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  • Goshava Of Radhakrishna Temple Located In Mayur Vihar Phase 1 Has Been Operating For 12 Years

डिटेक्टिव एजेंसी से जांच करवाकर मुफ्त में गाय देती है गोशाला, अब तक 32 दान कर चुकी

एक वर्ष पहले
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गाय के साथ बाबा मंगल दास।
  • मयूर विहार फेज-1 स्थित राधाकृष्ण मंदिर की गोशाला 12 साल से गोसेवा कर रही है
  • डिटेक्टिव एजेंसी से जांच कराने का मकसद यह देखना है कि आवेदक गाय को कोई नुकसान न पहुंचाए

नई दिल्ली(शेखर घोष). राजधानी के मयूर विहार फेज-1 में स्थित गोशाला लोगों को निशुल्क गाय गोद देती है। यह गोशाला यहां के राधाकृष्ण मंदिर में स्थित है। गोशाला के महंत बाबा मंगल दास 12 साल से यह मुहिम चला रहे हैं। वह खुद को गायों का संरक्षण करते हैं, उनके खान-पान का भी ख्याल रखते हैं। 
 
खास बात यह जो व्यक्ति गाय को गोद लेने की इच्छा जताता है, उसकी जांच बाकायदा प्राइवेट डिटेक्टिव से कराई जाती है। जांच के दौरान देखा जाता है कि आवेदक गाय और अन्य पशुओं के प्रति प्रेम रखता है या नहीं। उसके पास पालन-पोषण के लिए क्या वक्त है। पूरी जांच के बाद आवेदक से बॉन्ड भरवाया जाता है कि गाय के बीमार होने और मौत के बाद गौशाला को सूचना देगा।

1) गोद लेने वाले को देना होता है पासपोर्ट और आधार

बाबा मंगल दास ने बताया कि डिटेक्टिव एजेंसी से जांच का मकसद यह है कि गाय सही व्यक्ति तक पहुंचे। यहां से अब तक 32 लोग गाय को गोद ले चुके हैं। यह गोशाला ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 146 में भी है। दोनों जगह इस समय कुल 3100 गाय हैं। अगर कोई गाय गोद लेना चाहता है तो उसे गोशाला जाकर अपने पासपोर्ट और आधार कार्ड की कॉपी जमा करनी होती है।

वसुंधरा और पटपड़गंज की सोसाइटियों से गौ ग्रास और दान मिलता है। सोसाइटियों में कई जगह ड्रम रखे हैं। लोग उसमें भोजन डालते हैं। 4 ई-रिक्शा पर ड्रमों में डाला गया रोटी, गुड़, आटा एकत्र किया जाता है। गायों को रोज हरा चारा, भूसा, चूना, नमक, सोडा, धनिया, बड़ी ईलाइची, अजवाइन दिया जाता है। बाबा ने बताया कि गायों-बछड़ों के खर्च पर रोज 50 हजार रु. खर्च होते हैं। चारा सप्लाई करने वालों का 38 लाख रु. उन पर कर्ज हो चुका है, लेकिन सेवा जारी है।

बाबा महंत दास ने बताया उनके पास 32 नस्लों की गायें हैं। इनमें मृगनयनी (कपिला), मयूर पंखी (शंखवार), बाग्ला, देवली, मेवाती, मालवी, नागौरी, धाड़पकड़, कॉकरौल, हरियाणवी, अंगौल, सिंधी, पहाड़ी, श्यामा, सहिवाल, मंसूरी, अमृत महाल, हल्दीकर, कंगायम, खिलकरी, कृष्णा वेली हैं। इनमें से कई नस्ल ऐसी हैं जो अब बहुत कम बची हैं। गोशाला में गायों की ब्रीडिंग करवाई जाती है। 

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