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आज का इतिहास:कांग्रेस ने आज ही पार्टी के झंडे को दी थी अनौपचारिक मान्यता, कुछ बदलावों के बाद यही झंडा भारत का तिरंगा बना

22 दिन पहले
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1921 में आज ही के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक झंडे को अपने अनौपचारिक झंडे के तौर पर मान्यता दी थी। इस झंडे को पिंगली वेंकैया ने बनाया था। झंडे में लाल और हरा रंग था जो भारत के दो प्रमुख धर्मों का प्रतिनिधित्व करता था। पिंगली जब इस झंडे को लेकर गांधी जी के पास गए, तो उन्होंने झंडे में एक सफेद रंग और चरखे को भी लगाने की सलाह दी। सफेद रंग भारत के बाकी धर्मों और चरखा स्वदेशी आंदोलन और आत्मनिर्भर होने का प्रतिनिधित्व करता था।

1923 में नागपुर में एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान हजारों लोगों ने इस झंडे को अपने हाथों में थाम रखा था। सुभाष चंद्र बोस ने भी द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इस झंडे का इस्तेमाल किया था। इसी दौरान झंडे के रंगों को धर्मों से जोड़ने पर विवाद भी होने लगा। कई लोग झंडे में चरखे की जगह गदा भी जोड़ने की मांग करने लगे तो कई लोग झंडे में एक और गेरुआ रंग जोड़ने की मांग करने लगे। सिखों ने भी मांग की कि या तो झंडे में पीला रंग जोड़ा जाए या सभी तरह के धार्मिक प्रतीकों को हटाया जाए।

इस विवाद को सुलझाने के लिए 1931 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 7 लोगों की एक कमेटी बनाई। कमेटी ने सलाह दी कि झंडे को केवल एक ही रंग का बनाया जाए। कमेटी का ये सुझाव नहीं माना गया। इसी साल कांग्रेस ने पिंगली वेंकैया के बनाए झंडे को पार्टी के आधिकारिक झंडे के तौर पर मान्यता दी।

आजादी के बाद संविधान समिति ने कांग्रेस के इसी झंडे को कुछ बदलावों के साथ भारत देश का झंडा बनाने का फैसला लिया। इस झंडे में एक बड़ा बदलाव चरखे को लेकर था। झंडे के बीच में जो चरखा था, उसकी जगह अशोक चक्र लगाया गया। इस झंडे को पहली बार 22 जुलाई 1947 के दिन आधिकारिक तौर पर फहराया गया।

आजादी के बाद भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश बन चुका था। लिहाजा झंडे के रंगों की धर्म के आधार पर व्याख्या को बदला गया। कहा गया कि इस झंडे के रंगों का धर्मों से कोई लेना-देना नहीं है। सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इस झंडे के रंगों को लेकर कहा कि “केसरिया रंग त्याग या उदासीनता को दर्शाता है। हमारे नेताओं को भौतिक लाभ के प्रति उदासीन होना चाहिए और अपने काम के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए। झंडे के बीच में सफेद रंग एक प्रकाश है, जो हमारे आचरण के मार्गदर्शन के लिए सत्य का रास्ता है। हरा रंग मिट्टी और पर्यावरण से हमारे संबंध को दर्शाता है। झंडे के बीच में अशोक चक्र धर्म के नियम का पहिया है। इस झंडे के तले काम करने वाले लोगों का सिद्धांत सत्य होना चाहिए। साथ ही ये गति का प्रतीक भी है। गति ही जीवन है और ठहराव मृत्यु है। भारत को बदलाव का विरोध नहीं करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए।"

उसके बाद से अब तक भारत के झंडे में कोई बदलाव नहीं हुआ। हालांकि भारत के नागरिकों को राष्ट्रीय पर्व के अलावा किसी भी दिन अपने घर और दुकानों में झंडा फहराने की छूट नहीं थी। 2002 में इंडियन फ्लैग कोड में बदलाव किए गए। आज हर भारतीय नागरिक किसी भी दिन अपने घर, दुकान, फैक्ट्री, ऑफिस में सम्मान के साथ झंडा फहरा सकता है।

1929: मिकी माउस को मिली थी आवाज

आज ही के दिन साल 1929 में बच्चों के पसंदीदा कार्टून मिकी माउस को आवाज मिली थी। डिज्नी ने कार्निवाल किड नाम से कार्टून रिलीज किया था जिसमें मिकी माउस ने अपना पहला शब्द ‘हॉट डॉग’ बोला था। इसी के साथ मिकी माउस दुनिया का पहला बोलता हुआ कार्टून कैरेक्टर बन गया। मिकी की इस आवाज के पीछे ओरिजनल आवाज कार्ल स्टर्लिंग की थी।

1928 में आई मिकी माउस की पहली फिल्म स्टीमबोट विली।
1928 में आई मिकी माउस की पहली फिल्म स्टीमबोट विली।

दर्शकों ने मिकी माउस को सबसे पहले 1928 में आई फिल्म ‘स्टीमबोट विली’ में देखा था। कहा जाता है कि मिकी माउस बनाने का आइडिया वॉल्ट डिज्नी को काम करने के दौरान अपनी डेस्क के पास घूम रहे एक चूहे को देखकर आया था। तब मिकी माउस केवल हंसता या सीटी बजाता था। आज मिकी माउस इतना फेमस है कि लोग डिज्नी को मिकी माउस से ही जानते हैं। 130 से भी ज्यादा फिल्मों में ये कार्टून कैरेक्टर नजर आ चुका है।

आज वर्ल्ड नो टोबैको डे

आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस है। तंबाकू के इस्तेमाल से होने वाली स्वास्थ्य परेशानियों के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल आज ही के दिन इसे मनाया जाता है। 1987 में पहली बार WHO के सदस्य देशों ने इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। WHO ने एक प्रस्ताव पास कर 7 अप्रैल 1988 के दिन को वर्ल्ड नो स्मोकिंग डे के तौर पर मनाने की घोषणा की। इसी साल एक और प्रस्ताव पास कर हर साल 31 मई को वर्ल्ड नो टोबैको डे मनाने की घोषणा की गई। उसके बाद से ही हर साल 31 मई को दुनियाभर में इस दिन को मनाया जाता है। हर साल इस दिन को मनाने के लिए अलग-अलग थीम निर्धारित की जाती है। इस साल की थीम है ‘Quit tobacco to be a winner’ यानी ‘जीतने के लिए तंबाकू छोड़ें’।

31 मई के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…

2017: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को प्रेफरेंशियल ट्रेडिंग लिस्ट से हटाया।

2012: भारत में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के विरोध में देशव्यापी हड़ताल की गई।

1962: एडोल्फ आइकमन को इजराइल ने फांसी पर लटकाया। आइकमन ने हजारों यहूदियों की हत्या की थी।

फोटो 15 दिसंबर 1961 का है। बाईं तरफ बने ग्लास बूथ में एडोल्फ आइकमन खड़ा है। इसी दिन आइकमन को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
फोटो 15 दिसंबर 1961 का है। बाईं तरफ बने ग्लास बूथ में एडोल्फ आइकमन खड़ा है। इसी दिन आइकमन को फांसी की सजा सुनाई गई थी।

1961: दक्षिण अफ्रीका स्वतंत्र देश बना।

1959: बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को तिब्बत से निर्वासन के बाद भारत में शरण दी गई।

1935: पाकिस्तान के क्वेटा शहर में भीषण भूकंप से 50 हजार से अधिक लोगों की मौत।

1927: कार निर्माता कंपनी फोर्ड ने अपनी प्रसिद्ध कार मॉडल T के उत्पादन पर रोक लगाई।

1907: अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में पहली बार टैक्सी सेवा शुरू की गई।

1725: होलकर वंश की रानी अहिल्याबाई होलकर का जन्म हुआ।