में ऐसा पहली बार है कि सीआईडी कर्मचारियों के सोशल मीडिया अकाउंट की जांच कर रही है। इस आदेश ने जम्मू-कश्मीर के 5 लाख सरकारी कर्मचारियों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है।

च्छेद 370 और 35-ए रद्द करने के विरोध में पोस्ट किया था
शिक्षा विभाग में कार्यरत बशीर अहमद कहते हैं, ‘मैंने सरकार की नीतियों जैसे मूल्यवृद्धि, अनुच्छेद 370 और 35-ए रद्द करने के विरोध में पोस्ट किया है। मैं नौकरी में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना चाहता। इसीलिए अकाउंट डिलीट कर दिया।’ वहीं, स्वास्थ्य विभाग में तैनात मेहराजुद्दीन कहते हैं कि गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना हमारा हक है। हालांकि, सरकार को मेरी पोस्ट रास नहीं आएगी। इसलिए अकाउंट बंद कर देना ही मैंने मुनासिब समझा। इस तरह के सैकड़ों उदाहरण हैं।

सरकारी कर्मचारी सरकारी नीतियों की आलोचना नहीं कर सकते
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब आप सरकारी सेवा में होते हैं तो आपको सेवा नियमों का पालन करना होता है। सरकारी कर्मचारी सरकारी नीतियों की आलोचना नहीं कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि 2017 में आए एक सर्कुलर ने कर्मचारियों द्वारा सरकारी नीतियों के खिलाफ पोस्ट करने पर पाबंदी लगा दी थी। इसके तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट नहीं करेगा, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो सकती है।

कर्मचारियों की राजनीतिक सक्रियता की भी हो रही है जांच
इससे पहले, फरवरी में सरकार ने एक आदेश जारी किया था। इसमें कलेक्टरों को उन सभी कर्मचारियों का विवरण देने को कहा गया, जो 31 दिसंबर 2021 तक 22 वर्ष की सेवा पूरी करेंगे या 48 वर्ष के हो जाएंगे। इस आदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राजनीतिक गतिविधियों में कर्मचारियों की भागीदारी के बारे में भी विवरण मांगा गया है।

5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने के तुरंत बाद, केंद्र ने ट्विटर से ‘घाटी में शांति भंग करने के लिए अफवाहें फैलाने और गलत सूचना फैलाने’ वाले लोगों का अकाउंट सस्पेंड करने को कहा था ताकि अलगाववादी और पत्थरबाजों पर काबू पाया जा सके।

खबरें और भी हैं...