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पुलिस ने पार्षद ताहिर के भाई शाह आलम को हिरासत में लिया, आईबी कॉन्स्टेबल की हत्या के मामले में आरोपी

एक वर्ष पहले
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पुलिस हिरासत में आप का निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
पुलिस हिरासत में आप का निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन। (फाइल फोटो)
  • दिल्ली में 22 फरवरी को शुरू हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी, 200 से ज्यादा घायल हुए
  • आईबी हेड कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा के पिता ने निलंबित पार्षद हुसैन के खिलाफ केस दर्ज कराया था

नई दिल्ली. आईबी के हेड कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम को भी हिरासत में लिया गया है। अंकित की हत्या में उसकी भूमिका सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे हिरासत में लिया। पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उसे सात दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा है। 

हिंसा के दौरान हुई अंकित की हत्या हुई थी
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उत्तर पूर्व दिल्ली में भड़की हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी। इसी दौरान आईबी के हेड कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या हुई। अंकित के पिता ने हत्या को लेकर ताहिर पर एफआईआर दर्ज कराई थी।

ताहिर के दफ्तर से तेजाब और पेट्रोल बम मिले थे
हिंसा के बाद पुलिस ने जांच के दौरान ताहिर के चांदबाग स्थित कार्यालय से तेजाब, पत्थर और पेट्रोल बम बरामद किए थे। दंगों के वक्त के कई वीडियो भी सामने आए थे, जिसमें ताहिर की छत से उपद्रवी लोगों पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंकते हुए दिखाई दिए थे।

6 दिन तक फरार रहने के बाद हुसैन गिरफ्तार हुआ
दिल्ली पुलिस द्वारा 5 मार्च को गिरफ्तार किए जाने से पहले ताहिर हुसैन 6 दिन तक फरार रहा। इस दौरान मुस्तफाबाद में रहने वाले 3-4 लोगों ने पुलिस से बचने में उसकी मदद की। क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने शनिवार को कहा कि चांद बाग में हिंसा के दौरान इन लोगों ने हुसैन की पुलिस से छिपे रहने में मदद की थी। ये सभी लोग मुस्तफाबाद के रहने वाले हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस ताहिर के मददगार रहे लोगों पर निगरानी रख रही है। जल्द ही इन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।


दिल्ली में तीन दिन तक चली हिंसा में अंकित शर्मा और दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल समेत 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग इसमें घायल हुए थे। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में टकराव की शुरुआत 22 फरवरी की शाम को हुई थी, जब जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटने लगे, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं।