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2021 में उम्मीदों की सबसे सुंदर तस्वीर:वैज्ञानिकों ने बनाया हू-ब-हू कोरोना जैसा पार्टिकल; ये महामारी फैलाएगा नहीं, उसे मार देगा

3 महीने पहले

आखिर 2020 विदा हो ही गया। पूरी दुनिया 2021 को उम्मीदों भरी निगाहों से ताक रही है। सबसे बड़ी आस कोरोना वैक्सीन से है। और हो भी क्यों न। आखिर पूरा 2020 कोरोना को झेलते ही तो बीता है।

(2021 इस सदी के लिए उम्मीदों का सबसे बड़ा साल है। वजह- जिस कोरोना ने देश के एक करोड़ से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में लिया, उसी से बचाने वाली वैक्सीन से नए साल की शुरुआत होगी। इसलिए 2021 के माथे पर यह उम्मीदों का टीका है।)

दुनियाभर के लोग पूरे साल जानलेवा कोरोनावायरस की लाल तस्वीर देखते रहे। वैज्ञानिकों ने इसे Severe Acute Respiratory Syndrome Coronavirus-2 यानी SARS-CoV-2 नाम दिया है। तो आइये नए साल के पहले दिन देखते हैं उस अनोखे पार्टिकल की तस्वीर जो हू-ब-हू कोरोनावायरस की तरह दिखता है। इसके चारों ओर भी कोरोनावायरस की तरह स्पाइक्स हैं। लेकिन, यह एकदम उलटा काम करता है। यह कोरोना फैलाता नहीं, बल्कि उसके वायरस को मारता चलता है।

यह तस्वीर है- कोरोना के VLP (Virus like particle) यानी कोरोनावायरस जैसे पार्टिकल की। इसे प्रकृति ने नहीं बल्कि कोरोना की काट तलाश रहे वैज्ञानिकों ने बनाया है।

वायरस लाइक पार्टिकल (VLP) की तस्वीर वैज्ञानिकों ने कंप्यूटराइज्ड 3डी तकनीक से तैयार की है। कोरोना वायरस से अलग दिखाने के लिए इसका रंग हरा रखा गया है।
वायरस लाइक पार्टिकल (VLP) की तस्वीर वैज्ञानिकों ने कंप्यूटराइज्ड 3डी तकनीक से तैयार की है। कोरोना वायरस से अलग दिखाने के लिए इसका रंग हरा रखा गया है।

कहते हैं न कि दुश्मन को मारने के लिए उसके जैसे वेष में ही उसकी सेना में घुस जाओ। ठीक उसी अंदाज में VLP को भी हू-ब-हू कोरोनावायरस की तरह प्रोटीन से बनाया गया है। इन पार्टिकल्स से दुनिया भर में कोरोना की कई वैक्सीन तैयार की जा रही हैं। इनमें कई वैक्सीन्स के क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं।

माइक्रोस्कोप से ऐसा दिखता है VLP, एकदम कोरोनावायरस की तरह

कनाडा की फार्मा कंपनी मेडिकागो की ओर से जारी VLP की तस्वीर।
कनाडा की फार्मा कंपनी मेडिकागो की ओर से जारी VLP की तस्वीर।
पहली तस्वीर कोरोना वायरस की है और दूसरी उसकी तरह दिखने वाले VLP की।
पहली तस्वीर कोरोना वायरस की है और दूसरी उसकी तरह दिखने वाले VLP की।

VLP को शरीर कोरोना वायरस समझेगा और उन्हें मारने की ताकत जुटा लेगा

आइडिया यह है कि वैक्सीन के जरिए जैसे ही VLP इंसानी शरीर में पहुंचेंगे तो वह धोखा खा जाएगा। हमारे शरीर को लगेगा कि कोरोनावायरस आ गया है और वह इसे मारने के लिए अपनी प्रतिरोधक तंत्र को सक्रिय कर देगा।

हमारे शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज बनना शुरू हो जाएंगी। वह भी इतनी तादाद में कि कई महीनों या साल तक अगर हमारे शरीर का सामना असली कोरोनावायरस से होता है तो पहले से तैयार एंटीबॉडीज उसे मार देंगे।

इस वैक्सीन से कोरोना होने का कोई डर नहीं
दूसरी तकनीकों से बनने वाली कई वैक्सीन्स की तरह इन पार्टिकल से बनने वाली वैक्सीन से कोरोना होने का बिल्कुल भी डर नहीं। दरअसल, इनमें किसी भी वायरस की जान, यानी जेनेटिक मेटेरियल ही नहीं है। यह पार्टिकल्स कोरोनावायरस की तरह होने के बावजूद अपनी संख्या बढ़ा नहीं सकते।

कनाडा की कंपनी पौधों से बनाई सस्ती वैक्सीन, भारत में भी कवायद
दुनिया की कई कंपनियां इस नई टेक्नोलॉजी से वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। अब तक स्तनधारियों से लिए गए प्रोटीन के जरिए यह पार्टिकल बनाए जा रहे थे, लेकिन कनाडा की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Medicago ने मात्र 20 दिनों में पौधों के प्रोटीन से कोरोना के VLP बना लिए हैं।

कंपनी का दावा है इस टेक्नोलॉजी से तैयार वैक्सीन बेहद सस्ती, कम समय और कम जगह में तैयार होगी। कंपनी ने इस आधार पर कोरोना वैक्सीन विकसित कर ट्रायल जुलाई में ट्रायल शुरू किए। इस तकनीक से वैक्सीन तैयार करने में एंटीजन की बेहद कम मात्रा में जरूरत होती है। ऐसे में कम खर्च में वैक्सीन से ज्यादा डोज तैयार की जा सकती हैं।

भारत में हैदराबाद की जीनोम वैली में स्थित फार्मा कंपनी बायोलाजिकल E ने VLP आधारित कोरोना वैक्सीन तैयार की है। जिसके phase-1 और phase-2 के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं।

पौधों को बायो-रिएक्टर बनाकर तैयार होता है वैक्सीन का कच्चा माल
परंपरागत रूप से वैक्सीन के लिए एंटीजन बनाने के लिए जीवित वायरस को मारकर विभाजित किया जाता है। इसके लिए भारी संख्या में वायरस की जरूरत होती है। इसके काम में आमतौर पर मुर्गी के चूजों के भ्रूण या निषेचित अंडों को बायो-रिएक्टर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। मतलब अनुकूल वातावरण बनाकर इनमें ही भारी संख्या में वायरस पैदा किए जाते हैं।

जबकि, VLP वाली वैक्सीन में वायरस जैसे पार्टिकल्स को भारी संख्या में बनाने के लिए पौधों को बायो-रिएक्टर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह वैक्सीन बनाने का कच्चा माल यानी एंटीजन न केवल कम समय में बल्कि बेहद कम लागत से तैयार हो जाता है। इससे वैक्सीन भी सस्ती और तेजी से तैयार की जा सकती है।

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