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क्लाइमेट समिट आज से:प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग समेत 40 वर्ल्ड लीडर्स शामिल होंगे, मोदी का भाषण पहले सेशन में होगा

नई दिल्ली/वॉशिंगटन6 महीने पहले
दुनिया के कई देशों में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर प्रदर्शन होते रहे हैं। क्लाइमेट एक्टिविस्ट की मांग है कि संयुक्त राष्ट्र सभी देशों के साथ मिलकर जल्द इस मुद्दे पर एक सर्वमान्य नीति और कानून बनाए। (फाइल)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को क्लाइमेट समिट को संबोधित करेंगे। दो दिन चलने वाली इस समिट का आयोजन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन कर रहे हैं। यह वर्चुअल होगी और इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शिरकत करेंगे। भारत और चीन की मौजूदगी इसलिए अहम हो जाती है, क्योंकि इन दोनों में सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है।

मोदी का भाषण कल
भारतीय समय के अनुसार, समिट का पहला सेशन शाम 5.30 से 7.30 बजे तक चलेगा। इसी दौरान मोदी का भाषण होगा। समिट के पहले सेशन की थीम होगी 2030 तक सहभागिता। इस समिट में कुल 40 राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे। बाइडेन ने 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले भाषण में इस समिट और क्लाइमेट चेंज के मुद्दे का जिक्र किया था। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अगर ग्लोबल क्लाइमेट में सुधार लाना है तो भारत और चीन जैसी बड़े देशों और अर्थव्यवस्थाओं को अहम भूमिका निभानी होगी।

जिम कैरी ने तैयार किया था जिनपिंग को
चीन और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर तनातनी है। पहले माना जा रहा था कि जिनपिंग इस समिट में हिस्सा नहीं लेंगे। बाद में बाइडेन के पर्यावरण दूत जिम कैरी ने चीन के विदेश मंत्री से इस बारे में बातचीत की। इसके बाद तय हुआ कि जिनपिंग भी वर्चुअल समिट का हिस्सा होंगे।

बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद यह पहला मौका होगा जब वे चीनी राष्ट्रपति के साथ किसी मंच पर साथ नजर आएंगे। हालांकि, यह वर्चुअल इवेंट होगा। पिछले महीने अमेरिका और चीन के डिप्लोमैट्स की एक बड़ी मीटिंग अलास्का में हुई थी और इस दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण था। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों नेता इस मुद्दे को भी ध्यान में रखेंगे। हालांकि, क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सहमति बन चुकी है।

पाकिस्तान को नहीं बुलाया
इस समिट में दुनिया के तमाम बड़े देशों को बुलाया गया है, लेकिन 22 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान को न्योता नहीं दिया गया। इसकी पाकिस्तान सरकार और वहां के मीडिया ने काफी आलोचना की थी। बाइडेन ने राष्ट्रपति बनने के बाद दुनिया के तमाम देशों के राष्ट्रध्यक्षों से बातचीत की, लेकिन इमरान से नहीं। इसको लेकर मुल्क में मायूसी और डर का माहौल है। वहां ये माना जा रहा है कि बाइडेन का दौर पाकिस्तान के लिए ट्रम्प के दौर से भी मुश्किल साबित होगा।