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चाय की दुकान चलाने वाले शख्स को मिला पद्मश्री, इनके बारे में जानकर मोदी भी रह गए थे हैरान, 'मन की बात' में की थी तारीफ

dainikbhaskar.com

Mar 17, 2019, 10:36 AM IST

इस काम की वजह से ओडिशा के इस चायवाले को मिला 'पद्मश्री' सम्मान

President Ram Nath Kovind confers Padma Shri award upon D Prakash Rao - tea seller from Odisha's Cuttack who also runs school for children living in slums. He has been awarded in the field of Social Work - Affordable Education.
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नेशनल डेस्क (नई दिल्ली). राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार (16 मार्च) को हुए एक समारोह में पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। इस सम्मान को पाने वाले लोगों में एक नाम ओडिशा के डी प्रकाश राव का भी रहा। चाय की दुकान चलाने वाले प्रकाश राव को ये सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में समाज सेवा करने की वजह से मिला। राव पिछले कई सालों से कटक शहर में झुग्गी बस्ती में रहने वाले बच्चों के लिए एक स्कूल चला रहे हैं।

क्या करते हैं डी प्रकाश राव...

- प्रकाश राव ओडिशा के कटक शहर में रहते हैं और चाय बनाकर बेचते हैं। इसके अलावा वे झुग्गी में रहने वाले बच्चों के लिए एक स्कूल भी चलाते हैं। जिसमें 70 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं।
- राव का खुद का बचपन काफी गरीबी में गुजरा। पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद गरीबी की वजह से उन्हें 5 साल की उम्र में स्कूल छोड़ना पड़ गया। इसके बाद 6 साल की उम्र से वे चाय बेचने के काम में लग गए।
- बड़े होने के बाद उन्हें लगा कि जिस तरह गरीबी की वजह से उन्हें पढ़ाई छोड़ना पड़ी ऐसा किसी और बच्चे के साथ ना हो, इसलिए उन्होंने झुग्गी में रहने वाले बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया।
- प्रकाश राव का कहना है कि वे नहीं चाहते कि पैसों की कमी के चलते इन बच्चों की पढ़ाई रूक जाए, इसलिए वे चाय की दुकान चलाने के साथ-साथ स्कूल भी चलाते हैं और उससे वक्त निकालकर अस्पताल में भी मरीजों की मदद करने के लिए भी जाते हैं।

ऐसे निकलता है स्कूल का पूरा खर्चा

- राव के मुताबिक उनके स्कूल में 70 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं और खास बात ये है कि ये बच्चे गलियों में घूमने और अपने घरों में बैठने से ज्यादा स्कूल में बैठना पसंद करते हैं। शुरू में ये बच्चे स्कूल में नहीं आना चाहते थे। लेकिन फिर जब उन्हें यहां खाना देने का फैसला लिया गया तो बच्चों ने रोज आना शुरू कर दिया।
- राव के स्कूल में बच्चों को पढ़ाई कराने के अलावा सिंगिंग, डांसिंग और जूड़ो भी सिखाया जाता है। इसी वजह से स्कूल में उनका मन लगा रहता है। स्कूल चलाने के लिए जरूरी पैसों के इंतजाम को लेकर उनका कहना है कि, 'मैं रोजाना 600 रुपए तक कमा लेता हूं और सीजन के दौरान मेरी कमाई 700-800 रोजाना हो जाती है। इसलिए पैसा मुद्दा नहीं है। मैं चाहता हूं कि ये बच्चे भविष्य में कुछ बन जाएं।'

पीएम ने की थी 'मन की बात' में तारीफ

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम 'मन की बात' में भी डी. प्रकाश राव का जिक्र किया था। इससे पहले वे खुद भी राव से जाकर मिले थे। पीएम से हुई मुलाकात के बारे में राव का कहना है कि जब वे ओडिशा आए मैं 15-20 बच्चों के साथ उनसे मिलने पहुंचा था।
- तब मोदी ने मुझसे कहा था कि 'मैं यहां आपसे मिलने आया हूं। मैं आपके बारे में सब कुछ जानता हूं और किसी को कुछ भी बताने की जरूरत नहीं है।' राव के मुताबिक '26 मई को मोदी जी मुझसे मिले थे और अगले ही दिन उन्होंने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में मेरा जिक्र किया था।
- राव बताते हैं, इस घटना के बाद लोगों ने उनके पास आकर उनके पैर भी छूने शुरू कर दिए। पीएम ने उनसे ये भी कहा था कि अगली बार जब भी वे ओडिशा आएंगे तो उनके स्कूल में बना खाना जरूर खाकर जाएंगे।

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