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दिल्ली/रोम/तेहरान. दुनियाभर में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 5000 के पार चली गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना का क्रेंद अब यूरोप है। यहां इटली में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। वहीं ईरान में भी संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। इस सबके बीच डॉक्टरों के संघर्ष की कहानियां भी सामने आने लगी हैं। उधर भारत की पहली कोरोनावायरस मरीज अब पूरी तरह ठीक हो चुकी है।
इटली से ग्राउंड रिपोर्ट-
पिछले हफ्ते लॉम्बार्डी के छोटे से शहर बर्गामो के मेयर जॉर्जियो गोरी ने ट्वीट किया, ‘आईसीयू इतने ज्यादा भर चुके हैं कि जिन मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है, उन्हें मरने छोड़ दे रहे हैं।’ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को उन मरीजों को छोड़ने कहा जा रहा है जिनके बचने की उम्मीद कम है। इटली के सबसे समृद्ध शहरों में से एक मिलान के रेलवे स्टेशनों पर भीड़ है। ज्यादातर लोग दक्षिण इटली जाने के लिए ट्रेन पकड़ने पहुंचे हैं क्योंकि मिलान में यहां के बहुत से लोग रहते हैं। सरकार के तमाम प्रयासों के बीच यह तथ्य बना हुआ है कि उत्तरी इटली में 1.4 करोड़ लोग लॉकडाउन में फंसे हुए हैं। लेकिन हजारों लोग अपने साथ वायरस लेकर वहां से चले भी गए हैं। दक्षिणी क्षेत्रों के कई गवर्नर उत्तर से आने वाले ऐसे लोगों को वहां आने पर पाबंदी लगाने की बात कह रहे हैं। अब तो पूरा इटली ही बंद किया जा चुका है।
कंसर्ट्स, गेम्स, प्रार्थना सभाएं, सब रद्द
एक शहर के मेयर ने शिकायत की है कि डॉक्टरों पर बुजुर्गों का इलाज न करने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसी गाइडलाइन्स आ रही हैं, जिनमें कहा गया है, ‘आईसीयू में पहले उन्हें रखो, जिनके बचने की संभावना ज्यादा है या जिनकी उम्र कम है।’ मास्क पहने हुए एक नर्स की थककर बैठ जाने की तस्वीर वायरल हो रही है, जो बताती है कि मेडिकल स्टाफ कितने दबाव में है। सबवे (मेट्रो), जिम, सिनेमा, स्कूल, यूनिवर्सिटी, सब बंद हैं। कंसर्ट्स, गेम्स, प्रार्थना सभाएं, सब रद्द हैं।
होटलों की 90% बुकिंग्स कैंसिल
होटल मालिक शिकायत कर रहे हैं कि उनकी 90% बुकिंग्स कैंसिल हो गई हैं। पिछले शनिवार को लॉम्बार्डी के आईसीयू प्रमुख एंटोनियो पेसेंती को कहा कि उनका अनुमान है, 26 मार्च तक वहां 18 हजार लोग बीमार हो चुके होंगे। इस बीच यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने खबर दी है कि लॉकडाउन की वजह से इटली के कई इलाकों में प्रदूषण कम हो गया है। सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में लगी हुई है। सरकार ने 8.4 अरब डॉलर खर्च करने की घोषणा की है। जिन पैरेंट्स के बच्चे स्कूल जाते हैं उन्हें बेबीसिटिंग वाउचर्स दिए जाएंगे, ताकि वे घरपर बच्चों की देखभाल कर सकें। मेडिकल इक्विपमेंट पर बड़ा खर्च किया जा रहा है।
सुपरमार्केट और दवाओं की दुकान छोड़कर सारे बिजनेस बंद
छोटे शहरों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं है। पाविया नाम के शहर में 75 हजार लोग रहते हैं। यहां रहने वाले गणित इतिहासकार रिकार्डो रोसो मास्क पहनकर लोगों को प्रोबेबिलिटी का सिद्धांत समझा रहे हैं। वे कहते हैं, ‘फिलहाल जितना सामाजिक संपर्क रखेंगे, बीमार होने की आशंका उतनी ज्यादा बढ़ेगी।’ इटली की भी यही रणनीति लग रही है। सुपरमार्केट और दवाओं की दुकान छोड़कर सारे बिजनेस बंद कर दिए गए हैं। पाविया के एक अस्पताल के आईसीयू में 38 वर्षीय एक व्यक्ति का इलाज चल रहा है, जिसे लॉम्बार्डी क्षेत्र में वायरस फैलाने का जिम्मेदार माना गया है। ( टिम पार्क्स, बेप्पी सेवरजिनिनी, जैसन होरोविट्ज की रिपोर्ट)
ईरान से ग्राउंड रिरोर्ट
23 नेता संक्रमित, कई डॉक्टरों व नर्सों की भी मौत
कोरोनावायरस के फैलने के बाद इन दिनों ईरान की राजधानी में भयानक खामोशी है। ईरान में तीन हफ्ते पहले, तेहरान से 150 किमी दूर क़ूम में कोरोना का पहला मामला सामने आया था, जहां दो बुजुर्गों में यह पाया गया था। क़ूम ईरान के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में से एक हैं। यहां से कोरोना तेहरान समेत कई शहरों में फैल गया। पिछले तीन हफ्तों में तेहरान में कोरोनावायरस के सबसे ज्यादा, 4000 मामले सामने आ चुके हैं। स्थिति को देखते हुए ईरान में लोगों के एक शहर से दूसरे शहर जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। सभी यूनिवर्सिटी बंद कर दी गई हैं और लोगों से घर पर ही रहने को कहा जा रहा है। शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि संक्रमित लोगों की संख्या 11,364 तक पहुंच चुकी है और मरने वालों की संख्या 514 हो गई है। संक्रमितों में 23 ईरानी नेता भी शामिल हैं।

मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा वायरस को रोकने के लिए की जा रही तमाम कोशिशों के बावजूद इस हफ्ते मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले तीन दिनों में ही करीब 213 मौत हो चुकी हैं। इसमें 85 तो शुक्रवार को ही हुईं, जो एक दिन में हुई सबसे ज्यादा मौत हैं। एक तरफ तेहरान और क़ूम समेत सभी बड़े शहरों में भय और अनिश्चितता का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ लोग हिम्मत भी दिखा रहे हैं। तेहरान के डॉक्टर हैदर अमिनी कहते हैं, ‘यह बड़ा स्वास्थ्य संकट है, आपातकाल की स्थिति है लेकिन इसके आगे झुकने का कोई कारण नहीं है।’
उपराष्ट्पति मसोमेह इब्तेकर भी क्वारंटाइन में
इस संघर्ष में डॉक्टर्स और नर्स का सबसे ज्यादा योगदान है। ये बढ़ते कोरोना के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर इलाज में लगे हुए हैं। इनमें से कुछ ने संक्रमित होकर अपनी जान भी गंवाई है। ईरान के गिलन की 25 वर्षीय नर्गिस ख़ानालिज़ादेह कोरोनावायरस से जान गंवाने वाली पहली नर्स थी। प्रोटेक्टिव सूट और सर्जिकल मास्क के साथ उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। उपराष्ट्पति मसोमेह इब्तेकर भी क्वारंटाइन में थे और वे अब ठीक होकर काम पर लौट आए हैं।
कई मरीज ठीक हुए
कोरोनावायरस पर एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करने के एक दिन बाद उप स्वास्थ्य मंत्री ईराज हारिरची भी संक्रमित हो गए और अभी भी क्वारंटाइन में हैं। कई और मरीज भी अब ठीक हो चुके हैं। ऐसे ही एक मरीज अली अबिदी कहते हैं कि वे अब पूरी तरह ठीक हो गए हैं। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर अली कहते हैं, ‘यह मेरे और परिवार के लिए भयानक अनुभव था। क्वारंटाइन पीरियड के दौरान मुझे बहुत अजीब ख्याल आते थे। अब घर आकर अच्छा लग रहा है।’
ज्यादा हो सकती है संक्रमित लोगों की संख्या: स्थानीय लोग
कई लोग कोरोनावायरस से ग्रसित लोगों की संख्या और भी ज्यादा होने की आशंका जता रहे हैं। क़ूम में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अमिर्रेज़ा फल्लाही कहते हैं, ‘ईरान में कोरोनावायरस की स्थित कितनी भयावह है, इसे लेकर स्पष्टता नहीं है। जहां इससे वैश्विक मृत्यु दर 2 फीसदी है, वहीं ईरान में यह दर 4 फीसदी से ज्यादा है, जो की चिंता का विषय है।’ ईरान के विदेश मंत्री जावाद ज़रीफ़ ने भी माना है कि आधुनिक इक्विपमेंट और मेडीकल सप्लाई की कमी की वजह से कोरोनावायरस के लड़ना मुश्किल हो रहा है। इसके लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाई गई पाबंदियों को जिम्मेदार बताया है। इस बावत उन्होंने यूएन प्रमुख को चिट्ठी भी लिखी है।
घर में रहने की आदत डाल रहे लोग
इस बीच ईरानी घर में बंद रहने के अपने नए जीवन की आदत डाल रहे हैं। कुछ के लिए यह चुनौतीपूर्ण है तो कुछ इसे परिवार के साथ समय बिताने के मौके की तरह देख रहे हैँ। बिजनेसमैन और फुटबॉल के शौकीन अर्श रहिमी कहते हैं, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतने दिन घर बैठना पड़ेगा, दोस्तों से, फुटबॉल से दूर रहना पड़ेगा। लेकिन यह परिवार और बच्चों के साथ समय बिताने का भी अच्छा मौका है।’ (तेहरान से सैयद ज़फ़र मेहदी)
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