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कांग्रेस / जयराम रमेश बोले- पार्टी को अस्तित्व बचाने के लिए नए सिरे से कोशिश करना होगी, यह हार कोरोनावायरस की तरह, जिसका कोई इलाज नहीं

कांग्रेस नेता जयराम नरेश ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। -फाइल कांग्रेस नेता जयराम नरेश ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। -फाइल
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कांग्रेस नेता जयराम नरेश ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। -फाइलकांग्रेस नेता जयराम नरेश ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। -फाइल

  • जयराम रमेश ने कहा- छह साल सत्ता से दूर रहने के बाद भी हममें से कुछ लोग ऐसा बर्ताव कर रहे हैं कि वे मंत्री हों
  • ‘हमें अहंकार छोड़ना होगा, हमें खुद का आकलन करने की जरूरत, अगर यह नहीं हुआ तो कोई मतलब नहीं रहेगा’

दैनिक भास्कर

Feb 13, 2020, 08:15 PM IST

कोच्चि. कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने गुरुवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव में हुई कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के काम करने के तरीके को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कोच्चि में आयोजित पुस्तक मेले में कहा- कांग्रेस नेताओं काे खुद में नयापन लाना होगा। अगर पार्टी को अपना अस्तित्व बचाना है तो इसे नए सिरे से कोशिश करना होगी। सांसद रमेश ने कहा- कांग्रेस की हार कोरोनावायरस जैसी हो गई है, जिसका कोई इलाज नहीं है। हमें अपना अहंकार छोड़ना होगा। छह साल सत्ता से दूर रहने के बाद भी हममें से कुछ लोग ऐसा बर्ताव कर रहे हैं कि वे मंत्री हों।

उन्होंने कहा- हमें खुद का आकलन करने की जरूरत है। अगर जल्द यह नहीं हुआ तो हमारा कोई मतलब नहीं रह जाएगा। वैसे जयराम नरेश से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे, शर्मिष्ठा मुखर्जी जैसे नेता पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं।

स्थानीय नेताओं का हौसला बढ़ाना चाहिए: जयराम

उन्होंने कहा- पार्टी में स्थानीय नेताओं का हौसला बढ़ाना चाहिए। उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। उन्हें संगठन में काम करने की आजादी दी जानी चाहिए। हमारे नेतृत्व के काम करने की स्टाइल बदलनी चाहिए। भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में शाहीन बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे विरोध का इस्तेमाल वोटों को बांटने के लिए किया। हालांकि, भाजपा नहीं जीती लेकिन कांग्रेस के नतीजे भी अच्छे नहीं रहे। कांग्रेस के लिए यह हार कोरोनावायरस की तरह है, जिसका कोई इलाज नहीं मिल रहा।

सांप्रदायिकता पर पार्टी अलग-अलग नजरिया नहीं रख सकती: जयराम

उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता पर पार्टी अलग-अलग नजरिया नहीं रख सकती। यह समझा जाना चिंताजनक है कि कांग्रेस अल्पसंख्यक संप्रदायवाद पर नरम है। कांग्रेस को पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया (पीएफआई) और जमात-ए- इस्लामी जैसे संगठनों पर एक जैसा रुख रखना चाहिए। ये संगठन भी उतने ही खतरनाक हैं, जितना कि आरएसएस। संप्रदाय और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशों को सख्ती से रोकने की जरूरत है।

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