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निर्भया केस / दोषियों को अलग-अलग फांसी की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस भानुमति बेहोश हुईं, बेंच ने कार्यवाही स्थगित की

Nirbhaya Rapists Death Warrant | Nirbhaya Gangrape Case Convict Vinay Sharma Death Penalty Mercy Petition Supreme Court Hearing Latest News and Updates On Delhi Gang Rape And Murder Case
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Nirbhaya Rapists Death Warrant | Nirbhaya Gangrape Case Convict Vinay Sharma Death Penalty Mercy Petition Supreme Court Hearing Latest News and Updates On Delhi Gang Rape And Murder Case

  • सु्प्रीम कोर्ट की जस्टिस भानुमति की तबियत खराब है और वे दवाइयां ले रही हैं, सुनवाई के वक्त भी उन्हें तेज बुखार था 
  • कोर्ट ने दया याचिका पर राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ दोषी विनय की पिटीशन खारिज की, मनोरोगी होने का दावा भी नकारा
  • मुकेश, विनय, अक्षय के सभी कानूनी विकल्प खत्म, केवल पवन के पास क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका का विकल्प बाकी
  • निर्भया के माता-पिता और केंद्र ने ट्रायल कोर्ट में नया डेथ वॉरंट जारी करने की याचिका लगाई, सुनवाई 17 फरवरी को होगी

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 05:42 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिका पर राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देने वाली दोषी विनय शर्मा की पिटीशन खारिज कर कर दी। इसके बाद, निर्भया के दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की केंद्र की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस आर भानुमति बेहोश हो गईं। डायस पर बैठे अन्य जज और स्टाफ की मदद से उन्हें तुरंत उनके चेंबर में ले जाया गया। इसके बाद सुनवाई स्थगित करते हुए बेंच ने कहा कि इस पर आदेश बाद में जारी किया जाएगा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “जस्टिस आर. भानुमति को तेज बुखार था। उनका बुखार अब भी बना हुआ है। चैंबर में डॉक्टरों ने उनकी जांच की। दलीलें सुनते वक्त भी उनकी तबियत खराब थी और वे दवाइयां ले रही थीं।” इलाज के बाद जस्टिस भानुमति को होश आ गया।

राष्ट्पति के फैसले के खिलाफ दोषी विनय की याचिका खारिज

इससे पहले, दोषी विनय शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने कहा- राष्ट्रपति ने विनय की याचिका खारिज करने से पहले उसकी मेडिकल रिपोर्ट समेत सभी पहलुओं और दस्तावेजों का अध्ययन किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने विनय के मनोरोगी होने के दावे को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा- दोषी की सामान्य मेडिकल कंडीशन दिखाती है कि वह मानसिक रूप से सामान्य है।

निर्भया की मां बोलीं- हम उम्मीद खो रहे

निर्भया के दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की मांग को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों को नोटिस जारी कर शुक्रवार दो बजे तक जवाब मांगा था। गुरुवार को डेथ वॉरंट में देरी पर निर्भया के माता-पिता ने कहा था- ट्रायल कोर्ट डेथ वॉरंट जारी करने के मूड में नहीं है। अब हम अपनी उम्मीद खो रहे हैं।

कोर्ट ने दोषी पवन को नया वकील दिया
ट्रायल कोर्ट ने निर्भया केस में दोषी पवन गुप्ता के लिए गुरुवार को वकील नियुक्त किया। पवन ने डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (डीएलएसए) द्वारा मुहैया कराए गए वकील की सेवाएं लेने से इनकार कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पवन की ओर से लीगल प्रक्रिया में देरी की जा रही है। मुकेश, अक्षय, विनय अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर चुके हैं। केवल पवन ही ऐसा है, जिसके पास अभी क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका का विकल्प बाकी है।

पवन ने कोर्ट से कहा था- उसने अपने पुराने वकील को हटा दिया है और नए वकील के लिए उसे वक्त की जरूरत है। कोर्ट निर्भया के परिजन और दिल्ली सरकार की उस याचिका पर भी सुनवाई कर रही थी, जिसमें दोषियों की फांसी के लिए नया डेथ वॉरंट जारी करने की मांग की गई है। इस मामले पर अदालत 17 जनवरी को सुनवाई करेगी।

डेथ वॉरंट के लिए ट्रायल कोर्ट जाएं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषियों के लिए नया डेथ वॉरंट जारी करने के लिए ट्रायल कोर्ट जाने की मंजूरी दी थी। इसके बाद केंद्र और निर्भया के परिजन ने ट्रायल कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। ट्रायल कोर्ट ने केंद्र और निर्भया के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की थी।

कोर्ट हमारे अधिकारों के बारे में नहीं सोच रहा: आशा देवी

निर्भया के माता-पिता ने चारों दोषियों की फांसी में देरी होने पर गुरुवार को ट्रायल कोर्ट के बाहर प्रदर्शन किया। दोषियों के खिलाफ नए वॉरंट की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई सोमवार तक स्थगित कर दी गई। इसके बाद कोर्ट के बाहर प्रदर्शन किया गया। निर्भया की मां आशा देवी ने ट्रायल कोर्ट के बाहर कहा- ‘‘हमारे भी कुछ अधिकार हैं, लेकिन हमारा कानून केवल दोषियों के अधिकारों के बारे में सोच रहा है। मैं सुप्रीम कोर्ट से अपील करती हूं कि वह डेथ वॉरंट जारी करे। क्योंकि यह कोर्ट (ट्रायल) जारी करने के मूड में नहीं है।’’ बुधवार को आशा देवी ने ट्रायल कोर्ट में कहा था कि मामले को 7 साल हो चुके हैं। मैं आपके सामने हाथ जोड़ती हूं, कृपया डेथ वॉरंट जारी कर दीजिए।

दोषी आखिरी सांस तक कानूनी मदद का हकदार- कोर्ट

ट्रायल कोर्ट ने 12 फरवरी को सुनवाई में कहा था, "भले ही आसमान गिर जाए, न्याय होना चाहिए। इस अदालत की यह राय है कि दोषी अपनी आखिरी सांस तक कानूनी मदद का हकदार है। दोषी के वकील की बात सुने बिना इस याचिका (केंद्र और निर्भया के माता-पिता) पर विचार करना आगे की सुनवाई को अनावश्यक और दिखावटी प्रक्रिया में बदल देगा।"

सबसे पहले निर्भया के दोषियों की फांसी की तारीख 22 जनवरी तय की गई थी। इसे 17 जनवरी को आगे बढ़ा दिया गया और अगला डेथ वॉरंट 1 फरवरी का जारी किया गया। ट्रायल कोर्ट ने 31 जनवरी को अगले आदेश तक इस पर रोक लगा दी थी। 11 फरवरी को तिहाड़ जेल ने ट्रायल कोर्ट में एक स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल की थी। इसमें प्रशासन ने कहा था कि मुकेश, पवन, विनय और अक्षय द्वारा बीते सात दिनों में किसी भी लीगल ऑप्शन को तवज्जो नहीं दी गई है।

हाईकोर्ट ने अलग-अलग फांसी देने की मांग खारिज की थी

दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 फरवरी को कहा था- निर्भया के चारों दुष्कर्मियों को अलग-अलग फांसी नहीं दी जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि दोषी को 7 दिन में अपने सभी कानूनी विकल्प पूरे करने होंगे। हालांकि, अब तक दोषी पवन ने क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका का इस्तेमाल नहीं किया है। 31 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के चारों दोषियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।

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