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भारत में 80 वर्षों बाद तापमान बढ़ने से सालाना 15 लाख लोगों की मौत होगी, ओडिशा सबसे ज्यादा प्रभावित होगा

2 वर्ष पहले
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मृतकों की संख्या वर्तमान में संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों की तुलना में अधिक होगी। - Dainik Bhaskar
मृतकों की संख्या वर्तमान में संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों की तुलना में अधिक होगी।
  • क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट में कहा गया- कार्डिएक अरेस्ट से मरनेवालों की तादाद पांच गुना तक बढ़ जाएगी
  • ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण साल 2100 तक औसत तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी
  • ओडिशा में हर साल 42 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो आशंका

नई दिल्ली. भारत में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण 2100 तक औसत वार्षिक तापमान में 4 डिग्री सेंटीग्रेड की बढ़ोतरी होगी। क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2100 में 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले बेहद गर्म दिनों की संख्या में आठ गुना बढ़ोतरी होगी। यह साल 2010 की औसत संख्या 5.1 से बढ़कर 2100 में 42.8 डिग्री तक पहुंच जाएगा। इससे हर साल लगभग 15 लाख लोगों की मौत हो सकती है। मरने वालों की यह संख्या वर्तमान में भारत में सभी संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों की तुलना से अधिक होगी।
 
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने टाटा सेंटर फार डेवलपमेंट के सहयोग से किए गए अध्ययन में पाया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ओडिशा में साल 2100 में तापमान बढ़ने से हर साल 42 हजार से ज्यादा लोगों की मौत की आशंका है। सोमवार को जारी एक नए अध्ययन में सामने आया है कि यह दर राज्य में हर साल कार्डिएक अरेस्ट से मरनेवाले लोगों की संख्या से पांच गुणा अधिक होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी के मौसम में औसत तापमान बढ़ने और गर्म दिनों की संख्या अधिक होने से मृतकों की संख्या में इजाफा होगी।
 

‘शताब्दी के अंत तक देश के सभी राज्यों में गर्म दिनों की संख्या अधिक रहेगी’
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी रफ्तार से जारी रही तो शताब्दी के अंत तक देश के सभी राज्यों में गर्म दिनों की संख्या अधिक रहेगी। ओडिशा में बेहद गर्म दिनों की संख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होगी। 2010 में यह संख्या 1.62 थी, जिसके 2100 तक 48.05 तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इस अध्ययन में जलवायु परिवर्तन एवं मौसम में बदलावों के मानव और अर्थव्यवस्था पर हुए प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब 2100 तक देश का सबसे गर्म राज्य बन जाएगा। यहां पर औसत वार्षिक तापमान 36 डिग्री सेल्सियस रहेगा।   
 

जीवाश्म ईंधन पर बढ़ती निर्भरता का असर भारतीयों पर पड़ेगा: डायरेक्टर
टाटा सेंटर फार डेवलपमेन्ट के फैकल्टी डायरेक्टर माइकल ग्रीन स्टोन ने कहा, “इन परिणामों से साफ है कि विश्वभर में जीवाश्म ईंधन पर बढ़ती निर्भरता का बुरा असर आने वाले समय में भारतीयों पर पड़ेगा। हम आधुनिकीकरण की नीतियों पर ध्यान दे रहे हैं। विश्वस्तरीय उर्जा संकट को देखते हुए यह आ‌वश्यक है कि हम सतत और नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाएं जो कि विकास के लिए जरूरी हैं। साथ ही जलवायु एवं वायु प्रदूषण के जोखिम का प्रबंधन भी बेहद अनिवार्य है। 
 


 

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