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सुप्रीम कोर्ट में वैक्सीन पर सुनवाई:कोवैक्सिन लगवा चुके लोगों को कोवीशील्ड लगाने के लिए याचिका, जज बोले- लोगों की जिंदगी से नहीं खेल सकते

नई दिल्ली9 महीने पहले
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याचिका में कहा गया है कि लोगों को अपनी मर्जी से कोवीशील्ड वैक्सीन लगवाने की इजाजत दी जाए, भले ही उन्हें कोवैक्सिन के दोनों डोज ले लिए हों। - Dainik Bhaskar
याचिका में कहा गया है कि लोगों को अपनी मर्जी से कोवीशील्ड वैक्सीन लगवाने की इजाजत दी जाए, भले ही उन्हें कोवैक्सिन के दोनों डोज ले लिए हों।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कोवैक्सिन लगवा चुके लोगों के लिए एक अहम टिप्पणी की। एक याचिका में कोवैक्सिन के दोनों डोज लगवा चुके लोगों को कोवीशील्ड लगाने की इजाजत देने के लिए कहा गया था। याचिका दायर करने वाले का तर्क था कि कोवैक्सिन को WHO से अप्रूवल नहीं मिला है। इस वजह से यह टीका लगवा चुके लोगों को विदेश जाने में दिक्कत होती है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि हम केंद्र सरकार से कोवैक्सिन लगवाने वालों को फिर से कोवीशील्ड लगाने के लिए नहीं कह सकते। ऐसा करके लोगों के हम कोवैक्सिन को मंजूरी देने पर WHO के फैसले का इंतजार करेंगे। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और बीवी नागरत्न की बेंच ने कहा कि वह केंद्र को इस तरह का निर्देश देकर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते कि वे अपनी मर्जी से कोवीशील्ड वैक्सीन लगवाएं, भले ही उन्हें कोवैक्सिन के दोनों डोज ले लिए हों।

लोगों पर असर का डेटा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके पास इस बात का कोई डेटा नहीं है कि लोगों पर क्या असर पड़ेगा। इसलिए हम केंद्र को फिर से वैक्सीनेशन का निर्देश देकर लोगों के जीवन के साथ नहीं खेल सकते। हमने अखबारों में पढ़ा है कि भारत बायोटेक ने मंजूरी के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को आवेदन दिया है। आइए WHO के फैसले का इंतजार करते हैं। हम दिवाली की छुट्टी के बाद इस मामले पर फिर सुनवाई करेंगे।

कोर्ट ने कहा कि इस बात की भी चिंता है कि जनहित याचिका की आड़ में कॉम्पिटिटर फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। याचिका दायर करने वाले वकील कार्तिक सेठ ने बेंच को बताया कि हर दिन कुछ स्टूडेंट्स और लोग जो विदेश जाना चाहते हैं, उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी जा रही है। इसलिए, ऐसे लोग जो कोवैक्सिन के दोनों डोज ले चुके हैं और अपने खर्च या जोखिम पर कोवीशील्ड लगवाना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

देश में अब तक कोवैक्सिन और कोवीशील्ड वैक्सीन लगाई जा रही है। ज्यादातर लोगों को कोवीशील्ड लगी है।
देश में अब तक कोवैक्सिन और कोवीशील्ड वैक्सीन लगाई जा रही है। ज्यादातर लोगों को कोवीशील्ड लगी है।

WHO से अप्रूवल न मिलने की बात पता नहीं थी
याचिका में कहा गया है कि कोवैक्सिन लगवाते वक्त सरकार ने लोगों को इस बात की जानकारी नहीं दी कि इसे WHO से अप्रूवल नहीं मिला है। हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन को अप्रूवल के लिए 19 अप्रैल को WHO में अर्जी दी थी। मई में लोगों को पता चला कि कई देश उन लोगों के अपने यहां एंट्री नहीं दे रहे हैं, जिन्हें WHO से अप्रूव टीके नहीं लगे हैं।

याचिका में अदालत से सरकार को निर्देश देने की गुजारिश की गई है कि संबंधित विभाग भारत बायोटेक की बनाई कोवैक्सिन को मंजूरी मिलने में देरी के लिए ऑफिशियल डेटा और कारणों को जारी करे।

अगले हफ्ते मिल सकता है अप्रूवल
कोवैक्सिन को WHO से अप्रूवल मिलेगा या नहीं, इसका फैसला 2 नवंबर को होने वाली टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप की फाइनल बैठक में हो सकता है। WHO में मेडिसिन और हेल्थ प्रोडक्ट की ADG मैरीएंजेला सिमाओ ने जेनेवा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि हमें भारत की वैक्सीन इंडस्ट्री पर भरोसा है। भारत बायोटेक तेजी से और लगातार हमें डेटा प्रोवाइड करा रही है। कंपनी ने अपने डेटा की आखिरी किश्त 18 अक्टूबर को दी है।

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