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सस्ती हुई बच्चों की वैक्सीन:840 से कम होकर 400 रुपए की हुई कोर्बेवैक्स वैक्सीन; सरकारी सेंटर्स पर फ्री है

एक महीने पहले

बच्चों को दी जाने वाली कॉर्बेवैक्स वैक्सीन की कीमत कम कर दी गई है। वैक्सीन बनाने वाली कंपनी बायोलॉजिकल ई लिमिटेड ने इसकी कीमत 840 से घटाकर 250 रुपए की हे, लेकिन सारे टैक्स मिलाकर प्राइवेट सेंटर्स पर ये वैक्सीन 400 रुपए में मिलेगी। पहले ये प्राइवेट सेंटर्स पर 990 की मिलती थी। हालांकि, सरकार के वैक्सीनेशन अभियान के तहत स्कूलों में ये वैक्सीन फ्री दी जा रही है।

12 से 14 के बच्चों के लिए कॉर्बेवैक्स वैक्सीन हुई यूज
इस साल 15 मार्च में जब भारत में 12 से 14 साल के बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू हुआ था। तब कॉर्बेवैक्स वैक्सीन का ही इस्तेमाल किया गया। उस समय कंपनी ने सरकार के लिए इसकी कुल कीमत 145 रुपए तय की थी।

बच्चों को सुरक्षित रखना है उद्देश्य
कपंनी ने कहा कि वैक्सीन की कीमत कम करने के साथ हमारा उद्देश्य इसे और ज्यादा किफायती बनाना है। इसके साथ ही बच्चों मे वायरस ज्यादा ना फैले और उन्हें सुरक्षित रखने में मदद करे। वहीं, अप्रैल में ड्रग रेगुलेटर ने 6 से 12 साल के बच्चों के लिए भारत बायोटेक के कोवैक्सिन के साथ-साथ 5 से 12 साल के बच्चों के लिए बायोलॉजिकल ई के कॉर्बेवैक्स को इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन को मंजूरी दी थी। हालांकि, कंपनी के मुताबिक मंजूरी से पहले उन्होंने 5-12 और 12-18 उम्र के 624 बच्चों में परीक्षण किए थे।

28 दिनों के गैप में लेनी होती है दूसरी डोज
कॉर्बेवैक्स कॉर्बेवैक्स वैक्सीन की दो डोज दी जाती है। जिसे 28 दिनों के गैप में लेना होता है। यानी वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद दूसरी डोज 28 दिन के बाद ली जाती है। ये पहली ऐसी वैक्सीन है, जिसे 5 साल के बच्चों को लगाने के लिए भी मंजूरी दी गई है। सरकारी सेंटर्स पर ये वैक्सीन फ्री है।

प्रोटीन सब यूनिट वैक्सीन है कॉर्बेवैक्स
कॉर्बेवैक्स भारत की पहली स्वदेशी रीकॉम्बिनेंट प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन है। यानी, इस वैक्सीन में पूरे वायरस का इस्तेमाल करने की जगह केवल एक हिस्से का उपयोग किया गया है। इस हिस्से का नाम है स्पाइक प्रोटीन। इस प्रोटीन के जरिए ही कोरोना वायरस इंसान के शरीर में प्रवेश करता है।

जानकारी के मुताबिक, सिर्फ स्पाइक प्रोटीन को शरीर में इंजेक्ट किया जाए तो यह खतरनाक साबित नहीं होता। नतीजतन, हमारा इम्यून सिस्टम इस प्रोटीन को पहचानकर एंटीबॉडीज विकसित कर लेता है, जो भविष्य में कोरोना संक्रमण होने पर वायरस से लड़ने में हमारी मदद करती हैं।