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कोरोना की पहली आयुर्वेदिक दवा / कोरोनिल और श्वासारि की बिक्री पर अब रोक नहीं, लेकिन कुछ सवालों के जवाब अब भी बाकी

कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवा के रिसर्च और लाइसेंस पर सवाल उठे थे। (फाइल फोटो) कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवा के रिसर्च और लाइसेंस पर सवाल उठे थे। (फाइल फोटो)
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कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवा के रिसर्च और लाइसेंस पर सवाल उठे थे। (फाइल फोटो)कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवा के रिसर्च और लाइसेंस पर सवाल उठे थे। (फाइल फोटो)

  • पतंजलि ने 23 जून को दवाएं लॉन्च कीं, 5 घंटे बाद सरकार ने प्रचार पर रोक लगा दी
  • 7 दिन बाद रामदेव फिर सामने आए, कहा- आयुष मंत्रालय से अब असहमति नहीं

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:04 PM IST

हरिद्वार. योग गुरु रामदेव की पतंजलि कंपनी ने कोरोना की पहली आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल को एक किट के रूप में 23 जून को लॉन्च किया। इसे कोरोना के मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल के बाद लॉन्च करने का दावा किया गया। लेकिन, आपत्तियां उठीं तो आयुष मंत्रालय ने 5 घंटे बाद ही दवा के प्रचार पर रोक लगा दी। 7 दिन बाद यानी आज रामदेव फिर मीडिया के सामने आए और कहा कि उनकी दवाओं पर अब कोई प्रतिबंध नहीं है और आज से पूरे देश में मिलेंगी। रामदेव की कोरोना किट से जुड़ी पूरी जानकारी को सवाल-जवाबों में समझिए-

पतंजलि की किट में क्या है?
इसमें तीन दवाएं कोरोनिल टैबलेट, श्वासारि वटी और अणु तेल हैं। रामदेव का दावा है कि कोरोनिल में गिलोय, तुलसी और अश्वगंधा हैं जो इम्युनिटी बढ़ाते हैं। शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने पर श्वासारि देने से फायदा होता है। यह दवा सर्दी, खांसी, जुकाम को भी एक साथ डील करती है। अणुतेल नाक में डालना होता है। तीनों को साथ इस्तेमाल करने से कोरोना का संक्रमण खत्म हो सकता है और महामारी से बचाव भी संभव है।

विवाद क्या था?
केंद्र सरकार ने पतंजलि से कहा कि उसके दावे के फैक्ट की जानकारी नहीं है। दवा पर की गई रिसर्च की जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध करवाए और जांच पूरी होने तक इसका प्रचार नहीं करे। राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों ने भी आपत्ति जताई।

रामदेव ने अब क्या कहा?
क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल के सभी डॉक्यूमेंट्स आयुष मंत्रालय को उपलब्ध करवा दिए हैं। मंत्रालय ने यह माना है कि कोविड-19 के मैनेजमेंट के लिए पतंजलि ने सही तरीके से काम किया है। अब दोनों के बीच कोई असहमति नहीं है। पूरे देश में हमारी दवाएं बिकेंगी। हम राज्यों से भी बात कर चुके हैं।

क्या पतंजलि की दवाओं से कोरोना का इलाज संभव है?
रामदेव का कहना है कि 15 साल से 65 साल तक के 95 लोगों जिनमें एसिम्प्टोमैटिक और माइल्ड टू मॉडरेट मरीज शामिल थे, उन पर क्लीनिकल ट्रायल किया। इनमें से 45 मरीजों को पतंजलि की दवाएं दी गईं। इनसे 3 दिन में 67% और 7 दिन में 100% मरीज कोरोना पॉजिटिव से निगेटिव हो गए।

आयुष मंत्रालय ने पतंजलि को क्या हिदायत दी है?
रामदेव ने कहा है कि मंत्रालय ने क्योर शब्द का इस्तेमाल करने से मना किया है। इसलिए हम अपनी दवाओं को कोविड मैनेजमेंट के तौर पर पेश करेंगे। हमें शब्दों के मायाजाल में नहीं पड़ना।

क्या पतंजलि की दवाओं के साइड इफेक्ट हैं?
पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हमारी दवाओं के कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं।

इन 4 सवालों के जवाब नहीं मिले-
1.
क्या सरकार ने कोरोना मरीजों के लिए पतंजलि की दवाओं के इस्तेमाल की मंजूरी दी है?
2. इन दवाओं के इस्तेमाल से कोई मरीज ठीक नहीं हुआ तो क्या होगा?
3. 15 साल से कम और 65 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों पर ये दवाएं कितनी कारगर हैं?
4. जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है वे कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवाएं ले सकते हैं या नहीं?

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