पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करें
दिल्ली/लेह. देश में कोरोनावायरस के अब तक 99 मामलों की पुष्टि हुई है। केंद्र सरकार ने कोरोनावायरस को अधिसूचित आपदा घोषित कर दिया है। 13 राज्यों में कोरोना का संक्रमण फैल चुका है। इससे देश में दो मौतें हुई हैं। वहीं, लेह के एक गांव में 3 मरीज मिलने के बाद पूरे गांव को सील कर दिया गया। यहां 28 दिनों से 3 हजार लोग फंसे हुए हैं। साथ ही नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में संक्रमित मरीजों इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि इलाज के दौरान10 घंटे विशेष ड्रेस में रहने से दम घुटता है।
ग्राउंड रिपोर्ट- लेह के 28 दिन से सील कुशहाट गोंगमा गांव से:
लेह से रिनचेन एंगमो चुमिकाचन. लद्दाख में लेह जिले का कुशहाट गोंगमा गांव 28 दिन से सील है। किसी को गांव के अंदर या बाहर जाने की इजाजत नहीं। इसी गांव से कोराेना वायरस के 3 केस मिले हैं। इनमें से दो मरीज हाल ही में ईरान से लौटे हैं और एक इनके परिवार का सदस्य है। तीनों का इलाज लेह के एसएनएम अस्पताल में चल रहा है। 3 हजार की आबादी वाला कुशहाट गोंगमा लेह से 13 किमी दूर है। गांव से बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री ईरान गए थे। इनमें से 102 को दाे जत्थों में भारत लाया गया है। कमिश्नर सेक्रेट्री रिग्जिन संपेल ने बताया कि गांव पर नजर रखने के लिए तहसीलदार, बीएमओ और पुलिस इंचार्ज की समिति बनाई गई है। गांव को चार सेक्टर में बांटा गया है। हर सेक्टर के लिए एक आशा कार्यकर्ता, एक एएनएम और एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है। काेराना संभावितों की राेज जांच की जा रही है। जिला प्रशासन गांव के लोगों को जरूरी खाने-पीने के सामान पहुंचा रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट- वायरस से बेखौफ इलाज में जुटे डॉक्टर:
नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल से पवन कुमार. कोरोनावायरस के मरीजों के इलाज में लगे डाॅक्टर कहते हैं कि उन्हाेंने इससे खतरनाक वायरस से पीड़ित मरीजों का इलाज किया है। कोरोना के इलाज में डर नहीं लगता। लेकिन इस बीमारी को लेकर इतना पैनिक कर दिया गया है, जिससे घरवाले घबराते हैं। हालांकि, यह वायरस उतना खतरनाक नहीं है, जितना इबोला, निपाह और ट्यूबरकुलोसिस जैसी बीमारियों में आमतौर पर होता है।

पीपीई पहनकर न तो कुछ खा न ही पी सकते हैं
राम मनोहर लोहिया अस्पताल में शुक्रवार तक दो मरीज भर्ती थे। महिला मरीज की मौत के बाद उनके बेटे को सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। यहां तैनात एक डॉक्टर ने कहा कि कोरोनावायरस इतनी तेजी से फैलता है कि मरीज के वार्ड में रहने के दौरान पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) पहने रखना पड़ता है। पीपीई सिर से पैर तक पूरी तरह ढंकता है। लगातार 8-10 घंटे पीपीई पहनने के कारण दम घुटने लगता है। पीपीई की कमी के चलते एक दिन में एक डॉक्टर को एक ही किट दी जाती है। पीपीई पहनकर न तो कुछ खा-पी सकते हैं और न ही फोन पर बात कर सकते हैं। मरीज की हालत ठीक नहीं होने पर डॉक्टर को 16 घंटे भी ड्यूटी करनी पड़ सकती है। डॉक्टर कहते हैं कि इलाज के लिहाज से कोई चुनौती नहीं है। कोरोना पेशेंट के वार्ड में रहने के दौरान एहतियात बरतनी पड़ती है। घर जाने के बाद डॉक्टर सामान्य तरीके से घर-परिवार के साथ रहते हैं और खाते-पीते भी हैं।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.