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राजस्थान के गांवों से ग्राउंड रिपोर्ट:तीन तरफ से मध्य प्रदेश से घिरे गांवों में घुसा कोरोना; दुकानों पर आटे-दाल की तरह 150 रुपए में बिक रहा पेट्रोल

24 दिन पहले
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मध्यप्रदेश बॉर्डर पर बसे राजस्थान के गांवों पर कोरोना की दूसरी लहर का काफी असर पड़ा है। यहां से मध्यप्रदेश में आवाजाही के कारण कोरोना के मामले बढ़ गए थे। यहां जरूरी काम से आने-जाने वालों को महंगे दाम पर पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है।

वहीं, कुछ ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जो कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए खुद को कोरोना से बचाए हुए है। पढ़ें, राजस्थान के गांवों से ग्राउंड रिपोर्ट...

1. रतलाम, जावरा और मंदसौर से घिरे गांव
- झालावाड़ से अजय कुमार और यशोवर्धन शर्मा की
रिपोर्ट

झालावाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में सप्ताह भर पहले तक कोरोना से हालात बेहद खराब थे। वजह थी मध्यप्रदेश से तीन तरफ से लगी बॉर्डर। एक तरफ कोरोना हॉटस्पॉट रतलाम, दूसरी तरफ जावरा तो तीसरी तरफ मंदसौर।

यहां बड़ी संख्या में लोगों की रिश्तेदारी, लेनदेन, कारोबार इन्हीं क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसी कारण यहां बॉर्डर से लगते हुए गंगरार उपखंड के बड़े कस्बे चौमहला में हालात बहुत मुश्किल रहे।

सरवर जैसे गांव में 10 मई को केवल 17 घरों की बस्ती में ही एक साथ चार लोगों की कोरोना से मौत हो गई। उप प्रधान सोनिका जैन, संतोष जैन, गोपाल सिंह, रोरमल जैन, अभय कुमार, शंभू सिंह, मुकेश जैन बताते हैं कि जब लोग बीमार थे, तब हेल्थ डिपार्टमेंट से सैंपल लेने और दवाई देने की गुहार लगाते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

यहां कोरोना ने 15 अप्रैल से ही अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। तब 11 लोगों के सैंपल लिए गए, इनमें से 9 एक साथ पॉजिटिव मिले। इसके बाद हेल्थ डिपार्टमेंट ने अगले दिन आकर सैंपल लेने की बात कही, लेकिन कोई नहीं आया। 10 मई को एक साथ चार लोगों की कोरोना से मौत हुई तो 11 मई को फिर से सैंपल लेने पहुंचे।

रामपुरा ग्राम पंचायत के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं। यहां भी कोरोना जैसे लक्षण से कई लोगों की जान गई है। सरपंच वीरेंद्र सिंह, शंभू सिंह, शिवराज सिंह, पूर्व जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि यहां का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल एक आयुर्वेद डॉक्टर के भरोसे है। लोगों ने करीब डेढ़ महीने तक कोरोना का कहर देखा है। अब जनप्रतिनिधियों के साथ लोग खुद भी काफी हद तक जागरूक हो चुके हैं। बाहर आना-जाना बंद कर चुके हैं। मध्य प्रदेश तो लगभग भूल ही गए हैं। ऐसे में अब हालात कुछ हद तक ठीक हो रहे हैं।

ब्लैक में बिक रहा पेट्रोल
यहां के ग्रामीण क्षेत्रों में खास तौर पर मलारगंज, चिश्ती पूरा, बर्डिया बीरजी, बेड़ला के रास्तों पर पेट्रोल खुलेआम ब्लैक में बिक रहा है। कहीं प्रति लीटर के 125 तो कहीं 150 रुपए प्रति लीटर तक लिए जा रहे हैं।

इसके पीछे जो वजह बताई जा रही है वह यह है कि पेट्रोल पंप सुबह 11:00 बजे के बाद बंद रहते हैं। दूसरी बड़ी वजह यह भी है कि यहीं से मध्यप्रदेश की सीमा में आने-जाने के लिए कई रास्ते भी हैं। ऐसे में आवाजाही ज्यादा है। इन लोगों को पेट्रोल भी यहीं से मुहैया होता है। भास्कर टीम ने यहां खुद 140 प्रति लीटर रुपए में पेट्रोल खरीदा।

कुमठिया के सरपंच ने खुद के घर से की पहल
कुमठिया ग्राम पंचायत के सरपंच केसर सिंह जैसे कई अच्छे उदाहरण भी मौजूद हैं। इन्होंने अपने खुद के गांव खाखरी को अब तक कोरोना से पूरी तरह बचाए रखा है। उन्होंने कोरोना के तहत जारी गाइडलाइन जैसे मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग को सबसे पहले अपने घर से ही लागू किया। देखते-देखते 1000 से ज्यादा की आबादी के इस गांव में यह प्रोटोकॉल घर-घर में अपनाया जाने लगा।

सरपंच के भाइयों के घर आसपास ही मौजूद हैं। भाई की तबीयत खराब हुई तो उन्होंने घर जाकर हाल-चाल पूछने की बजाय फोन से ही स्वास्थ्य पूछा। अन्य लोगों को भी यही सलाह देते रहे कि गांव में आप लोगों के घर आसपास ही हैं। अगर एक दूसरे को देखना है तो छत से बात कर लो और फोन लगा लो। केसर सिंह कहते हैं कि लोगों के लिए उदाहरण बनना है तो हमें खुद के घर से शुरुआत करनी चाहिए।

2. डॉक्टर घर-घर जाकर मदद कर रहे
- सीकर से यादवेंद्र सिंह राठौड़ की
रिपोर्ट

कोरोना को हराने के लिए डाॅक्टर-नर्सिंगकर्मी किस तरह दिन-रात जुटे हुए हैं, इसकी एक तस्वीर सीकर में देखने को मिलती है। यहां चिराणा गांव के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के प्रभारी डाॅ. श्याम प्रताप सिंह शेखावत, डाॅ. सागरमल बाजिया और डाॅ. महेश कुमावत ने लाेगाें के घर-घर जाकर जांच करने के साथ ही उन्हें मेडिकल किट दी है। स्लाेगन और पेंटिंग्स बनवाकर लाेगाें काे जागरूक किया है।

डाॅ. श्याम प्रताप सिंह कहते हैं कि पहले दिन जब वैक्सीन आई ताे इस इलाके में सबसे ज्यादा 410 लाेगाें काे वैक्सीन लगवाई। ग्रामीणों से जुड़ाव हाेने के चलते ही मैं पहले ही दिन सबसे ज्यादा वैक्सीन लगवाने में सफल हुआ, जबकि उस दाैर में लाेग वैक्सीन लगवाने से भी डर रहे थे।

सरपंच राजेंद्रसिंह चिराणा कहते हैं कि लोगों काे जागरूक करने के लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने चैकिंग प्वाइंट्स और बैरिकेडिंग की जगहों पर जाकर समझाया।

अपने काॅलेज में खाेला काेविड सेंटर, सारी सुविधाएं मुफ्त
अलसीसर ग्राम पंचायत में रामलाल शिक्षण संस्थान के निदेशक मनफूलसिंह ने अपने काॅलेज में 30 बेड का काेविड केयर सेंटर खाेल रखा है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, खाना, इलाज सहित सभी सुविधाएं मुफ्त दी जा रही हैं। वाॅलिंटियर्स की टीम भी तैयार की है, जाे यहां काम कर रही है। पिछले साल भी काॅलेज में क्वारैंटाइन सेंटर बनाया गया था।

लोहार्गल में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर राेक
लोहार्गल तीर्थस्थल में सूर्य मंदिर के महंत अवधेशाचार्य, सरपंच जगमाेहनसिंह शेखावत ने अस्थि कुंड में अस्थियां विसर्जित करने और मुख्य कुंड में स्नान करने पर राेक लगाई है। पिछले 10 दिन से बाहर से आ रहे श्रद्धालुओं काे गणेश मंदिर के पास ही चैकपाेस्ट बनाकर राेका जा रहा है। इसके लिए पुलिस और हाेमगार्ड के साथ चार-चार गांव के युवा पहरा दे रहे हैं।

सख्ती की ताे छापाेली में मृत्यु घटी, चार दिन से एक भी माैत नहीं
छापाेली गांव में सरपंच प्रतिनिधि रामलाल सैनी ने जनता कर्फ्यू लगा रखा है। गांव में कुल 26 लाेगाें की मौत हाे गई है। इनमें से कोराेना से 5 मौतें हुई हैं। अन्य में लक्षण थे। 3 मई के बाद गांव में लगातार मौतें हो रही थीं। सख्ती के चलते 18 मई के बाद से मौतें नहीं हुईं। गांव में पुलिसकर्मी तैनात हैं।

पूर्व सैनिकाें ने संभाली गांव की कमान
गुढ़ागाैड़जी गांव में सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियाें ने एक टीम बनाई। वे गांव में घर से बाहर निकलने वाले लाेगाें को समझा रहे हैं। बात नहीं मानने और नियम ताेड़ने वाले लाेगाें के साथ सख्ती से पेश आ रहे हैं।