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रेलवे से मुआवजा नहीं मिलने पर कोर्ट का आदेश, ट्रेन का इंजन और कलेक्टरेट की गाड़ी जब्त कर लो

4 वर्ष पहले
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  • 20 साल पहले रेलवे की एक परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था
  • अफसरों ने कहा- हमने राज्य सरकार को मुआवजे की राशि दे दी

कांचीपुरम (तमिलनाडु).  रेलवे की एक परियोजना के लिए जमीन के अधिग्रहण का लोगों को मुआवजा नहीं मिलने पर यहां की एक स्थानीय अदालत ने ट्रेन का इंजन और कलेक्टरेट के दो वाहनों को जब्त करने का आदेश दिया। निचली अदालत के आदेश को पूरा करने के लिए उसके अफसर याचिकाकर्ताओं के साथ शुक्रवार को रेलवे जंक्शन पहुंचे। तिरुपति-पुडुचेरी फास्ट पैसेंजर ट्रेन के इंजन को अपने कब्जे में लेने की कोशिश भी की।

 

1999 का है मामला 
दरअसल, करीब 20 साल पहले रेलवे की एक परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन उसका मुआवजा अब तक नहीं दिया गया है। यहां की स्थानीय निवासी मुमताज बेगम और अन्य की जमीन अधिग्रहित की गई थी। इन्होंने इस संबंध में अधिक मुआवजे की मांग के लिए अदालत में अपील की। जब राज्य प्रशासन ने बढ़ा हुआ मुआवजा संबंधित लोगों को नहीं दिया तो याचिकाकर्ताओं ने कांचीपुरम की उप-अदालत में याचिका दायर की। इसके बाद उप अदालत ने रेलवे और राज्य सरकार की चल संपत्ति को जब्त करने का आदेश दिया।

 

रेलवे ने कहा मुआवजे की राशि दी गई 
दक्षिण रेलवे के अफसरों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि इस संबंध में मुआवजे के लिए राज्य सरकार को पांच करोड़ रुपए की राशि दी जा चुकी है। अधिकारी ने कहा, ‘‘हम सीधे तौर पर भुगतान नहीं करते, यह मामला राज्य के राजस्व अधिकारियों से जुड़ा है।\"