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कोरोना पर राजनीति:ममता बनर्जी के खिलाफ भाजपा का अनोखा प्रदर्शन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए धरने पर बैठे कई बड़े नेता

कोलकाता/इंदौर2 वर्ष पहले
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इंदौर स्थित अपने आवास पर पोस्टर और बैनर के साथ ममता बनर्जी के खिलाफ धरने पर बैठे। यूट्यूब के जरिए इसका लाइव प्रसारण भी हुआ।
  • केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय समेत कई नेता इसमें शामिल हुए
  • कैलाश विजयवर्गीय ने पोस्टर-बैनर भी लगाया, ममता बनर्जी पर आरोप- संक्रमितों की संख्या छिपा रही है बंगाल सरकार

कोरोनाकाल के बीच केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच तनातनी बढ़ती ही जा रही है। एक दूसरे पर जुबानी जंग के साथ अब भाजपा नेताओं ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन शुरू कर दिया है। केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय समेत कई बड़े नेता रविवार को ममता बनर्जी के खिलाफ अपने-अपने घरों में धरने पर बैठ गए। सभी एक दूसरे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। कैलाश विजयवर्गीय ने तो अपने घर में ही ममता बनर्जी के खिलाफ पोस्टर-बैनर भी लगा रखा है। 

आरोप- ममता सच छिपा रहीं हैं
कैलाश विजयवर्गीय ने ममता बनर्जी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। कहा, ‘‘आज दो घंटे के बीजेपी के धरने का मकसद कोरोना की आड़ में ममता सरकार की राजनीति की तरफ जनता का ध्यान आकर्षित करना है। वह मरीजों के आंकड़े छिपा रही हैं। केंद्र सरकार की ओर से गरीबों के लिए भेजे गए मुफ्त राशन के बंटवारे में भी भ्रष्टाचार कर रहीं हैं।’’

केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, सांसद स्वपन दास गुप्ता नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर धरने पर बैठे।
केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, सांसद स्वपन दास गुप्ता नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर धरने पर बैठे।

केंद्रीय टीम पर भी विवाद हुआ
केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण से उपजे हालात का जायजा लेने के लिए इंटर-मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीम (आईएमसीटी) भेजी थी। ममता सरकार इससे नाराज है। शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि आईएमसीटी राज्य में राजनीति करने आई थी, इसके अलावा उसके पास कोई काम नहीं था। भाजपा की तरफ से इस पर केंद्रीय राज्य मंत्री देबश्री चौधरी ने पलटवार किया। कहा- ममता संक्रमण की गंभीरता को नजरअंदाज कर रहीं हैं। सच्चाई छिपा रही हैं। सच सामने आया तो बौखलाने लगीं।

आईएमसीटी ने कई गंभीर सवालों के जवाब मांगे
शुक्रवार को आईएमसीटी ने निरीक्षण के बाद बंगाल के मुख्य सचिव से कई गंभीर सवालों के जवाब मांगे। मुख्य सचिव से पूछा गया कि राज्य में मौतें कोरोना से हुई हैं, यह बात तय करने के लिए डॉक्टरों की कमेटी ने किस प्रणाली का इस्तेमाल किया। जो भी प्रणाली इस्तेमाल की गई, क्या वह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईएमसीआर) की गाइडलाइन के हिसाब से सही है। आईएमसीटी ने यह भी कहा- कोलकाता में टेस्ट नतीजों के लिए कुछ मरीजों को 5 दिन से भी ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। आपको रोजाना 2500 से 5000 तक टेस्ट करने चाहिए। आईएमसीटी के मुताबिक, राज्य सरकार को 4 पत्र लिखे जा चुके हैं। लेकिन, वहां से अब तक कोविड-19 अस्पतालों, क्वारैंटाइन सेंटर और कंटेनमेंट जोन की सटीक जानकारी नहीं दी गई।