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राज्यों की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट नाराज:कोरोना से मौत पर मुआवजा न दिए जाने पर बिहार, आंध्र और केरल को फटकारा, कहा- आप कानून से ऊपर नहीं

7 महीने पहले

कोरोना से मौत पर परिवार वालों को मुआवजा न देने और इसमें देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से नाराजगी जाहिर की है। आंध्र प्रदेश और बिहार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई और कहा कि आप कानून से ऊपर नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने बुधवार को ही दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश भी दिया।

पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई भी राज्य मुआवजे के लिए इनकार नहीं कर सकता है। साथ ही आदेश दिया था कि एप्लिकेशन दाखिल किए जाने के 30 दिन के भीतर पैसा दे दिया जाना चाहिए।

मुआवजे पर कोर्ट ने कीं 3 तल्ख टिप्पणियां

1. आंध्र प्रदेश बिल्कुल गंभीर नहीं
जस्टिस एमआर शाह ने कहा, "मुआवजा देने के आदेश पहले ही दिए गए। समय दिया गया और फिर निर्देश जारी किए गए। इसके बावजूद यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आंध्र प्रदेश की तरफ से इस पर बहुत बेरुखी दिखाई गई। ऐसा लगता है कि यह राज्य इस कोर्ट के आदेशों का पालन करने को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। मुआवजा न दिए जाने का कोई कारण भी नहीं बताया है।"

2. चीफ सेक्रेटरी जिम्मेदार, अब कोर्ट में आकर जवाब दें

कोर्ट ने कहा, "हमारे आदेश के बाद आंध्र में मुआवजे के लिए 36 हजार एप्लीकेशन फाइल की गई हैं। इनमें से 31 हजार वैलिड भी हैं, लेकिन अभी तक केवल 11 हजार को ही मुआवजा दिया गया है। अगर योग्य कैंडिडेट को मुआवजा नहीं दिया जाता है, तो इसे कोर्ट के आदेश की अवहेलना माना जाएगा। इसके लिए चीफ सेक्रेटरी जिम्मेदार हैं। चीफ सेक्रेटरी अदालत में आएं और बताएं कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।"

3. बिहार ने तो मौतों का आंकड़ा ही अपडेट नहीं किया

कोर्ट ने कोरोना से मौतों के आंकड़े पर बिहार को बुरी तरह फटकार लगाई। अदालत ने कहा, "आपने तो अभी तक डेटा भी अपडेट नहीं किया है। आपके मुताबिक अभी केवल 12 हजार की मौत हुई है। हमें वास्तविक आंकड़े चाहिए। हमने जब पहले आदेश दिया था, उसके बाद से दूसरे राज्यों के आंकड़े बढ़ गए हैं। अपने चीफ सेक्रेटरी को बुलाइए। हम यह मानने को तैयार नहीं हैं कि अभी केवल 12 हजार की मौत हुई।"

एप्लीकेशन और मौतों के अंतर पर भी फटकारा

जस्टिस संजीव शर्मा ने राज्यों को मुआवजे की एप्लीकेशन और मौतों की संख्या के अंतर को लेकर फटकारा। अदालत ने कहा कि अगर मौतों और मुआवजे की एप्लीकेशन के बीच इतना ज्यादा अंतर बना रहता है, तो हम जिला स्तर पर कानूनी अधिकारियों की तैनाती करने को मजबूर हो जाएंगे ताकि मुआवजे का सही बंटवारा हो। क्या इस अंतर का मतलब यह है कि लोग मुआवजे के लिए ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं? क्या हमें पैरालीगल वॉलंटियर सिस्टम रखना होगा।

उन्होंने कहा कि गुजरात में 10,174 मौतें दर्ज हैं और दावे 91 हजार हैं। केरल में मौतों का आंकड़ा 51 हजार है और एप्लीकेशन केवल 27 हजार आई हैं। हरियाणा ने हमें बताया कि 7,360 एप्लीकेशन आई हैं और मौतें वहां 10 हजार हुई हैं।

जस्टिस शर्मा ने केरल से पूछा कि क्या आपको केवल 27 हजार एप्लीकेशन मिली हैं? दूसरे राज्यों में तो मौतों से ज्यादा एप्लीकेशन आई हैं। आपके यहां ट्रेंड उल्टा क्यों है? आपके पास तो मौतों का पूरा ब्योरा है। आपके अधिकारी परिवारों के पास जाएं और उन्हें मुआवजे के बारे में बताएं। ये लोग रजिस्टर्ड हैं और इन्हें मुआवजा मिलना चाहिए।

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