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मध्यप्रदेश के गांवों से ग्राउंड रिपोर्ट:कोरोना से डर नहीं लगता, वैक्सीन से लगता है; महिलाएं इसलिए टीका नहीं लगवा रहीं कि बुखार आया तो खाना कौन बनाएगा?

एक महीने पहले

मध्यप्रदेश के गांवों में वैक्सीनेशन को लेकर फैली अफवाहों की वजह से लोग टीका लगवाने से बच रहे हैं। यहां लोगों से बात करने पर पता चला कि कोरोना के डर पर वैक्सीन का डर हावी है। शनिवार को भास्कर टीम इंदौर और सागर जिले के गांवों में पहुंची, तो इस तरह की बात सामने आईं। सिर्फ एक गांव ऐसा मिला, जहां 90% बुजुर्गों का वैक्सीनेशन हो चुका था। पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट...

1. पहले डाेज के बाद सरपंच के पिता की मौत हुई तो लोग सहम गए
- इंदौर जिले के गांवों से राजेंद्र दुबे और शरद गुप्ता की रिपोर्ट

इंदौर से 47 किमी दूर बड़कुआं गांव। दोपहर ढाई बजे यहां सन्नाटा था। ज्यादातर लोग घरों में थे। कुछ लोग बाहर दिखे, लेकिन किसी के चेहरे पर मास्क नहीं दिखा। यह गांव राजपुराकुटी ग्राम पंचायत में आता है। दोनों गांव में 20 दिन पहले तक रोज पॉजिटिव मिल रहे थे। अब तक 68 लोग पॉजिटिव हो चुके हैं। इनमें से 2 की मौत हो गई।

सरपंच सुशील पाटीदार का परिवार संक्रमित हो गया। पिता की मौत हो गई। सरपंच के फेफड़ों का सीटी स्कोर 23 (सीटी स्कैन में गंभीरता बताने वाला स्कोर) तक पहुंच गया, लेकिन वैक्सीन का पहला डोज लगने की वजह से उनकी जान बच गई। पिता को भी वैक्सीन का पहला डोज लग चुका था, लेकिन जान नहीं बची। इनके अलावा एक महिला की भी मौत हुई।

गांव वाले कोरोना नहीं, वैक्सीन को मौत की वजह मान रहे हैं। इसलिए सरपंच के पिता की मौत के बाद यहां किसी ने वैक्सीन नहीं लगवाई। उनकी मौत 5 मई को हुई। तब तक ग्राम पंचायत के 3600 में से 500 लोग वैक्सीन लगवा चुके थे।

गांव में घर के बाहर बैठे किशन लाल बोले- अब पहले सरपंच से पूछेंगे कि टीके से मरेंगे तो नहीं? इसके बाद लगवाएंगे। जानकी बाई ने तो वैक्सीन लगवाने से साफ इनकार कर दिया। बोलीं- हम तो ठीक हैं, फिर टीका क्यों लगवाएं?

भास्कर टीम जब सरपंच के घर पहुंची तो वे होम क्वारैंटाइन थे। गैलरी पर खड़े होकर बात की। कहा- गांव वालों की मदद से लॉकडाउन लगाया है। कचरा गाड़ी के लाउड स्पीकर से कोरोना गाइडलाइन का पालन करने और वैक्सीन लगाने की अपील की। गांव में कोविड केयर सेंटर भी बनवाया है, जहां पिछले सप्ताह तक लोगों का इलाज किया। अब यहां केवल 4 पॉजिटिव हैं।

इंदौर जिले में शादी पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन गांवों में शादियां हो रही हैं। फोटो मानपुर से सटे गिट्‌टीफोड़ा गांव की है।
इंदौर जिले में शादी पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन गांवों में शादियां हो रही हैं। फोटो मानपुर से सटे गिट्‌टीफोड़ा गांव की है।

आदिवासी गांवों में भी पहुंचा कोरोना, कोई सावधानी नहीं
इंदाैर जिले के मानपुर क्षेत्र में 99 आदिवासी गांव हैं। इनमें 5 गांव ऐसे हैं, जहां कोरोना की स्थिति गंभीर है। दोपहर 12 बजे खुर्दा गांव में बाजार पूरी तरह खुला था, लोग बगैर मास्क के थे। यहां अब तक 8 पॉजिटिव मिल चुके हैं। यहीं हाल खुर्दी में है। यहां मई के 14 दिनों में 2 पॉजिटिव मिले, बाकी घर में भी सर्दी-खांसी के मरीज हैं, लेकिन वे जांच नहीं करा रहे।

सबसे गंभीर हालत जाफराबाद की है, यहां अब तक 24 मरीज मिल चुके हैं। गांव के गौरीशंकर ओसारी बताते हैं कि यहां टीकाकरण के लिए लोग आगे नहीं आ रहे। कांकरिया गांव में 23 संक्रमित मिलने के बावजूद गांव में कोरोना को लेकर कोई सावधानी नहीं बरती जा रही।

संक्रमण से बचने के लिए गांव से बनाई दूरी, खेत में ही बसेराये हैं रामलाल मीणा। संक्रमण से बचने के लिए इन्होंने अपने गांव बिचौली से ही दूरी बना ली। बिचौली की आबादी 1600 है। पिछले एक महीने में 50 पॉजिटिव मिले तो रामलाल ने एक किमी दूर अपने खेत में पेड़ के नीचे ही अपना बसेरा बना लिया। वे अब यहीं रहते हैं। बोले- केवल 20-20 मिनट के लिए भोजन करने ही घर जाता हूं। बाकी पूरे समय यहीं रहता हूं।

बिचौली गांव में पिछले कई दिनों से रामलाल का ठिकाना खेत ही है।
बिचौली गांव में पिछले कई दिनों से रामलाल का ठिकाना खेत ही है।

2. वैक्सीन के बाद बुखार का डर
- सागर जिले के गांवों से श्रीकांत त्रिपाठी और विक्रांत गुप्ता की रिपोर्ट

18 साल से ज्यादा उम्र के युवा वैक्सीन के लिए स्लॉट मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सागर से 50 किमी दूर रहली तहसील का एक गांव ऐसा भी है, जहां अफवाह से पैदा हुए डर के कारण महिलाएं और युवा भी टीका नहीं लगवा रहे हैं। यह गांव है छिरारी।

गांव के डब्बू नाहर बताते हैं कि हमारे यहां कोई महिला टीका नहीं लगवा रही। एक महीने पहले यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का टीकाकरण शुरू हुआ था। इस दौरान 452 बुजुर्गों ने पहला डोज भी लगवाया, लेकिन इसके बाद गांव में तीन बुजुर्ग महिलाओं की मौत हो गई। अफवाह ऐसी फैली कि उन्हें टीका लगवाने के बाद तेज बुखार आया था, इसलिए उन्होंने दम तोड़ दिया।

इस घटना को 15 दिन बीत जाने के बाद भी लोगों का भ्रम दूर नहीं हुआ है। बाद में वैक्सीनेशन करने वाली हेल्थ वर्कर ही संक्रमित निकली और वैक्सीन की कमी के चलते गांव का टीकाकरण केंद्र भी बंद करना पड़ा। अब गांव में यदि किसी को टीका लगवाना है तो उसे 10 किमी दूर रहली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ेगा।

सागर जिले के छिरारी में हेल्थ वर्कर पॉजिटिव हुई तो वैक्सीनेशन सेंटर ही बंद कर दिया गया।
सागर जिले के छिरारी में हेल्थ वर्कर पॉजिटिव हुई तो वैक्सीनेशन सेंटर ही बंद कर दिया गया।

गांव के शोभाराम पटेल कहते हैं कि टीके के बाद आने वाले बुखार से महिलाएं डर रही हैं। उन्हें खाना बनाने से लेकर घर के कामकाज की भी चिंता है, इसलिए टीका नहीं लगवा रहीं। स्थिति यह है कि छिरारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े 16 गांवों में रहने वाले 22 हजार लोगों में से अब तक 535 ने ही टीका लगवाया है, जबकि इसी क्षेत्र के अन्य गांवों को मिलाकर अब तक कुल 26 हजार 400 लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इनमें छिरारी का एक भी युवा शामिल नहीं है। यहां केवल एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, जहां ताला लटका है।

एक गांव ऐसा, जहां 90 फीसदी बुजुर्गों का टीकाकरण, इसलिए एक भी मौत नहीं
गौरझामर के गुगवारा गांव की तस्वीर अलग है। यहां सरपंच और रोजगार सहायक ने मिलकर बुजुर्गों को गाड़ी की सुविधा दी और 60 साल से ज्यादा 311 लोगों में से 295 यानी 90 फीसदी का टीकाकरण कराया।

यहां 45 साल से ज्यादा उम्र के भी 80 फीसदी लोग वैक्सीन लगवा चुके हैं। वहीं, जनता कर्फ्यू के कारण 3400 की आबादी वाले गुगवारा में अभी तक एक भी पॉजिटिव नहीं मिला और न ही कोई मौत हुई।

छिरारी समेत करीब 160 गांवों के वैक्सीनेशन, कोरोना की जांच और इलाज का जिम्मा रहली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर है। यहां अन्य सभी प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं। रहली के बस स्टैंड स्थित एक प्राइवेट क्लीनिक पर मरीजों की लाइन लगी हुई थी। यहां सरकारी अस्पताल के कोविड इंचार्ज डॉ. बसंत नेमा मरीजों का इलाज करते मिले।

यहां से हम उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो वहां डॉ. राजपूत ने डॉ. बसंत नेमा को फोन कर तुरंत अस्पताल बुलाया। डॉ. नेमा यहां पहुंचे तो पूछने पर बोले- मेरी ड्यूटी सिर्फ ऑन कॉल होती है। दरअसल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर फ्लू ओपीडी का काउंटर खाली पड़ा था, क्योंकि अस्पताल के डॉक्टर अपने क्लीनिक पर थे। इसलिए भीड़ भी वहीं थी।

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