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औरंगाबाद में लापरवाही भारी पड़ी:विदर्भ स्ट्रेन से महाराष्ट्र में कोरोना केस तेजी से बढ़े; प्रशासन का फोकस इंजेक्शन-ऑक्सीजन तक सीमित

औरंगाबाद2 महीने पहलेलेखक: विनोद यादव

संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र में भास्कर की टीम उन 5 शहरों के जमीनी हालत जान रही है, जहां हालात बदतर हैं। पुणे और नासिक के बाद आज औरंगाबाद की रिपोर्ट पढ़िए, जहां संक्रमण से होने वाली मौतों की दर देश से भी कहीं ज्यादा हो गई है। यहां मृत्यु दर 1.33% है, जबकि महाराष्ट्र में ये दर 1.73% और देश में 1.27% है। जानिए क्या हैं औरंगाबाद के जमीनी हालात...

लापरवाही की वजह से केस और नए स्ट्रेन से मौतें बढ़ीं
भास्कर ने उल्कानगरी में आर्मी की हेल्थ सर्विस के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सतीश ढगे से बात की। डॉ. ढगे पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट भी हैं। वो बताते हैं कि अभी जो विदर्भ स्ट्रेन चर्चा में है, वही औरंगाबाद में मरीजों के बढ़ने की वजह है। डेढ़ साल में कोरोना वायरस में 4 हजार से ज्यादा बार बदलाव हुआ। इसमें से कुछ ही मौतों के बढ़ने की वजह हैं। दुर्भाग्य से विदर्भ स्ट्रेन भी उनमें से एक है।

इसे डबल म्यूटेटेड स्ट्रेन भी कहते हैं, जिसमें दो बार जेनेटिक बदलाव हुए हैं। डॉ. ढगे के मुताबिक, सुपर स्प्रेडिंग इवेंट्स, खतरनाक नए कोरोना वायरस और रिलैक्सेशन की वजह से लोगों की आवाजाही बढ़ने की वजह से भी औरंगाबाद सहित अन्य जिलों में कोरोना के केस बढ़े हैं।

क्राइसेस मैनेजमेंट, विशेषज्ञता और महारत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो एक्सपर्ट की सलाह ली जाए। स्थानीय प्रशासन को इनपुट लेने चाहिए। पिछले डेढ़ साल से यहां एडमिनिस्ट्रेशन फेल है।

रोकथाम के कदम उठाने में एडमिनस्ट्रेशन फेल
डॉ. ढगे का कहना है कि मृत्यु दर बढ़ने पर एडमिनिस्ट्रेशन की दलील है कि लोग अस्पताल आने में देरी कर रहे हैं और ज्यादातर मृतकों की उम्र 50-60 साल से ऊपर है। सवाल है कि लोग देरी से आ रहे हैं तो कमी किसकी? ये एडमिनिस्ट्रेशन की विफलता है।

क्राइसिस मैनेजमेंट का मतलब सिर्फ अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई करना और रेमडेसिविर का इंजेक्शन देना नहीं है। लोकल एडमिनिस्ट्रेशन संक्रमण के रोकथाम के कदम उठाने में विफल रहा। लोगों में जागरूकता और जरूरी पब्लिक हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट में भी कमी रही।

दो कहानियां, जो बताती हैं कोरोना को लेकर लोग क्या सोचते हैं

स्थान: सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक, शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल (औरंगाबाद)
समय: शाम करीब 7.30 बजे

औरंगाबाद के घाटी स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को फिलहाल पूरी तरह से कोविड सेंटर में तब्दील किया गया है। देर शाम जब दैनिक भास्कर की टीम वहां पहुंची तो हमने देखा कि अस्पताल की बाउंड्री से सटे एक छोटे से मैदान में 20-25 मोटरसाइकिल खड़ी है। कुछ लोग वहां खड़े भी हैं। 10-12 महिलाएं जमीन पर बैठी हुई थीं।

इन सभी लोगों के परिजन पॉजिटिव हैं जो इसी अस्पताल में भर्ती हैं। अपनी तकलीफ छोड़कर ये परिजन के ठीक होने की आस में यहां पिछले कई दिनों से इसी तरह गुजारा कर रहे हैं। हमने इन लोगों से बात की और जाना कि वो कोरोना को लेकर क्या सोचते हैं..

पहली कहानी: लोगों की नासमझी भी महामारी बढ़ने की वजह
प्रमिला जाधव स्कूल टीचर हैं। वह औरंगाबाद के जय भवानी नगर में रहती हैं। उनकी 55 साल की मां ​​​लताबाई जाधव कोरोना पॉजिटिव हैं। प्रमिला अपनी मां की जरूरतों के लिए अस्पताल के बाहर ही रहती हैं। रात को उनके मामा यहां आकर रुकते हैं। उनकी मां के अलावा भाई और भतीजा भी पॉजिटिव हैं।

जाधव ने बताया कि औरंगाबाद में कोरोना के मामलों में वृद्धि के लिए हम लोग खुद जिम्मेदार हैं। कोरोना टेस्ट को लेकर कई लोगों में भ्रम की स्थिति है। बुजुर्गों को लगता है कि नाक से सैंपल देने की प्रक्रिया दर्दनाक है। इस भ्रम से अधिकांश बुजुर्ग टेस्ट कराने से घबराते हैं। मेरी मां को भी टेस्टिंग का डर था। उसे लगा कि यदि वह पॉजिटिव निकली तो उसे 8-10 दिन परिवार से दूर रहना पड़ेगा। इसमें हमारी भी लापरवाही है कि हम अपने बुजुर्गों को महामारी से होने वाला नुकसान नहीं समझा पाएं।

प्रमिला बताती हैं कि औरंगाबाद के लोगों में टेस्टिंग को लेकर अजीब सी नासमझी है। उनका मानना है कि पॉजिटिव पाए गए तो घर से बाहर रहना पड़ेगा। यदि अस्पताल में भर्ती होना पड़ा तो शायद घर लौटना भी नसीब न हो। अधिकांश लोग कोरोना के लक्षण दिखाई देने के बावजूद टेस्टिंग नहीं कराते हैं। इतना ही नहीं, दूसरों को संक्रमित करने के बाद जब उनकी हालत गंभीर हो जाती है तब डॉक्टर के पास जाते हैं। इसी नासमझी ने महामारी को बढ़ाया है।

दूसरी कहानी: प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है, लोग संक्रमण फैला रहे
गजानन अरविंदराव जोशी कहते हैं कि मेरी मां पुष्पा जोशी (60) अस्पताल में भर्ती है। हम दोनों का टेस्ट किया गया था। मेरा निगेटिव आया। मैंने शुरुआत में दो-तीन प्राइवेट अस्पताल में मां को एडमिट कराने की कोशिश की, लेकिन जब वहां बेड नहीं मिला तो सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया। औरंगाबाद में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है। लोग कोरोना फैला रहे हैं।

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