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विवाद / सीबीआई चीफ को छुट्टी पर भेजने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस



मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का स्वायत्त संस्थाओं में सीधा दखल है। (फाइल) मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का स्वायत्त संस्थाओं में सीधा दखल है। (फाइल)
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मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का स्वायत्त संस्थाओं में सीधा दखल है। (फाइल)मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का स्वायत्त संस्थाओं में सीधा दखल है। (फाइल)

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- सरकार का सीबीआई चीफ को हटाने का फैसला अवैध और मनमाना
  • उन्होंने कहा- सीवीसी के पास कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं

Dainik Bhaskar

Nov 12, 2018, 04:43 PM IST

नई दिल्ली. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के केंद्र सरकार के फैसले को अवैध करार दिया है। खड़गे ने शनिवार को इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। लोकसभा में कांग्रेस के नेता खड़गे के मुताबिक, सरकार का फैसला सीबीआई एक्ट का उल्लंघन है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भी नियमों का उल्लंघन किया है। जो हुआ, उससे साफ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का स्वायत्त संस्थाओं में सीधा दखल है। मैंने इसे ही चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

 

केंद्र का आदेश रद्द करें
लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने कहा कि याचिका में हमने सुप्रीम कोर्ट से दरख्वास्त की है कि केंद्र के आदेश को रद्द करें क्योंकि वह अवैध है। सरकार को इस संबंध में प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस और मेरी (विपक्ष का नेता) मीटिंग बुलानी थी। नियम के मुताबिक, इन तीनों की कमेटी को ही सीबीआई निदेशक की नियुक्ति या हटाने का अधिकार है। कमेटी की अनुमति लिए बिना ही उन्होंने रातों-रात सीबीआई चीफ को अनिश्चितकाल के छुट्टी पर जाने का फैसला कर लिया।

 

सीवीसी को कोई अधिकार नहीं
खड़गे ने कहा, "सीबीआई चीफ के खिलाफ कार्रवाई करने का केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को भी कोई अधिकार नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वत:संज्ञान लेते हुए सीबीआई चीफ वर्मा को छुट्टी पर भेज देना अवैध है।'' कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने खड़गे को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने को कहा था। 

 

सरकार ने अचानक लिया सीबीआई चीफ को छुट्टी पर भेजने का फैसला
सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के रिश्वतखोरी विवाद में फंसने के बाद केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को ज्वाइंट डायरेक्टर नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त कर दिया। जांच जारी रहने तक सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और नंबर दो अफसर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया। इसका आदेश देर रात 2 बजे जारी किया गया। विपक्ष ने सरकार के इस अचानक दखल पर सवाल उठाए। 

 

CBI

 

जेटली ने दिया जवाब
सरकार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जवाब दिए। जेटली ने कहा- ‘‘सरकार ने सिर्फ केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिशों को माना है और निष्पक्ष जांच के लिए दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेजा गया है। किसी एक अफसर को बचाने के विपक्ष के आरोप बेतुके हैं।’’

 

दरअसल, अस्थाना और उनकी टीम के एक डीएसपी पर मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है। वहीं, अस्थाना का आरोप है कि सीबीआई चीफ आलोक वर्मा ने ही 2 करोड़ रुपए की घूस ली है।

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